नोट भारत में बंद, बवाल नेपाल में!

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Image caption भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली.

भारत में 500 और 1000 रुपये के नोट वापस लेने की वजह से नेपाल में भी अफ़रा-तफ़री का माहौल है.

नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में 'नोट बंदी' का असर साफ़ देखा जा सकता है.

चूंकि, भारत और नेपाल की सीमा खुली है और नेपाल के कई इलाकों में भारतीय रुपये का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है, इस वजह से भारत के फ़ैसले का असर नेपाल के इलाक़ों में भी देखने को मिल रहा है.

इस फ़ैसले का असर नेपाल राष्ट्र बैंक के उस आदेश के बाद और भी बढ़ गया है, जिसमें कहा गया है कि वित्तीय संस्थानों, मनी एक्सचेंज काउंटर और अन्य एजेंसियों में इन नोटों को तत्काल रोक दिया जाए.

हालांकि, नेपाल राष्ट्र बैंक ने भारतीय रिज़र्व बैंक को इस मामले में पत्र लिखकर मैत्रीपूर्ण समाधान निकालने की मांग की है.

भारत की तरफ से अचानक लिए गए इस फैसले से नेपाल के कारोबारी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं.

सोने और चांदी के थोक कारोबारी शंकर साहा ने कहा कि किसी एक ही आदमी के पास ऐसे नोटों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है. लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास ऐसे नोट हैं. इनका अब क्या किया जाए, यह समझना मुश्किल हो गया है.

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Image caption वित्त सचिव शक्तिकांत दास और रिज़र्व बैंक के चेयरमैन उर्जित पटेल

स्थानीय व्यापारी कुछ और समस्याएं गिनवाते हुए कहते हैं, "नोटों के बंद होने का सीधा असर ज़रूरी सामान की आवाजाही पर साफ़ दिख रहा है. भारतीय ट्रकों को भुगतान करना मुश्किल हो गया है."

नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता नारायण प्रसाद पौडेल ने कहा, ''आम लोगों के पास 500 और 1000 रुपये के भारतीय नोट कितने हैं, इसकी जानकारी नहीं है. लेकिन नेपाल बैंकिंग सेक्टर में इस तरह के करीब दो करोड़ नोट हैं.''

इसे लेकर नेपाल में लोग बैंकों में संपर्क कर रहे हैं. लेकिन बैंक अभी किसी भी तरह का समाधान नहीं दे पा रहे हैं.

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