मिलिए सीरिया की मलाला यूसुफज़ई से

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Image caption बाना अलआबेद

पाकिस्तान में तालिबान के नियंत्रण वाली स्वात घाटी से एक 11-12 साल की बच्ची गुल मकई अपने अनुभव को हर हफ़्ते अपनी डायरी में लिखती थी जिसे बीबीसी के ज़रिए दुनिया के सामने लाया जाता था.

बाद में वही बच्ची मलाला यूसुफ़ज़ई (गुल मकई का असली नाम) शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली सबसे कम उम्र की विजेती बनी.

आज उसी तरह की दूसरी मिसाल पेश कर रही है सात साल की एक बच्ची बाना अलआबेद.

ये बच्ची सीरिया के एलेप्पो में रहती है.

सीरिया पिछले पांच वर्षों से गृहयुद्ध का शिकार है और एलेप्पो पर फ़िलहाल विद्रोहियों का क़ब्ज़ा है.

एलेप्पो में रह रहे लोग एक तरफ़ विद्रोहियों का ज़ुल्म सहने को मजबूर हैं दूसरी तरफ़ सीरियाई सरकार और गठबंधन सेना की हवाई बमबारी की मार झेलते हैं.

युद्ध क्षेत्र में रह रहे लोगों की मुश्किलों को अब दुनिया के सामने ला रही हैं बाना अलआबेद. वो इसके लिए ट्विटर का सहारा ले रही हैं.

और इस काम में उनकी मां फ़ातिमा उनकी मदद करती हैं.

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बाना कहती हैं कि वो रात में भी नहीं सो सकतीं क्योंकि कई बार तो रात भर बमबारी होती है.

बाना को इस वक़्त 90 हज़ार लोग ट्वीटर पर फ़ॉलो करते हैं.

उनकी मां फ़ातिमा पर आरोप लग रहे हैं कि वो प्रोपगैंडा के लिए अपनी सात साल की बेटी का इस्तेमाल कर रही हैं.

लेकिन इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए फ़ातिमा कहती हैं कि एलेप्पो में हर कोई डर के साये में जीने को मजबूर है.

वो कहती हैं कि उनका मक़सद सिर्फ़ ये है कि दुनिया का ध्यान इस ओर खिंचा जाए कि एलेप्पो में बच्चों और आम नागरिकों की ज़िंदगी कितनी मुश्किल है.

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