आतंकवाद से असहमत हैं खाड़ी देशों के युवा

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Image caption तेजी से बदल रहा है अरब

अरब देशों को लेकर आपके मन में कैसी छवि है? यदि छवि पुरानी धारणाओं के आधार पर है तो इसे आप दुरुस्त कर लीजिए. 2016 की अरब मानव विकास रिपोर्ट जारी कर दी गई है. इस रिपोर्ट को अमरीकी यूनिवर्सिटी ऑफ बेरूत में यूनाइटेड नेशन डिवेलपमेंट प्रोग्राम की तरफ से जारी किया गया. इस रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे लोगों को हैरानी हो सकती है.

इन मोर्चों पर अरब देश बदले

  • अरब के सभी इलाकों में शिक्षा का ज़बर्दस्त प्रसार हुआ है. यहां साक्षरता दर बढ़ी है. ख़ासकर महिलाओं में भी शिक्षा का प्रसार बढ़ा है. ग़रीबी और भूख के स्तर में गिरावट आई है.
  • हालांकि दूसरी तरफ अरब के पूरे इलाके में नाटकीय रूप से हथियारबंद संघर्ष, सैन्यीकरण और हिंसा का प्रसार हुआ. अरब का आधा हिस्सा हिंसक संघर्ष में फंसा हुआ है. आने वाले दिनों में इसमें कोई सुधार की गुंजाइश नहीं दिख रही है.
  • अरब के बारे में एक धारणा दशकों से बनी थी कि यहां के युवाओं को धार्मिक कट्टरता आकर्षित करती है पर एएचडीआर 2016 की रिपोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां के युवाओं ने सर्वेक्षण में आतंकवाद से खुली असहमति जताई है.
  • एक धारणा यह थी कि अरब के देशों से पलायन ज़्यादा है और यह दुनिया की आर्थिक प्रगति के लिहाज से ठीक नहीं है. एचडीआर 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक़ अब अरब के देशों में प्रवासियों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है.
  • एक अनुमान के मुताबिक़ अरब देशों में 27 मिलियन प्रवासी हैं. 2010 से 2014 के बीच इन देशों ने दुनिया के 80 फीसदी प्रवासियों को अपने देशों में आने दिया. इस इलाके में जारी ख़ूनी संघर्ष के कारण आसपास के देशों के भीतर भारी संख्या में पलायन हुआ है.
  • एक धारणा यह भी है कि 2011 में जब अरब में राजनीतिक आंदोलन शुरू हुआ तो उसमें युवा उदासीन रहे. जबकि इस रिपोर्ट से यह तथ्य सामने आया है कि दुनिया भर की राजनीतिक व्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा असंतोष यहां है. ऐसे में यहां के युवा हर तरह की मुहिमों में शामिल हैं.
  • अरब में बिजली की पहुंच व्यापक पैमाने पर है. इन इलाकों में 70 फ़ीसदी से ज़्यादा युवा सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं.
  • सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य में सरकारी निवेश बढ़ा है.

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