'माहवारी में घर के बाहर, झोंपड़ी में रखी गई लड़की की मौत'

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Image caption माहवारी के दौरान कई परिवार लड़कियों को घर से बाहर छोटी झोपड़ियों में भेज देते हैं

नेपाल पुलिस एक 15 साल की लड़की की मौत की जांच कर रही है जिसे माहवारी के दौरान घर से बाहर एक झोंपड़ी में रखा गया था.

उनका कहना है कि लड़की ने ठंड की वजह से आग जलाई थी जिससे उसका दम घुट गया.

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पत्थर और मिट्टी से बनी इस छोटी सी कुटिया में खिड़की नहीं थी.

यहां प्रचलित एक हिंदू प्रथा छौपदी में माहवारी के दौरान महिलाओं को अपवित्र माना जाता है. बच्चे को जन्म देने वाली जच्चा को भी अपवित्र माना जाता है.

2005 में नेपाल सरकार ने इस पर रोक लगाई थी लेकिन अब भी पश्चिमी नेपाल के कई इलाकों में ये प्रथा जारी है.

पिछले सप्ताहांत में रौशनी तिरुवा का शव उसके पिता को उस कुटिया में मिला था, जहां पर वो माहवारी के दिनों में रह रही थी.

ये घटना नेपाल की राजधानी काठमांडू से 440 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित अच्छम ज़िले के गजरा गांव की है.

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नेपाल के कई समुदायों में मान्यता है कि अगर माहवारी में महिला को अलग नहीं रखा गया तो लोगों को प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ सकता है.

माहवारी के दौरान लड़कियों और महिलाओं को रोज़मर्रा की ज़रूरत का खाना नहीं दिया जाता, यहां तक कि दूध पीने की भी मनाही होती है.

कई बार तो महिलाओं को जानवरों के बाड़े में भी रखा जाता है जहां पशुओं के गोबर के बीच इन लड़कियों और महिलाओं को दिन काटने पड़ते हैं.

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