पाक मीडिया- 'बच्चों का ख़ून हम पर क़र्ज़, बदला लेकर रहेंगे'

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Image caption पेशवार हमले में मारे गए एक बच्चे के शोकाकुल परिवार वाले. (फाइल फोटो)

पाकिस्तान के उर्दू मीडिया में इस हफ़्ते पाकिस्तान में पेशावर स्कूल पर हुए हमले की दूसरी बरसी, आर्ईएसआई के नए प्रमुख और भारत-पाक नियंत्रण रेखा यानी एलओसी पर फ़ायरिंग जैसे मुद्दे छाए रहे.

उधर भारत से छपने वाले उर्दू अख़बारों में नोटबंदी को लेकर संसद में हंगामे से जुड़ी ख़बरों ने सुर्ख़ियां बटोरी हैं.

पहले बात पाकिस्तान की. 16 दिसंबर 2014 को पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए चरमपंथी हमले में 140 से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर स्कूली बच्चे और उनके टीचर थे.

इसकी दूसरी बरसी पर पूरे पाकिस्तान में कार्यक्रम आयोजित किए गए और मारे गए बच्चों को याद किया गया.

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने राष्ट्र के नाम एक संदेश दिया जबकि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने पेशावर में आयोजित एक ख़ास कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

पाकिस्तान के सारे अख़बारों ने इसे पहली ख़बर बनाया. नवाज़ शरीफ़ के हवाले से अख़बार 'जंग' लिखता है कि 'नन्हे बच्चों को शहीद करने वाले दहशतगर्दों पर रहम नहीं किया जाएगा.'

नवाज़ शरीफ़ ने आगे कहा कि दुनिया ने देख लिया है कि पाकिस्तान ने दहशतगर्दों के नेटवर्क को ख़त्म कर दिया है.

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पेशावर में सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने कहा कि जब तक पाकिस्तान को पूरी तरह शांति की जगह नहीं बनाएंगे, वो चैन से नहीं बैठेंगे.

रोज़नामा 'ख़बरें' लिखता है, ''बच्चों का ख़ून हम पर क़र्ज़, बदला लेकर रहेंगे''.

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इसी दौरान भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर दोनों ओर से हर कुछ दिन में फ़ायरिंग होती रही है. कई अख़बारों ने इन दोनों ख़बरों को जोड़कर सुर्ख़ी लगाई है.

रोज़नामा 'दुनिया' ने भारत पर आरोप लगाते हुए लिखा है, ''पेशावर हादसे की बरसी पर भारत की भड़काऊ कार्रवाई.''

अख़बार लिखता है कि पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले की दूसरी बरसी के दिन भारत ने फिर पाकिस्तानी बच्चों पर वार किया है.

अख़बार का आरोप है कि भारत ने एलओसी पर एक बार फिर सीज़फ़ायर का उल्लंघन करते हुए नुकयाल सेक्टर में बच्चों की स्कूल वैन पर फ़ायरिंग की जिसके नतीजे में वैन ड्राइवर की मौत हो गई और आठ बच्चे घायल हो गए.

रोज़नामा 'ख़बरें' ने लिखा है कि भारत इंसानियत भूल गया है और अब वो स्कूली बच्चों की वैन पर फ़ायरिंग कर रहा है.

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पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को नया प्रमुख मिल गया है. कराची के कोर कमांडर रह चुके लेफ़्टिनेंट जनरल नवीद मुख़्तार को आईएसआई की कमान सौंपी गई है. यह ख़बर पाकिस्तान के सारे अख़बारों में सुर्ख़ी बनी.

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अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' लिखता है कि ऑपरेशन 'ज़र्ब-ए-अज़्ब' की इंटेलिजेंस ज़रुरतों को पूरा करना, चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर की हिफ़ाज़त करना और पाकिस्तान के अंदर भारत की तरफ़ से दहशतगर्दी फैलाने की कोशिशों को रोकना जनरल मुख़्तार की सबसे बड़ी चुनौती होगी.

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भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का एक बयान भी पाकिस्तानी अख़बारों मे छाया रहा जिसमें गृहमंत्री ने कहा था कि अगर पाकिस्तान बाज़ न आया तो हो सकता है उसके 10 टुकड़े हो जाएं.

रोज़नामा 'ख़बरें' ने सुर्ख़ी लगाई है, ''भारत की गीदड़भभकी, राजनाथ सिंह होश खो बैठे हैं.''

अख़बार लिखता है कि शांति की दुश्मन मोदी सरकार पाकिस्तान के नरम रवैये को उसकी कमज़ोरी समझने लगी है और भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को खुली धमकी देते हुए कहा है कि पाकिस्तान के दो टुकड़े हो चुके हैं और अगर वो अपनी हरकतों से बाज़ न आया तो इसके 10 टुकड़े हो जाएंगे.

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इसके जवाब में पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने भारत पर तीखा हमला किया.

ख़्वाजा आसिफ़ के बयान पर अख़बार लिखता है, ''राजनाथ बौखलाहट में होश खो बैठे हैं. राजनाथ को पता नहीं कि आज पाकिस्तान कहां खड़ा है. मोदी सरकार अगर इसी तरह अड़ी रही तो भारत को अपने टुकड़े गिनना मुश्किल हो जाएगा.''

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भारत से छपने वाले अख़बारों की बात करें तो नोटबंदी को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र में हुए हंगामे ही सबसे ज़्यादा छाए रहे.

सत्र शुक्रवार को ख़त्म हो गया और इस दौरान शायद ही कोई ख़ास काम हो सका.

रोज़नामा 'इंक़लाब' लिखता है, ''शीतकालीन सत्र मोदी सरकार की हठधर्मी की नज़र''.

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अख़बार लिखता है कि नोटबंदी पर सरकार की हठधर्मी की वजह से पूरा सत्र हंगामों और विरोध प्रदर्शन की नज़र हो गया.

रोज़नामा सहारा ने लिखा है कि 50-50 स्कीम के तहत सरकार ने काले धन को सफ़ेद करने का एक और मौक़ा दिया है जो कि 31 मार्च 2017 तक जारी रहेगा.

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'हिंदुस्तान एक्सप्रेस' ने बीजेपी के एक प्रवक्ता को सुप्रीम कोर्ट से मिली फ़टकार को पहले पन्ने पर जगह दी है.

बीजेपी प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने भारत में शराब नीति बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी.

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उसकी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उनको खरी-खरी सुनाते हुए कहा, ''बीजेपी ने क्या आपको पीआईएल दायर करने का काम दिया है. आप क्या अदालत में बीजेपी के लिए मुहिम चला रहे हैं?''

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वहीं 'जदीद ख़बर' ने सीरियाई शहर अलेप्पो में विद्रोहियों की हार और बशर अल-असद के वफ़ादार सैनिकों की जीत पर संपादकीय लिखा है.

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अख़बार लिखता है, ''सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के सिर पर ख़ून सवार है. वो इंसानों की जान की क़ीमत पर अपनी सत्ता बरक़रार रखे हुए हैं.''

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