पू्र्व अफ़ग़ान राष्ट्रपति रब्बानी की मॉडल बेटी

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अफ़ग़ानिस्तान के जिहादी परिवारों की दो महिलाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा गर्म है.

इन्होंने अमरीकी स्टाइल मैगज़ीन हार्पर्स बाज़ार के लिए मॉडलिंग की थी. इसके बाद से सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है.

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फ़ातिमा रब्बानी दिवंगत अफ़ग़ान राष्ट्रपति और एक जिहादी नेता बुरहानुद्दीन रब्बानी की बेटी हैं. तालिबान ने 2011 में इनकी हत्या कर दी थी. वे इस्लामिक विद्वान थे और उन्होंने जमीयत-ए-इस्लामी पार्टी की अगुआई की थी.

यह ताजिक-प्रभुत्व वाला एक मज़बूत संगठन था. जमियत ने 1980 के दशक में रूसी आक्रमण और 1990 के दशक में तालिबान से संघर्ष किया था.

हार्पर्स बाज़ार के दिसंबर के अंक में फ़ातिमा और तीन दूसरी अफ़ग़ान महिलाओं की तस्वीर छपी है जिसमें इन्होंने पारंपरिक अफ़ग़ान ड्रेस पहनी है लेकिन स्कार्फ़ नहीं लगाई है.

34 साल की फ़ातिमा ने ब्रिटेन में पढ़ाई की है. वे अपने पति के साथ अब दुबई में रहती हैं.

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Image caption फ़ातिमा रब्बानी

तीन दूसरी अफ़ग़ानी महिला मॉडलों में से एक सोराया नाज़ीमी भी एक प्रमुख जिहादी परिवार से ताल्लुक रखती हैं.

वह सैयद अहमद गिलानी की पोती हैं. गिलानी भी पूर्व जिहादी नेता हैं. फिलहाल वे एक शांति परिषद के अध्यक्ष हैं जिसकी जिम्मेदारी विद्रोहियों से शांति क़ायम कराने की है.

अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक हिजाब और स्कार्फ पहनना अनिवार्य नहीं है.

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हालांकि एक बड़ी इस्लामिक पार्टी के नेता की बेटी होने के कारण उनके "बिना स्कार्फ़ पहने मॉडलिंग" करने की कोशिश ने लोगों का काफी ध्यान आकर्षित किया है.

इस मामले में फ़ातिमा ने अमरीकी मदद से चलनेवाले रेडियो आज़ादी से कहा, ''मैं हैरान हूं कि लोग इस कार्यक्रम में सकारात्मक चीज़ों की अनदेखी कर हिजाब को लेकर विवाद पैदा कर रहे हैं.''

इन महिलाओं के वर्जनाओं को तोड़ने का आभास मात्र भी हाल ही हुए एक प्रमुख राजनीतिक विवाद के बीच आया है जिसने अफ़ग़ानिस्तान में परंपरा और आधुनिकता के बीच जारी संघर्ष के मुद्दे को उठाया.

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Image caption फ़ातिमा रब्बानी

इस विवाद को हवा एक अफ़गान सांसद और पूर्व इस्लामिक नेता ने दी. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के मस्जिद और धार्मिक पाठ्यक्रम "आतंकवादी पैदा" कर रहे हैं.

'जिहादी मॉडल'

पश्तो भाषा के सोशल मीडिया यूज़र्स ने सबसे ज़्यादा नकारत्मक टिप्पणियां की हैं. लेकिन बड़ी संख्या में अन्य लोग चुप थे या समर्थन में रहे.

पश्तो में एक फेसबुक यूजर ने मज़ाक करते हुए लिखा, ''फ़ातिमा रब्बानी महान जिहादी नेता की बेटी हैं और उन्होंने मॉडलिंग के क्षेत्र में अफ़ग़ानिस्तान का सिर ऊंचा किया है."

हालांकि कई यूज़र्स ने इसे निजी रुचि का मामला करार दिया. लोगों ने कहा कि इसे उनके पिता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

फ़ेसुबक पर एक महिला यूज़र बहार सोहैली ने लिखा, "भूतपूर्व नेताओं के बच्चों की मान्यताओं और लाइफस्टाइल को लेकर आलोचना नहीं होनी चाहिए, ये नेता भले ही जिहादी, कम्युनिस्ट या अतिवादी रहे हों. कोई भी बच्चा अपने माता-पिता के नक्शेक़दम पर चलने के लिए मजबूर नहीं है."

अन्य लोगों ने भी इसी तरह के विचार ज़ाहिर किए.

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Image caption बुरहानुद्दीन रब्बानी

फ़ेसबुक यूज़र जफ़र अतायी ने लिखा है, ''रब्बानी ने जो कुछ भी किया उसका आकलन इतिहास करेगा, लेकिन उनके बच्चे अपनी अच्छाई के लिए जाने जाते हैं. वे उन नेताओं के बच्चों की तुलना में कहीं बेहतर हैं जो अब भी अपने पिताओं की अज्ञानता का उग्रता से बचाव करते हैं."

रब्बानी का परिवार मददगार रहा है. फ़ातिमा के भाई शुजा रब्बानी भी दुबई के इस कार्यक्रम में शामिल रहे थे. उन्होंने इस घटना के बारे में फ़ातिमा के सभी ट्विटर पोस्ट को रिट्वीट किया है.

एक ट्वीट संदेश में लिखा था, "मेरे और परिवार के ऊपर हमला करने से यही पता चलता है कि लोग अपनी सुविधा के मुताबिक़ इस्लाम का इस्तेमाल करते हैं जबकि उनके ख़ुद की मंशा दुर्भावनापूर्ण होती है."

फ़ातिमा की आधुनिकता को स्पष्ट रूप से ख़ुद में उतारने की पहल देश की युवा पीढ़ी की सामाजिक बदलाव के लिए बढ़ती चाहत का हिस्सा है.

पिछले महीने एक प्रमुख ताजिक सांसद अब्दुल हाफ़िज़ मंसूर ने मदरसों और शैक्षणिक संस्थानों में "आतंकवादी पैदा करने" के लिए धार्मिक पाठ्यक्रम को दोषी ठहराकर एक राष्ट्रीय बहस छेड़ दी थी.

हालांकि प्रमुख मस्जिद के कई नेताओं ने उनकी टिप्पणियों को फ़ालतू करार दिया, तो वहीं कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया और उसे दूसरों से साझा किया.

एक से ज़्यादा मीडिया होने और उसके प्रसार के कारण और साथ ही शिक्षा में सुधार की वजह से अफ़गानियों के नज़रिये में बदलाव संभव हो पाया है.

लेकिन ये बदलाव ज़िद्दी पारंपरिक सोच के ख़िलाफ़ पैदा होते हैं. इसमें वो सोच भी शामिल हैं जिसका समर्थन विद्रोही करते हैं और इसने देश के ज़्यादातर हिस्से को अपनी गिरफ़्त में ले रखा है.

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