अमरीका चुनाव: ट्रंप के जीतने से कैसे बदलेगी दुनिया?

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राष्ट्रपति चुनाव में डोनल्ड ट्रंप की जीत से अमरीका और दुनिया के बाक़ी देशों के बीच के संबंध कई मायनों में बदल सकते हैं. आइए नज़र डालते हैं पाँच ऐसे पहलुओं पर.

मुक्त व्यापार

अगर डोनल्ड ट्रंप अपनी व्यापार नीतियों पर अमल करते हैं तो बाक़ी दुनिया से अमरीका के व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव आएगा. ट्रंप कई मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की धमकी दे चुके हैं. इसमें अमरीका, कनाडा और मेक्सिको के बीच नॉर्थ अमेरीकन फ़्री ट्रेड समझौता भी शामिल है. ट्रंप का आरोप है कि इस समझौते की वजह से लोगों की नौकरियाँ गई हैं. ट्रंप ने विश्व व्यापार संगठन से अमरीका के क़दम पीछे हटाने की ओर भी इशारा किया है. डोनल्ड ट्रंप आयात होने वाले सामान पर शुल्क लगाने के पक्ष में है. उन्होंने चीन से आने वाले सामान पर 35 फ़ीसदी शुल्क और मेक्सिको से आने वाले सामान पर 35 फ़ीसदी शुल्क लगाने की बात भी की है ताकि अमरीकी कंपनियाँ नौकरियों के लिए दूसरे देशों के लोगों की ओर न देखें.

जलवायु परिवर्तन

डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो दिसंबर 2015 में हुए पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते को रद्द कर देंगे. उन्होंने ये भी कहा है कि वो संयुक्त राष्ट्र के ग्लोबल वार्मिंग कार्यक्रमों के लिए अमरीकी भुगतान बंद कर देंगे. वैसे तो कोई देश अपने स्तर पर पेरिस समझौता रद्द नहीं कर सकता. लेकिन अगर अमरीका ऐसा करता है या बराक ओबामा द्वारा उठाए गए क़दमों को बंद कर देता है तो ये पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के लिए बड़ा झटका होगा. ट्रंप फ़ॉसिल फ्यूल (तेल और गैस) के हिमायती हैं.

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सीमा की नाकेबंदी

अप्रवासियों के मुद्दे पर कड़े बयान देने वाले ट्रंप ने अपना रुख़ कई बार बदला है. इसलिए ये कहना मुश्किल है कि क्या वो सब कड़े दावों पर अमल करेंगे या नहीं. उन्होंने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत अमरीका-मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के वादे के साथ की थी. साथ ही उन्होंने कहा था कि वो एक करोड़ 10 लाख अप्रवासियों को वापस अपने देश भेज देंगे जिनके पास वैध काग़ज़ात नहीं है. हालांकि उसके बाद से ट्रंप ने अपना रुख़ नर्म किया है और कहा है कि वे अमरीका में रहने वाले लाखों 'अपराधियों' को निकाल देंगे और बाक़ी के लोगों से बाद में निपटा जाएगा. वे आख़िर तक कहते रहे हैं कि मेक्सिको सीमा पर बनने वाली दीवार के लिए पैसा देगा लेकिन जब वो मेक्सिको गए तो उन्होंने भुगतान की बात नहीं की थी. ट्रंप ने ये भी घोषणा की थी कि अमरीका में मुसलमानों के आने पर पूर्ण प्रतिबंध होगा. लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि ये महज़ सुझाव है, नीति नहीं. अब उनका कहना है कि कुछ विशेष देशों से आने वाले लोगों पर कड़ी नज़र रखी जाएगी. उन्होंने इन देशों के नाम नहीं लिए.

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नैटो

डोनल्ड ट्रंप ने नैटो को पुराना हो चुका सगंठन बताया है जिससे जुड़े देश उनके मुताबिक़ एहसान फ़रामोश हैं और अमरीका के नाम पर फ़ायदा उठाते हैं. ट्रंप का कहना है कि अमरीका एशिया और यूरोप के देशों को अब और संरक्षण नहीं दे सकता जबतक कि अमरीका को भी बदले में कुछ मिले. उन्होंने सुझाव दिया कि वे अमरीकी सेना को वापस बुला सकते हैं बर्शते ये देश आर्थिक भुगतान करें. एक तरह से देखा जाए तो ट्रंप उन्हीं चिंताओं को ज़ाहिर कर रहे हैं जो अमरीका पहले भी जताता रहा है कि नैटो देश कम से कम दो फ़ीसदी हिस्सा रक्षा बजट पर ख़र्च करें. हालांकि कई लोग ये सवाल भी पूछते रहे हैं कि क्या ट्रंप एक ऐसे गठबंधन से पीछे हटना चाहेंगे जो अमरीका की विदेश नीति का अहम हिस्सा रहा है.

रूस

ट्रंप का कहना है कि उनके मुताबिक़ वो रूस के साथ तनाव कम कर सकते हैं. वे कहते रहे हैं कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन एक मज़बूत नेता हैं और वे उनके साथ बेहतर रिश्ते चाहेंगे. ये कैसा होगा ये ट्रंप ने स्पष्ट नहीं किया है सिवाय इसके कि आईएस के चरमपंथियों के ख़िलाफ़ मिलकर लड़ना चाहते हैं. ट्रंप को यक़ीन है कि वो हिलेरी क्लिंटन या बराक ओबामा के बजाय पुतिन का भरोसा बेहतर तरीक़े से जीत पाएँगे.

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