'पाकिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप के सुबूत अमरीका को'

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भारत और पाकिस्तान ने छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो पाकिस्तानी अख़बारों में पनामा पेपर्स, नए सेनाप्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की बरसी से जुड़ी ख़बरें छाई रहीं.

भारतीय अख़बारों में नोटबंदी से जुड़ी ख़बरों के अलावा उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी की आपसी कलह अख़बारों की सुर्ख़ी बनीं.

पहले बात पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों की.

पाकिस्तान ने भारत पर उसके अंदरूनी मामलों में दख़ल देने और चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप एक बार फिर लगाए हैं.

रोज़नामा ख़बरें ने सुर्ख़ी लगाई है, ''पाकिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप के सुबूत अमरीका को भिजवा दिए हैं.''

अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में कथित भारतीय हस्तक्षेप पर एक डॉज़ियर तैयार किया है जिसे अमरीका को भेज दिया गया है. अख़बार के अनुसार इससे जुड़े तमाम दस्तावेज़ संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव को दिए जाएंगे.

अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी जेल में बंद कथित भारतीय जासूस कुलभूषण यादव पर भी एक डॉज़ियर तैयार किया गया है.

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पाकिस्तान सेना के नए प्रमुख जनरल जावेद क़मर बाजवा के बलूचिस्तान दौरे पर भी कई अख़बारों ने जमकर लिखा है.

रोज़नामा नवा-ए-वक़्त ने सेना प्रमुख के बयान के हवाले से सुर्ख़ी लगाई है, ''दुश्मन बलूचिस्तान की तरक़्क़ी में रुकावट डाल रहे हैं.''

अख़बार के अनुसार सेना प्रमुख ने कहा कि बलूचिस्तान के नौजवान देश की सुरक्षा में किसी से पीछे नहीं हैं. उन्होंने भारत का नाम लिए बग़ैर कहा कि पड़ोसी देश साज़िश रच रहा है इसलिए साज़िश के शिकार नासमझ नौजवानों के लिए दरवाज़े हमेशा खुले हुए हैं.

भ्रष्टाचार से जुड़े पनामा पेपर्स लीक्स मामले अभी भी पाकिस्तानी अख़बारों में सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं.

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रोज़नामा दुनिया के अनुसार तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के मुखिया इमरान ख़ान ने कहा है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की सरपरस्पती में विपक्षी पार्टियां पनामा लीक्स मामले में एक साथ आ सकती हैं.

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की नौंवी बरसी पर पीपीपी ने एक जलसा आयोजित किया था जिसे आसिफ़ अली ज़रदारी ने संबोधित किया था.

कई अख़बारों ने इसे पहले पन्ने पर जगह दी है.

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Image caption पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी

रोज़नामा दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई है, ''कुर्सी नहीं ख़ींचना चाहते, संसद में जाकर सबक़ सिखाएंगे.''

अख़बार के अनुसार ज़रदारी ने कहा कि मौजूदा प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ चुनाव जीते नहीं थे बल्कि उनकी पार्टी ने अमानत के तौर पर शरीफ़ को सत्ता सौंपी थी लेकिन नवाज़ शरीफ़ ने सारे वादे भुला दिए हैं.

ज़रदारी ने इसी जलसे में इस बात की घोषणा कर दी कि वो और उनके बेटे बिलावल भुट्टो संसदीय चुनाव लड़ेंगे और संसद में पहुंचकर नवाज़ शरीफ़ का मुक़ाबला करेंगे.

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इसराइल में यहूदी बस्तियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में आए प्रस्ताव का अमरीका ने विरोध नहीं किया और न ही वीटो का इस्तेमाल किया जिसके कारण इसराइल के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित हो गया.

ये ख़बर पाकिस्तान के सारे उर्दू अख़बारों में पहली सुर्ख़ी बनी.

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रोज़नामा जंग लिखता है कि यहूदी बस्तियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित होने के कारण इसराइल ने ओबामा प्रशासन को आड़े हाथों लिया. साल 1979 के बाद ये पहला मौक़ा था जब अमरीका ने इसराइल के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र में आए प्रस्ताव पर वीटो नहीं किया.

भारत से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात करें तो नोटबंदी का मामला तो छाया रहा ही लेकिन उत्तर प्रदेश में यादव परिवार का अंतर्कलह भी अख़बारों की सुर्ख़ी बटोरने में सफल रहा.

नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान को अख़बार जदीद ख़बर ने सुर्ख़ी लगाई है- ''हम चुहिया ही पकड़ना चाहते थे: मोदी''

दरअसल पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने नोटबंदी को असफल क़रार देते हुए कहा था कि ''खोदा पहाड़, निकली चुहिया.''

मोदी ने चिदंबरम के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा था कि ये चुहिया ही सबकुछ चट कर जाती थी. मोदी ने कहा था कि ग़रीबों का हक़ मारने वाली चुहिया को ही पकड़ने का काम चल रहा है. मोदी ने कहा कि निराश लोगों के लिए उनके पास कोई दवा नहीं है लेकिन उम्मीद रखने वालों के लिए हज़ारों अवसर हैं.

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उत्तर प्रदेश की सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी में चल रही उठापटक भी सारे अख़बारों में छाई रही.

सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने शुक्रवार को अपने बेटे और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और अपने चचेरे भाई और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया था हालांकि 24 घंटों के भीतर ही मुलायम सिंह ने अपना फ़ैसला वापस लेते हुए अखिलेश और रामगोपाल की बर्ख़ास्तगी समाप्त कर दी.

रोज़नामा सहाफ़त ने सुर्ख़ी लगाई है, ''बेटे और भाई पर मुलायम हुए नेताजी''.

रोज़नामा इंक़लाब की सुर्ख़ी है, ''यूपी की सियासत में भूचाल, अखिलेश पार्टी से बर्ख़ास्त''

जबकि राष्ट्रीय सहारा ने सुर्ख़ी लगाई है, ''समाजवादी पार्टी में दंगल''.

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