भारत की 'नोट बंदी' का असर विदेशों में भी

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मोदी सरकार ने काले धन पर अंकुश लगाने के मक़सद से 500 और 1000 के नोट बंद करने का फ़ैसला लिया है. इस फैसले का असर सिर्फ़ देश में ही नहीं, भारत के पड़ोसी मुल्कों में भी देखने को मिल रहा है.

बांग्लादेश

बांग्लादेश की वेबसाइट बीडीन्यूज24 डॉटकॉम के अनुसार भारत में हजारों बांग्लादेशी अक्सर इलाज कराने के लिए आते हैं. मोदी सरकार के इस कदम का काफी असर इन पर पड़ेगा.

वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश के जैसोर के रहने वाले शेख मुदस्सर अली अपनी किडनी का इलाज कोलकाता से करा रहे हैं.

अली के भाई ने वेबसाइट को बताया, "अस्पताल ने कहा है कि वे केवल 100 रुपये के नोट लेंगे, जबकि मेरे पास 100 के कुछ ही नोट हैं."

इसी तरह साइमा ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर टका को रुपये में बदलवाया था, वो कीमोथेरेपी करवाने के लिए कोलकाता आ रही थीं, लेकिन उन्हें बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ा.

वजह ये रही कि अस्पताल ने बंद हुए नोटों को लेने से मना कर दिया.

नेपाल

नेपाल के अख़बार काठमांडू पोस्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक 'द नेपाल राष्ट्र बैंक' ने भी भारत में बंद किए गए नोटों को नेपाल में बैन कर दिया है.

इसका असर नेपाल में कारोबार में बड़े पैमाने पर हो सकता है, क्योंकि वहां भारतीय मुद्रा बहुत अधिक प्रचलन में है.

नेपाल के विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन विभाग के प्रमुख भीष्म राज धुंगाना के अनुसार नेपाल में लगभग 13 करोड़ पचास लाख भारतीय रुपया प्रचलन में हैं.

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म्यांमार

म्यांमार के व्यापारी मोदी सरकार के इस क़दम से नाराज़ हैं. वजह है कि इस कदम से वहां की मुद्रा विनिमय दर काफी गिर गई है.

वेबसाइट 'द डमोक्रेटिक वॉयस ऑफ़ बर्मा' के अनुसार म्यांमार के सीमांत कस्बे टामू के व्यापारियों को तो इस कदम से काफी नुकसान सहना पड़ रहा है.

इस कस्बे के एक व्यापारी के अनुसार वह लोग मांडले से माल लाकर सीमा पार भारतीय व्यापारियों को निर्यात करते हैं. यह भुगतान हमेशा रुपयों में करते हैं.

उन्होंने कहा, "अब हमारे पास रुपयों का भंडार है, लेकिन अब मांडले में अपने ग्राहकों को भुगतान के लिए हमें रुपये को कयात में बदलवाना होगा."

इस कदम से मुद्रा विनिमय दर बदल गई है. अब हमें इसे लेकर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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सिंगापुर

सिंगापुर के स्थानीय अख़बार द स्ट्रैट्स टाइम्स के अनुसार, वहां पर काफी लोग पुराने भारतीय नोटों को बदलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन न तो बैंक और न ही मनी चेंजर पुरानी भारतीय मुद्रा को स्वीकार रहे हैं.

अख़बार के अनुसार, "मोदी सरकार के इस क़दम का असर सिर्फ भारत नहीं अन्य देशों पर भी पड़ेगा."

सिंगापुर में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े सुपरवाइज़र ने लगभग बीस हज़ार भारतीय रूपये बचाये थे जिन्हें वो अगले साल छुट्टियों में भारत में खर्च करने की योजना बना रहे थे. लेकिन अब उनके सामने यह मुसीबत है कि कोई बैंक या मनी चेंजर इन्हें स्वीकार नहीं कर रहा है.

सिंगापुर के लिटिल इंडिया डिस्ट्रिक्ट के मनी चेंजर अब्दुल मलिक ने इस बात की तस्दीक की है कि उन्होंने पुराने भारतीय नोट लेने और देने बंद कर दिए हैं.

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मलेशिया

'फ्री मलेशिया टुडे' वेबसाइट के अनुसार, "मलेशिया से भारत आने वाले पर्यटकों को भी मोदी सरकार के इस कदम से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि मनी चेंजर्स ने नोट बदलना बंद कर दिया है."

मलेशियन एसोसिएशन ऑफ़ मनी सर्विसेस बिज़नेस के अनुसार , उन्हें अभी इस बारे में भारतीय उच्चायोग से स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं मिले हैं.

बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई खाड़ी देशों में कई भारतीय रहते हैं. इसमें से अधिकांश केरल से हैं.

इन देशों में मोदी सरकार के इस कदम के बाद खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

भारतीय सरकार से कोई साफ दिशा निर्देश न मिलने के कारण भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ौदा जैसे भारतीय बैंकों की शाखाओं ने पुराने नोटों का विनिमय बंद कर रखा है.

यूएई एक्सचेंज के प्रमुख अफसर प्रमोद मंगत के अनुसार, "हमारे सभी विनिमय केंद्रों ने मंगलवार रात से सभी कैश लेन-देन पर रोक लगा रखी है. इसके बावजूद लोग हमारी शाखाओं के चक्कर काट रहे हैं."

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