'मल' से निकले पानी को बिल गेट्स ने स्वादिष्ट बताया था

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मल के बारे में भले ही बात करना पसंद नहीं आता हो, लेकिन ये हर किसी के जीवन का ज़रूरी हिस्सा है.

हम सब एक दिन में सामान्य तौर पर 135 से 180 लीटर सीवेज यानी नाली में बहने वाले मैले पानी के लिए ज़िम्मेदार होते हैं, जिसका प्रबंधन न सिर्फ महंगा है, बल्कि मुश्किल काम भी है.

सीवेज में हमारे नहाने-धोने का मैला पानी, मल और मूत्र सभी कुछ बह जाता है और हम इसे हिकारत भरी नज़र से देखते हैं. लेकिन क्या इसे फ़ायदे के सौदे में बदला जा सकता है?

इसका जवाब है हां. कुछ कंपनियां ऐसा कर भी रही हैं और मल से मुनाफ़ा कमा रही हैं.

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Image caption सरकारी मदद से सात करोड़ पाउंड की लागत से नॉर्थम्ब्रियन वॉटर कंपनी ने दो प्लांट लगाए.

नॉर्थम्ब्रियन वॉटर कंपनी सीवेज से निकाले गए सारे मैले से बिजली पैदा करने वाली ब्रिटेन की पहली कंपनी है.

कंपनी के वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट विभाग के प्रमुख रिचर्ड मरे कहते हैं कि 1990 में पानी की रीसाइकलिंग पर ज़ोर नहीं था. बस हम चाहते थे कि मैला गायब हो जाए.

1996 में नॉर्वे की एक कंपनी से हाथ मिलाकर नॉर्थम्ब्रियन वॉटर ने मल की निकासी के लिए होने वाले खर्च को आमदनी में बदलने का फ़ैसला किया.

ये कंपनी ऑक्सिजन के बग़ैर जीवित रहने वाले जीवाणुओं की मदद से मल की पाचन क्रिया से निकलने वाले मीथेन और कार्बन डाय-ऑक्साइड को इकट्ठा करती है, जिससे गैस इंजन से बिजली पैदा की जाती है.

दो बायोगैस प्लांट की मदद से कंपनी के बिजली के सालाना बिल में 20 फ़ीसदी की कमी आई है. यानी करीब डेढ़ करोड़ पाउंड की बचत.

चीन, स्वीडन और जर्मनी में भी बायोगैस प्रॉडक्शन आम बात हो गई है.

संयुक्त राष्ट्र के आंकलन के मुताबिक़ दुनिया भर के लोगों का मल इकट्ठा कर बायोगैस प्लांट में इस्तेमाल किया जाए, तो इंडोनेशिया, ब्राज़ील समेत इथियोपिया के 1 करोड़ 38 लाख घरों के लिए बिजली का उत्पादन किया जा सकता है.

लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉटिंघम की एसोशिएट प्रोफ़ेसर सारा जेविट का कहना है कि इसमें सासंकृतिक अड़चनें भी हैं और विकासशील देशों में सीवेज से स्वास्थ्य की समस्याएं जुड़ी हैं.

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Image caption विकासशील देशों में शौचालय और सीवेज सफ़ाई और स्वास्थ्य के लिए एक समस्या का कारण हैं.

विकासशील देशों में गंदगी की वजह से सात लाख बच्चों की हर साल मौत होती है.

बिल गेट्स फ़ाउन्डेशन से आर्थिक मदद लेकर जानिकी बायोएनर्जी ने सीवेज से पीने का पानी और बिजली का उत्पादन किया है.

माइक्रोसॉफ़्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने तो इस पानी को स्वादिष्ट तक कहा था.

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Image caption सीवेज से पीने का पानी उपलब्ध कराने का पहला प्रॉजेक्ट अफ्रीका में सेनेगल के डकार में शुरू किया गया है.

जानिकी बायोएनर्जी की अध्यक्ष सारा वैन टैसल को उम्मीद है कि क़रीब दो लाख लोगों के मल से साफ़ पानी निकालने के लिए कई मशीनें दुनिया भर में लगाई जाएंगी.

इससे 35,000 लोगों के लिए पीने का पानी उपलब्ध किया जा सकेगा.

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Image caption एक यात्री के भोजन और सीवेज के मैले से उत्पन्न ईंधन 'बायो बस' को 60 किलोमीटर चलाने के लिए काफ़ी होगा.

इस बीच ब्रिटेन में पहली 'पू बस' (सीवेज से बनी ऊर्जा) से चलने वाली बस भी पिछले साल लॉन्च की जा चुकी है.

इतना ही नहीं वैज्ञानिकों को मल से सोना, चांदी, पैलेडियम और अन्य दुर्लभ तत्व भी मिले हैं.

अमरीका के शोधकर्ताओं ने पिछले साल अमरीकी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से सोने के इतने चिह्न पाए थे, जो अगर किसी चट्टान में मिलते तो खनन की संभावनाएं थीं.

एरीज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक़ अमरीका के दस लाख लोगों के मल में एक करोड़ तीस लाख डॉलर के कीमती धातु हर साल बहा देते हैं.

इस प्रोजेक्ट को समझने के बाद लगता है कि मल को नाली में बहा देना समझदारी नहीं है.

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