रूस 25 सालों में कहां से कहां तक पहुँचा?

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Image caption रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

अगस्त 1991 में मैं मॉस्को मशीन टूल कंस्ट्रक्शन इंस्टिट्यूट में इंग्लिश पढ़ाने गया था. तब मेरे वीज़ा पर सोवियत संघ लिखा हुआ था. चार महीने के बाद ही सोवियत संघ अस्तित्व में नहीं रहा.

सोवियत संघ का बिखरना वहां के नागरिकों के लिए बड़ा झटका था. 1991 में मैंने मॉस्को में कई लोगों से मुलाकात की थी. सोवियत संघ के टूटने में उनके लिए अच्छे जीवन की उम्मीद भी थी.

इंग्लिश टीचर इरीना ने याद करते हुए कहा, ''हम लोग खुश थे कि कुछ बहुत महत्वपूर्ण हुआ है. यह आज़ादी की हवा थी.''

उनके मुताबिक एक समझ यह थी कि एक महान राष्ट्र का ऐसे टूटना त्रासदी है.

वो कहती हैं- ''मैं त्रासदी शब्द के इस्तेमाल से डरती नहीं - यह बहुत बाद में आया. मैंने नए लोगों को देखा, नए रूसियों को देखा. वे मुझे बिल्कुल पंसद नहीं आए. मैं ऐसा कहूँ कि मैंने पूंजावाद के सबसे बदतर रूप को यहां देखा?

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Image caption 1998 में रूस की वित्तीय स्थिति काफी कमजोर थी

1991 में मेरी मुलाक़ात ओलेग से हुई. तब वह 20 साल का था. वह और उसके दोस्त नए रूस में मौकों को भुनाना चाहते थे. आज की तारीख में ओलेग कनाडा में रहते हैं.

टोरंटो से उन्होंने मुझे फ़ोन पर कहा, ''हम लोगों ने पोलैंड से इस्तेमाल की हुई कारें लाकर मॉस्को में बेचना शुरू किया था. इसके साथ ही हमने चिकन लेग्स की पेटियों को अमरीका से ख़रीदना शुरू किया था. हमने कई कुछ आजमाया था.''

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1990 की शुरुआत के दशक में रूस में पूंजीवाद पनपा, उसे पचा पाना सब के बस का नहीं था.

ओलेग याद करते हुए कहते हैं, ''वो बहुत ख़तरनाक दौर था. हमने बहुत पैसे बनाए लेकिन समस्याएं भी कम नहीं थीं. तब हम ऐसे लोग कर्ज़ लेते थे जो किसी डाकू से कम नहीं थे. वो कहते थे- दो हफ्तों के भीतर पैसे नहीं दोगे तो हम तुम्हें मार देंगे. तुम ज़्यादा दिनों तक यहां ज़िंदा नहीं रह सकते."

1990 के दशक में उत्तरी कोकेशस में दो युद्ध हुए. रूसी संसद के सामने टैंक थे. वित्तीय स्थिति चरमरा गई थी और ज़्यादातर रूसी नागरिकों की बचत का बेड़ा गर्क हो गया था.

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Image caption अब भी लोग इस बात को स्वीकार नहीं करते कि सोवियत संघ नहीं रहा

इरीना सोवियत संघ की कमी महसूस करती हैं. उन्होंने कहा, ''1990 के दशक की शुरुआत में हम लोग सोवियत संघ से असंतुष्ट थे. तब सब कुछ बुरा हो रहा था. सोवियत संघ में हम मजबूर थे. हालांकि बाद में हम लोगों को अहसास हुआ कि वह बुरा नहीं था.''

लेकिन सोवियत संघ में तो लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं थी?

इरीना ने कहा, ''आपका मतलब किस तरह के लोकतंत्र से है? यह आपके नज़रिए पर निर्भर करता है. 'आइरन कर्टन' के पीछे क्या हो रहा है, शायद आपको इसके बारे में बहुत जानकारी नहीं मिलती थी. लेकिन क्या सच में हमें इसकी ज़रूरत थी? आज हमें इसकी ज़रूरत है?''

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Image caption गोर्बाचोफ

2000 में जब बोरिस येल्तसिन की जगह व्लादिमीर पुतिन आए तो रूस की स्टेट पावर फिर से केंद्रीकृत हई. प्राइवेट बिज़नस समस्याग्रस्त हुए. ओलेग विदेश चले गए.

उन्होंने कहा, ''स्कूल के साथियों से मुझे पता चला- मेरे जानकार जिन 10 या 15 लोगों का बिज़नेस था, वो आगे चलकर नहीं रहा. वे सरकार में हैं या सरकार के समर्थन वाले वाले निगमों में काम करते हैं. अब रूस में कुछ भी बिज़नेस करना और कठिन हो गया है.''

इरीना इस बात में यक़ीन रखती हैं कि रूस को एक मजबूत नेता की ज़रूरत है. उन्होंने मुझसे कहा, ''मैं स्वभाव से बिल्कुल राजतंत्रवादी हूं और यदि रूस में राजतंत्र की वापसी होती है तो मैं दोनों हाथों से मतदान करूंगी.''

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Image caption स्टालिन

मैंने पूछा कि क्या आप एक ज़ार को पसंद करेंगी? इरीना ने कहा, ''हां, मैं ज़ार को पसंद करूंगी. मैं इस बात को समझती हूं कि हमारा देश बहुत बड़ा है और कई समस्याएं भी हैं. मैं बस एक मजबूत, ताकतवर नेतृत्व चाहती हूं.''

मैंने पूछा कि क्या व्लादिमीर पुतिन रूस में एक ज़ार की कमी को पूरा कर रहे हैं?

उन्होंने जवाब दिया, ''मेरी समझ से हां. हमारे राष्ट्रपति साधारण रूप से काम नहीं कर रहे हैं बल्कि वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं. इस वजह से उनके लिए मेरे मन में आदर है.''

मैंने इरीना से पूछा कि पश्चिम के देश राष्ट्रपति पुतिन की आक्रामकता पर उंगली उठाते हैं. वे क्रीमिया के विलय का हवाला देते हैं. वे पूर्वी यूक्रेन और सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर पुतिन को घेरते हैं.

इरीना का कहना था- "लोग उन्हें क्यों पसंद करेंगे, वह कोई ख़ूबसूरत महिला नहीं हैं! पुतिन ताकतवर नेता हैं."

ओलेग की तरह बहुत लोग कनाडा गए लेकिन वह अब भी सोवियत परवरिश की खुलकर तारीफ करते हैं.

उन्होंने कहा, ''सोवियत संघ में तमाम तरह की नकारात्मकता थी लेकिन उसे लेकर मैं अब भी सकारात्मक रुख रखता हूं. यह मेरी शिक्षा और सोवियत मानसिक संरचना की देन है.''

रूस पोलैंड की इस्तेमाल की हुई कार और अमरीकी मुर्गे की टांग से बहुत आगे निकल चुका है.

वह 90 के दशक में किसी तरह ज़िंदा था लेकिन आज वह ताल ठोक रहा है. और कल? बीते 25 नाटकीय सालों में मैंने महसूस किया है कि आप रूस में अनिश्चितता को लेकर ही निश्चित रह सकते हैं.

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