अलेप्पो: विद्रोहियों के कब्ज़े से निकला आधा इलाका

इमेज कॉपीरइट AP

सीरियाई सेना ने पूर्वी अलेप्पो में विद्रोहियों के कब्ज़े से आधे इलाके को वापस ले लिया है.

सीरियाई सेना के प्रवक्ता जनरल समीर सुलेमान ने बीबीसी को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि कुछ ही हफ़्तों में पूरा अलेप्पो फिर से सरकार के नियंत्रण में होगा.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद का विरोध कर रहे विद्रोहियों के कब्ज़े वाले तारीक़ अल- बाब इलाके पर सेना का नियंत्रण होने के बाद उन्होंने ये जानकारी दी.

ब्रिटेन आधारित एक संस्था ने कहा कि तारीक़ अल-बाब पर शुक्रवार को सेना ने नियंत्रण कर लिया है जिससे अब सीरियाई सरकार के कब्ज़े वाले इलाकों और अलेप्पो के हवाई अड्डे के बीच रास्ता खुल गया है.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption फ़ाइल फ़ोटो

करीब 25 हज़ार लोग विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाकों में फंसे हुए बताए जा रहे हैं.

अलेप्पो में कई हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने इस हफ़्ते ने कहा कि अलेप्पो में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत इतनी ख़राब है कि बिना बेहोशी की दवा के मेडिकल ऑपरेशन किए जा रहे हैं.

पूर्वी अलेप्पो में सीरियाई सेना के अभियान की शुरुआत से लेकर अब तक कम से कम 300 लोगों की मौत हो गई है.

इमेज कॉपीरइट AFP

पश्चिम अलेप्पो में स्थिति का जायज़ा लेने पहुंची बीबीसी की मुख्य अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता लीस ड्यूसेट का कहना है कि शुक्रवार रात भर पूर्वी इलाके से भारी बमबारी की आवाज़ें सुनी गईं.

लड़ाई तेज़ होने के बाद हज़ारों लोग तारीक़ अल- बाब छोड़कर पड़ोस के इलाकों में भाग गए हैं.

इस हफ़्ते की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ दूत ने चेतावनी दी थी कि अलेप्पो एक बड़े कब्रगाह में तब्दील हो सकता है.

उन्होंने कहा कि भूखमरी के हालात ये थे कि कुछ लोग कूड़ा खाकर गुज़ारा कर रहे थे.

इमेज कॉपीरइट REUTERS
Image caption अलेप्पो में खाने की क़िल्लत से लोगों के हालात बदतर होते जा रहे हैं.

सीरिया में 2011 में राष्ट्रपति असद के खिलाफ़ बग़ावत शुरू होने से पहले अलेप्पो सीरिया का सबसे बड़ा शहर ही नहीं बल्कि बड़ी औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र था.

पिछले चार साल से शहर लगभग दो टुकड़ों में बंट गया था लेकिन पिछले साल ईरानी लड़ाकों और रूसी हवाई हमलों की मदद से सीरियाई सेना ने स्थिति पर नियंत्रण वापस पाना शुरू किया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे