न्यूयॉर्क में नोट बदलने को तरसे भारतीय

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करेंसी बैन का अमरीका में रहनेवाले भारतीय या भारतीय मूल के लोगों पर भी असर पड़ा है, उन्हें घंटों लाइनों में तो न लगना पड़ रहा है लेकिन बैंकों के चक्कर ज़रूर लगाने पड़ रहे हैं और फिर भी मायूसी हाथ लग रही है.

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नोटबंदी

अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के बहुत से लोग भारत का चक्कर अकसर लगाते रहते हैं. और उनमें से काफ़ी ऐसे हैं जिनके भारतीय मुद्रा की बड़ी रक़म मौजूद है.

उनकी समस्या यह है कि नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रूपए के नोटों को कहां बदलने जाएं.

न्यूयॉर्क के पकीप्सी इलाके में रहने वाले भारतीय मूल के हरविंदर सिंह मैनहैटन की स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की ब्रांच में 500 और 1000 की नोटों को बदलवाने आए थे. उनकी मां भारत से उनसे मिलने आई हुई थीं और ये उनके पैसे थे. लेकिन हरविंदर बैंक से मायूस लौटे.

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हरविंदर कहते हैं, "मैं 2 घंटे ड्राइव करके आया कि यहां मेरी 86 वर्षीय मां के क़रीब 10 हज़ार की रक़म बदल जाएंगे, लेकिन बैंक ने साफ़ मना कर दिया. अब तो वह रक़म हमारे लिए बेकार ही है."

हरविंदर सिंह बताते हैं कि बैंक वालों ने उनसे कहा कि किसी भारत जाने वाले के हाथ वह नोटें भिजवा कर बदलवा लें. लेकिन वह कहते हैं कि भारत में लोग ख़ुद ही अपनी नोटे बदलवाने में परेशान हैं तो इनकी नोट कौन बदलवाने जाएगा.

हरविंदर बताते हैं कि उनके बहुत से दोस्त भी नोट बदलवाना चाहते हैं लेकिन अमरीका में इसका कोई इंतज़ाम नहीं है.

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500 और 1000 रुपये के नोट का चलन बंद होने का असर विदेशों में भी दिख रहा है.

अमरीका में स्थित स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और बैंक ऑफ़ बड़ौदा जैसे भारतीय बैंकों की शाखाएं भारतीय रूपए लेने या देने से साफ़ इंकार करती हैं. और नोटबंदी के सिलसिले में बैंकों में नोटिस लगा दिए गए हैं कि 500 और 1000 रुपये के नोटों को सिर्फ़ भारत में ही बदला जा सकता है.

बैंक ऑफ़ बड़ौदा के काउंटर पर मौजूद एक टेलर ने बताया कि दिन भर लोगों के फ़ोन आते रहते हैं और वह सभी यह पूछते हैं कि भारतीय रूपए की 500 और 1000 की नोटें बदलने के लिए क्या करें, और कहां जाएं?

न्यूयॉर्क में रहने वाले एक भारतीय मूल के वकील आनंद अहूजा के पास कई लोग नोटबंदी के कारण उपजी परेशानी का हल ढूंढने भी आ रहे हैं.

आनंद अहूजा कहते हैं, "मुझसे कुछ लोग पूछते हैं कि 60 हज़ार, 1 लाख रूपए, या 2 लाख रूपए की रकम 500 और 1000 के नोटों में उनके पास है, तो वह अमरीका में कैसे बदलवाएं. भारतीय बैंकों में कोई मदद नहीं मिल रही, वाणिज्यिक दूतावास जाते हैं तो वहां भी कोई हल नहीं मिलता."

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अहूजा आगे बताते हैं कि "कुछ लोग तो भारत में नोटों को बदलने के लिए ले जाने के बदले 50 प्रतिशत की रक़म भी देने को तैयार हैं."

नोटबंदी के कारण उपजी समस्या के बारे में विभिन्न अमरीकी शहरों में स्थित भारतीय वाणिज्यिक दूतावास से भी लोगों को कोई मदद नहीं मिल रही है.

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नोट बदलने में विदेशों में दिक्कत

अभी भारत में 500 और 1000 के नोट बदलवाने के लिए लगभग दो हफ़्तों का समय बाक़ी है.

और इसीलिए कुछ लोग भारत जाने वाले दोस्तों और संबंधियों से गुज़ारिश कर रहे हैं कि उनके नोट लेते जाएं और भारत में बदलने के लिए उनके रिश्तेदारों को दे दें.

न्यूजर्सी में रहने वाले भारतीय मलू के अमरीकी जाफ़र मोहम्मद दिसंबर माह में ही भारत अपने परिवार से मिलने जा रहे हैं और उनके कई दोस्त 500 और 1000 की नोटों में हज़ारों रूपए भारत में बदलने के लिए दे गए हैं.

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जाफ़र मोहम्मद कहते हैं, "मेरे काफ़ी दोस्तों ने मुझे रूपए दिए हैं, अब तक क़रीब एक लाख रूपए के 500 और 1000 के नोट मुझे दिए गए हैं. और इन नोटों को भारत में दिसंबर की समय सीमा के भीतर ही बैंक से 100 के नोट में बदलवाने के लिए उनके परिवार वालों को देने को कहा गया है."

500 और 1000 रुपये के नोटों को रद्द किए हुए एक महीने से अधिक समय हो गया लेकिन अब तक विदेशों में भारतीय बैंकों की ब्रांचों को कोई दिशा निर्देश नहीं दिए गए हैं जिससे वह भारतीय मूल के लोगों और विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की नोटों को बदलने में कोई मदद कर सकें.

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