मौत के बाद ज़िंदा रहने की जंग लड़की ने जीती

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एक असाधारण कैंसर से जूझ रही 14 साल की लड़की जो मरने के बाद अपने शरीर को फ्रीज़ करना चाहती थी, उसने अपनी मौत से ठीक पहले क़ानूनी लड़ाई जीत ली है. लड़की कैंसर की वजह से मौत के कगार पर थी.

लड़की की मां अपनी बेटी की इस आख़िरी इच्छा के समर्थन में थी लेकिन उसके पिता ऐसा नहीं चाहते थे.

लंदन की रहने वाली ये लड़की अपना नाम उजागर नहीं करना चाहती थी.

अदालत ने लड़की की मां को उसके शव के बारे में आख़िरी फ़ैसला लेने का अधिकार दे दिया है. लड़की की अक्तूबर में ही मौत हो गई थी.

अब लड़की के शव को फ़्रीज करने के लिए अमरीका ले जाया गया है.

इस पूरे केस को अब लोगों के सामने लाया गया है.

इस लड़की ने अपने जीवन के आख़िरी महीनों में इंटरनेट पर 'क्रायोनिक' प्रक्रिया की पड़ताल की थी.

क्रायोनिक में शव को शून्य से 130 डिग्री नीचे के तापमान पर रखा जाता है और इसके ज़रिए मस्तिष्क को सुरक्षित रखा जाता है.

इसमें पूरी बॉडी को फ्रीज़ किया जाता है ताकि भविष्य में बीमारी दूर होने पर फिर से जीवित होने की संभावना बनी रहती है.

उस लड़की ने जज को लिखा था कि वह लंबे वक्त तक जीना चाहती है. उसने जज से कहा था, "मैं ज़मीन के भीतर दफ़न नहीं होना चाहती.

लड़की ने लिखा था, ''मुझे क्रायोप्रिज़र्वेशन का मौका दिया जाए ताकि उम्मीद बची रहे. भले इसमें सैकड़ों साल का वक्त लग जाए.''

जज जस्टिस पीटर जैक्सन लड़की के अस्पताल गए थे. उन्होंने लड़की को देखने के बाद कहा था कि वह बहादुरी से बेहद मुश्किल स्थिति का सामना कर रही है. इस मामले में पीटर ने फ़ैसला देते हुए कहा कि 'क्रायोनिक्स' सही है या ग़लत मसला यह नहीं है बल्कि विवाद मां-बाप के बीच का है कि लड़की की बॉडी का क्या किया जाना चाहिए.

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Image caption नाइट्रोजन लिक्विड में रखी जाती बॉडी

'क्रायोनिक्स' एक विवादित प्रक्रिया है. अभी लोगों को पता नहीं है कि यदि बॉडी को फ्रीज़ कर दिया जाता है तो फिर से जीवित होने की संभावना बची रहती है. यह सुविधा अमरीका और रूस में है जहां पर बॉडी को लिक्विड नाइट्रोजन में बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है. हालांकि यह सुविधा ब्रिटेन में नहीं है. इस प्रक्रिया के लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं. एक अनुमान के मुताबिक इसमें करीब 30 लाख रुपये का खर्च आता है.

लड़की ने जज को पत्र लिखा था, "मैं केवल 14 साल की हूं और मैं मरना नहीं चाहती, लेकिन मैं मरने वाली हूं. मेरा मानना है कि क्रायोप्रिजर्व्ड से मुझे एक उम्मीद मिलेगी. मैं नहीं चाहती कि मुझे ज़मीन में दफन कर दिया जाए. मैं लंबे वक्त तक जीना चाहती हूं. मुझे उम्मीद है कि भविष्य में मेरा कैंसर ठीक हो होगा और मैं ज़िंदा हो सकूंगी. मैं इस मौके को खोना नहीं चाहती.

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Image caption क्रायोनिक्स की प्रक्रिया

लड़की के माता-पिता तलाक़शुदा हैं. बीमार होने के बाद लड़की का पिछले छह सालों से पिता से कोई संपर्क नहीं था. हालांकि लड़की की मां अपनी बेटी की चाहत से सहमत थी. मां ने बेटी की बॉडी को फ्रीज़ करने में मदद की. लड़की के पिता इसके लिए तैयार नहीं थे.

लड़की के पिता ने कहा, ''यदि उसका इलाज कामयाब भी हो जाता है और वह 200 साल बाद फिर से जीवित होती है तो वह अपने किसी रिश्तेदार को नहीं याद कर पाएगी. इसके बाद वह हताशा की स्थिति में जा सकती है. वह केवल 14 साल की है और वह अभी अमरीका में है.''

हालांकि बाद में लड़की के पिता ने कहा कि वह अपनी बेटी के फ़ैसले का सम्मान करते हैं. वह बेटी की मौत के बाद शव को देखना चाहते थे.

जज ने कहा कि इंग्लैंड और वेल्स के कोर्ट में इस तरह का यह पहला मामला है. उन्होंने कहा कि शायद यह कहीं का भी पहला मामला है.

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