एलेप्पोः लोगों को लाने जा रही बसों को विद्रोहियों ने फूँका

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Image caption एलेप्पो की बाहरी सीमा पर बसें अंदर घुसने के लिए इंतज़ार में

सीरिया में जारी संघर्ष के बीच इदलिब प्रांत से बीमार और घायलों को निकालने रवाना हुई कई बसों को रास्ते में ही विद्रोहियों ने जला दिया.

बसों का काफिला विद्रोहियों से घिरे फोआह और केफ्राया की तरफ बढ़ रहा था. सरकार समर्थक बलों की मांग है कि शिया गांवों से लोगों को निकालने की अनुमति दी जाए. यह पूर्वी एल्लेपो से लोगों को निकालने की योजना में ही शामिल है. हालांकि सरकारी मीडिया का कहना है कि इन जोरदार झटकों के बावजूद एल्लेपो से लोगों को निकालने का काम जारी है.

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इस बीच, पूर्वी एल्लेपो में स्थिति भयावह हो गई है. कड़ाके की ठंड में हज़ारों लोग सड़क पर रात गुज़ारने के लिए बेबस हैं. बच्चे भूख से बिलख रहे हैं. यूनिसेफ़ का कहना है कि स्थिति नहीं सुधरी तो ये लोग दम तोड़ देंगे.

सीरिया के सरकारी मीडिया का कहना है कि पूर्वी एलेप्पो में नागरिकों को निकालने के लिए बसें पहुंच गई हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जल्दी ही यहां ऑपरेशन शुरू हो सकता है. विद्रोहियों के कब्जे वाले दो गांवों से एक साथ करीब 1200 लोगों को निकालने का समझौता हुआ है.

पूर्वी एलेप्पो में हज़ारों लोग ख़तरनाक स्थितियों में रात गुज़ार रहे हैं. ये सभी यहां से निकलने की अनुमति मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पूर्वी एलेप्पो में अपनी और टीम भेजने की तैयारी कर रहा है.

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यूएन ने अपने एक प्रस्ताव में कहा है कि उसके स्टाफ पहले से ही सीरिया में मौजूद हैं. इन्हें वहां जारी राहत बचाव कार्य की पर्याप्त निगरानी के लिए कहा गया है.

यूएन स्टाफ लोगों को निकालने और एलेप्पो में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी रिपोर्ट देंगे. यूएन के इस प्रस्ताव में सभी डॉक्टरों, हॉस्पिटलों और एम्बुलेंसों की सुरक्षा की मांग की गई है.

रिपोर्ट आई थी कि सीरियाई सुरक्षा बलों ने एलेप्पो में सभी मेडिकल सुविधाओं पर बमबारी की थी. ख़ासकर सीमा से लगते हॉ़स्पिटलों की सुरक्षा की मांग की गई है.

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एलेप्पो पर गतिरोध

सीरिया में लोगों को निकालने को लेकर अलग-अलग धड़ों में असहमति है. इसी वजह से लोग बुरी तरह से फंसे हुए हैं. रिपोर्टरों का कहना है कि लोग कड़ाके की ठंड में सड़कों पर सोने के लिए मजबूर हैं. इनके पास खाने-पीने के सामान नहीं हैं या हैं भी तो काफ़ी कम हैं.

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Image caption हज़ारों लोग डर के साए में जी रहे हैं

लोगों को निकालने में इसलिए देरी हो रही है क्योंकि यहां कोई एक सरकार नहीं है. हालांकि अब सीरियाई स्टेट मीडिया का कहना है कि लोगों को निकालने के लिए बसें रवाना हुई हैं.

पूर्वी एल्लेपो में लोगों को निकालने की प्रारंभिक योजना शुक्रवार को नाकाम हो गई थी. यहां जगह-जगह पर लोग बिना भोजन के आसमान के नीचे रहने पर बेबस हैं. यूके के निगरानी ग्रुप ने रविवार को कहा कि विद्रोही ग्रुप जबात फ़तह अल-शाम जिसे नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता है, वह बसों को यहां आने से रोक रहा है.

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Image caption पूर्वी एल्लेपो में भूख से बिलख रहे हैं बच्चे

ख़बरों के मुताबिक़ एलेप्पो में फंसे हुए लोगों को निकालने को लेकर नया समझौता रविवार को हुआ. इसमें और देरी होती है तो फंसे हुए लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी. अब्दुलकाफ़ी अल-हमदो यहां टीचर हैं. वह अपनी बेटी के साथ फंसे हुए हैं. उन्होंने शनिवार को बीबीसी से कहा कि वह यहां से अपना घर छोड़कर जाना नहीं चाहते हैं लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

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Image caption विद्रोहियों ने बसों में लगाई आग

उन्होंने कहा कि अभी यहां से निकलने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. अब्दुलकाफ़ी ने कहा, ''यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है. बच्चे भूख से कराह रहे हैं. ये पूरी तरह से ठंड में जम गए हैं. सारे लोग यहां डर के साए में सांस ले रहे हैं.''

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Image caption सक्रिय हुआ संयुक्त राष्ट्र संघ

पूर्वी लेप्पो आख़िर कौन फंसे हैं?

यहां आम नागरिक और हारे हुए विद्रोही फंसे हैं. ये सभी अपने ही घर में शरणार्थी की तरह रह रहे हैं. यूनिसेफ़ का कहना है कि बच्चों की हालत बहुत ही बदतर है. कुछ बच्चे तो अपने माता-पिता के बिना ही जाने पर मजबूर हैं. यहां सैकड़ों बच्चे बुरी तरह से फंसे हुए हैं.

यूनिसेफ़ का कहना है कि वह बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है. यूनिसेफ़ ने कहा कि यदि यहां से इन्हें जल्दी नहीं निकाला गया तो ये दम तोड़ सकते हैं.

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