पाक मीडिया- 'लोकतंत्र का कोई भी विकल्प बहुत ख़तरनाक'

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Image caption पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की पाकिस्तान वापसी और लौटने पर कश्मीर और भारत का ज़िक्र चर्चा में रहा.

पाकिस्तानी मीडिया में जर्मनी में चरमपंथी हमले और नए सेना प्रमुख के सऊदी अरब दौरे ने भी सुर्ख़ियां बटोरी हैं.

उधर भारत के उर्दू अख़बारों मेँ इस हफ़्ते भी नोटबंदी को लेकर सत्तारुढ़ पार्टी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस के आरोप-प्रत्यारोप ही अख़बारों में छाए रहे.

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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी पिछले डेढ़ साल से पाकिस्तान से दूर रहने के बाद शुक्रवार 23 दिसंबर को पाकिस्तान लौटे.

अख़बार 'जंग' के अनुसार कराची हवाईअड्डे के बाहर ज़रदारी ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. उन्होंने दावा किया कि अगले चुनाव में उनकी पार्टी सरकार बनाएगी.

उनका कहना था, ''मैं लौट आया हूं और अवाम के लिए उम्मीद का पैग़ाम लेकर आया हूं.''

'जंग' के अनुसार ज़रदारी ने इस मौक़े पर भारत प्रशासित कश्मीर का भी ज़िक्र किया.

ज़रदारी ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा- ''बहादुर कश्मीरी नौजवान भारतीय फ़ौज और हिंदू साम्राज्य के सामने जिस हिम्मत से लड़ रहे हैं उनके हौसलों को पस्त नहीं किया जा सकता.''

'रोज़नामा ख़बरें' ने आसिफ़ अली ज़रदारी के भाषण को पहली ख़बर बनाते हुए सुर्ख़ी लगाई- ''लोकतंत्र का कोई भी विकल्प बहुत ख़तरनाक है.''

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भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर उभरे मतभेद का भी कई अख़बारों में ज़िक्र है.

अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' ने सुर्ख़ी लगाई- ''पाकिस्तानी आपत्ति के बावजूद मोदी सरकार सिंधु और उसकी सहायक नदियों का पानी ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने के लिए सक्रिय.''

'रोज़नामा दुनिया' लिखता है कि सिंधु जल समझौते पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों का एक टास्क फ़ोर्स बना दिया है.

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Image caption पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का बॉस्निया दौरा भी सुर्ख़ियों में रहा. बॉस्निया के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान में इस्लामिक स्टेट (आईएस) का कोई वजूद नहीं है.

अख़बार 'जंग' लिखता है कि नवाज़ शरीफ़ ने इस दौरान कहा कि पाकिस्तान में अल-क़ायदा और तालिबान का ख़ात्मा हो चुका है और भारत के साथ किसी भी मतभेद को वो शांतिपूर्वक हल करना चाहते हैं.

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में क्रिसमस से ठीक पहले एक बाज़ार में एक व्यक्ति ने ट्रक से 12 आदमी को कुचल दिया. जर्मन पुलिस ने पहले इस मामले में एक पाकिस्तानी व्यक्ति को गिरफ़्तार किया.

अख़बार 'जंग' ने लिखा कि 30 साल के नवेद बलोच को जर्मन पुलिस ने शक की बुनियाद पर हिरासत में लिया, पर बाद में उन्हें आभास हो गया कि उन्होंने ग़लत व्यक्ति को पकड़ लिया है.

'जंग' के अनुसार पुलिस ने माफ़ी मांगते हुए उस व्यक्ति को रिहा कर दिया.

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Image caption पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा

पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा का सऊदी अरब दौरा भी सु्र्ख़ियों में रहा.

जनरल बाजवा ने सऊदी अरब के राजा शाह सलमान, वहां के रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख से मुलाक़ात की.

'रोज़नामा दुनिया' के अनुसार दोनों देशों ने इस बात को दोहराया कि चरमपंथ को ख़त्म करने के लिए प्रभावी क़दम उठाने की ज़रूरत है.

यमन कारगो जहाज़ पर नामालूम लोगों के हमले में सात पाकिस्तानी नागरिकों के मारे जाने की ख़बर भी सारे अख़बारों में छाई रही.

भारत से छपने वाले उर्दू अख़बार

भारत से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो यहां तो ज़्यादातर ख़बरें नोटबंदी से जुड़ी रहीं.

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'रोज़नामा इंक़लाब' ने नोटबंदी के मुद्दे पर फ़ोर्ब्स मैगज़ीन में छपे एक संपादकीय को पहली ख़बर बनाया.

अख़बार ने सुर्ख़ी लगाई- ''नोटबंदी का फ़ैसला अनैतिक और जनता के पैसे की लूट है.''

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फ़ोर्ब्स मैगज़ीन के संपादक स्टीव फ़ोर्ब्स के संपादकीय का हवाला देते हुए लिखा गया कि नोटबंदी का फ़ैसला बड़े पैमाने पर जनता की संपत्ति की लूट है.

उन्होंने आगे लिखा है कि प्रजातांत्रिक तरीक़े से चुनी गई किसी सरकार का ये फ़ैसला हैरान करने वाला है.

इस संपादकीय के मुताबिक- ''अपनी ही जनता को तकलीफ़ पहुंचाने, ग़रीबों को और बदहाल करने के बजाए सरकार सिस्टम को बेहतर करने, रुपये को मज़बूत करने और बड़ी योजनाओं पर काम करती तो ज़्यादा बेहतर होता."

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'जदीद ख़बर' ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान को सुर्ख़ी बनाते हुए लिखा है, ''चायवाला मोदी अब पेटीएम वाला हो गया.''

अख़बार के अनुसार ममता ने एक रैली को संबोंधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार अंधी, गूंगी और बहरी हो चुकी है जिसे जनता की परेशानियों की कोई फ़िक्र नहीं है.

ममता का हवाला देते हुए अख़बार ने छापा कि चंद निजी कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए ही मोदी ने नोटबंदी का फ़ैसला किया है.

वहीं सहाफ़त अख़बार ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के एक बयान को सुर्ख़ी बनाते हुए लिखा है, ''नोटबंदी ग़रीबों पर बमबारी करने जैसा है.''

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