डोनल्ड ट्रंप पर बनी फ़िल्म का प्रीमियर

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अमरीका में राष्ट्रपति पद का चुनाव सर पर हैं और चुनावी प्रचार ज़ोरों शोरों से जारी है. ऐसे माहौल में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप पर बनाई गई एक फ़िल्म का प्रीमियर न्यूयॉर्क में हुआ. 'गॉड वर्सेज़ ट्रंप - ओनली लव विंस' यानी भगवान बनाम ट्रंप - सिर्फ़ प्यार जीतता है

एक वृतचित्र के तौर पर बनाई गई इस फ़िल्म में ट्रंप की नीतियों को आधार बनाकर इंसानियत और पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान पर ज़ोर दिया गया है. इस फ़िल्म के ब्रिटिश डायरेक्टर ने पिछले दो महीने पहले ही शूटिंग शुरू की और गुरूवार को इसका प्रीमियर न्यूयॉर्क में आयोजित किया गया.

फ़िल्म के प्रोड्यूसर सुनील सदरंगानी फ़िल्म के बारे में कहते हैं, "यह फ़िल्म दुनिया को संदेश देना चाहती है कि अगर ट्रंप अमरीकी राष्ट्रपति बन जाते हैं तो दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है. दुनिया के लिए वह काफ़ी ख़तरनाक होगा. आप कह सकते हैं कि डोनल्ड ट्रंप के खिलाफ़ यह फ़िल्म है."

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सुनील सदरंगानी कहते हैं कि फ़िल्म निर्देशक का यह अनूठा आईडिया उन्हे पसंद आया कि वह इस सिलसिले में बजाए बड़े बड़े बुद्धजीवियों और आध्यात्मिक लोगों से बात करने के आम लोगों से बात करें और ख़ासकर मनोविज्ञान से जुड़े लोगों से उनकी राय लें.

फ़िल्म में दिखाया गया है कि ख़ुद फ़िल्म निर्देशक दुनिया भर के विभिन्न देशों जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका और ब्रिटेन के मनोविज्ञान से जुड़े लोगों से डोनल्ड ट्रंप के अमरीकी राष्ट्रपति बनने की संभावना के बारे में सवाल पूछ रहे हैं.

इस फ़िल्म के निर्देशक मार्टिन डंकर्टन यह भी पूछते हैं कि डोनल्ड ट्रंप के बारे में भगवान क्या सोचता है. इस सिलसिले में अमरीका के मूल निवासी या नेटिव अमरीकन लोगों से भी यह पूछा गया है कि अगर डोनल्ड ट्रंप अमरीकी राष्ट्रपति बन गए तो क्या होगा.

मार्टिन डंकर्टन कहते हैं कि उनको एक दिन यह ख्याल आया कि अगर ट्रंप वाक़ई अमरीकी राष्ट्रपति बन गए तो क्या हो सकता है. उनका कहना है कि बस उन्होंने तय किया कि इसका जवाब आम लोगों से बात करके पता लगाया जाए.

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Image caption फ़िल्म के निर्देशक मार्टिन डंकर्टन चाहते हैं कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से होने वाले प्रभाव लोगों को जानना चाहिए

फ़िल्म के बारे में निर्देशक मार्टिन डंकर्टन कहते हैं, "मैं तो भारत के प्राचीन सिद्धांतों जैसे योग और ध्यान को भी धन्यवाद देना चाहता हूं. उन्हीं सिद्धांतों के ज़रिए दिव्य का दर्शन संभव होता है. इस फ़िल्म के लिए मैंने उसी प्रकार के सिद्धांतों को आधार बनाया है."

फ़िल्म के नाम के बारे में मार्टिन डंकर्टन कहते हैं कि डोनल्ड ट्रंप अंत में एक ऐसे पात्र के समान हैं जो उसी दिव्य का ही एक हिस्सा है और वह दुनिया भर के लोगों को एक आईना भी दिखाता है.

यह फ़िल्म साफ़ तौर पर ट्रंप के खिलाफ़ चुनाव में असर डालने के मकसद से बनाई गई है. इस फ़िल्म में डोनल्ड ट्रंप औऱ उनकी नीतियों की आलोचना की गई है.

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Image caption प्रोड्यूसर सुनील सदरंगानी फ़िल्म के बारे में कहते हैं कि फ़िल्म दुनिया को संदेश देना चाहती है

मार्टिन डंकर्टन कहते हैं कि उनका मक़सद है कि इस फ़िल्म से अमरीका में युवा पर ऐसा असर हो कि वह डोनल्ड ट्रंप को अमरीकी राष्ट्रपति बनने से रोकें और भारी संख्या में वोट डालें. डंकर्टन कहते हैं कि इसके लिए हिलेरी क्लिंटन को ही वोट देना होगा जिससे डोनल्ड ट्रंप न जीत सकें.

इस फ़िल्म में विभिन्न देशों के लोगों ने अपने अपने अंदाज़ में डोनल्ड ट्रंप की परिभाषा देने की कोशिश की है. यहां तक कि ब्रिटेन की एक मानवशास्त्र से जुड़ी महिला ने कहा कि डोनल्ड ट्रंप को भगवान ने खासकर मनुष्यों का इम्तिहान लेने के लिए भेजा है.

फ़िल्म के निर्देशक ने हास्य को भी फ़िल्म में पिरोया है औऱ ज़ाहिर है डोनल्ड ट्रंप को ही मज़ाक और कटाक्ष का निशाना बनाया गया है.

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