कच्चे तेल के कम उत्पादन का फ़ैसला, दाम बढ़े

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कच्चा तेल निर्यात करनेवाले देशों की संस्था ओपेक कच्चे तेल के उत्पाद में कमी करने पर सहमत हो गई है. जिसके बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी हुई है.

वियना में हुई बैठक के बाद इस फ़ैसले का एलान किया गया और इसके ठीक बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में आठ फ़ीसदी से ज़्यादा का इज़ाफ़ा हो गया.

ओपेक के अध्यक्ष डॉक्टर मोहम्मद बिन सालेह अल-सदा ने बताया कि प्रति दिन 12 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन कम किया जाएगा.

ये फ़ैसला अगले साल जनवरी से लागू होगा.

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Image caption ओपेक के अध्यक्ष और कतर के ऊर्जा मंत्री डॉक्टर मोहम्मद बिन सालेह अल-सदा

ये कटौती सदस्य देशों के कुल तेल उत्पादन का करीब तीन फ़ीसदी है. जिसके बाद कच्चे तेल का उत्पादन 325 लाख बैरल प्रति दिन ही रह जाएगा.

आठ सालों के दौरान पहली बार इस उम्मीद के साथ ये समहति बन पाई ताकि तेल की क़ीमतें बढ़ सकें.

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पिछले दो सालों के दौरान तेल की क़ीमतों में प्रति बैरल 100 डॉलर से ज़्यादा की कमी आ गई थी.

अल-सदा के मुताबिक़ महत्वपूर्ण गैर-ओपेक देश भी इस सौदे के पक्ष में थे और अंतरिम रूप से अपने उत्पादन को कम करने की योजना बना रहे थे.

उन्होंने इसमें शामिल सभी देशों का नाम नहीं बताया, लेकिन कहा कि रूस अपने तेल उत्पादन को एक करोड़ बैरल प्रति दिन से घटाकर तीन लाख बैरल प्रति दिन करने के लिए तैयार हो गया है.

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