यूरोप जाने वाली ट्रेन से चीनी माल की मांग बढ़ेगी?

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Image caption यह कंटेनर ट्रेन 18 दिन में सात देशों को पार करते हुए 12,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी

चीन को ब्रिटेन से जोड़ने वाली रेल लाइन अंतरराष्ट्रीय माल परिवहन के क्षेत्र में मील का पत्थर मानी जा रही है.

यह रेल लाइन चीन से शुरू हो कर कज़ाख़स्तान, रूस, बेलारूस, पोलैंड, बेल्जि़यम और फ्रांस होते हुए ब्रिटेन पंहुचती है.

एशिया से यूरोप तक सीधी मालगाड़ी सेवा को चीन के शहर ईवू में 2017 के पहले दिन हरी झंडी दिखाई गई.

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चीनी समचार एजेंसी शिन्हुआ का कहना है कि यह मालगाड़ी 18 दिनों में 12,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी. इसके ज़रिए चीन अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार पश्चिम यूरोप तक कर रहा है.

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Image caption क्या इस ट्रेन रूट से ईवू में उत्पादन बढ़ेगा

बीबीसी के बीजिंग संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है, "हाल के दिनों में चीन ने यूरोपीय शहरों तक सीधी रेल लाइनें शुरू की हैं. इस कड़ी में लंदन को हाल फ़िलहाल ही जोड़ा है."

वे आगे कहते हैं, "इस सफ़र में कई रेल नेटवर्क जुड़े हुए हैं, लिहाज़ा, एक ही ट्रेन पूरी दूरी तय नहीं करेगी. कंटेनर को रास्ते में कई बार बदलना पड़ेगा."

बीबीसी की चीनी सेवा की वेबसाइट के संपादक विनसेंट नी के मुताबिक़, सबसे दिलचस्प बात है इस सफ़र के दौरान तय किए जाने वाले देशों की तादाद. इसमें रूस और बेलारूस प्रमुख हैं, क्योंकि इस समय उनके साथ चीन के तनावपूर्व राजनीतिक रिश्ते हैं.

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नी का मानना है कि इस रूट की वजह से माल का भौगोलिक-राजनीतिक प्रभाव भी है.

सडवर्थ कहते हैं, "यह रूट आपको हवाई जहाज़ से पंहुचाए जाने वाले, जल्द मिलने वाले महंगे और ट्रेन से अधिक समय में ले जाए जाने वाले सस्ते सामान के बीच चुनने का मौका देता है."

यह रूट उस ट्रेन रूट का हिस्सा है, जिसके तहत चीनी शहर ईवू को स्पेन के मैड्रिड से जोड़ा गया.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में 'एक बेल्ट एक रूट' परियोजना की शुरुआत की थी. इसमें एशिया, अफ्रीका और यूरोप के देशों को सड़क मार्ग से जोड़ने की योजना है.

ईवू शहर चीन के ज़जियांग प्रांत में है और उत्पादन का बड़ा केंद्र है.

लेकिन समस्या यह है कि चीन में अब उत्पादन घट रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या इस रूट की वजह से ईवू में उत्पादन बढ़ेगा?

'एक बेल्ट एक रूट' परियोजना के पीछे सोच यह है कि चीन के मास्टर प्लान और तकनीक का इस्तेमाल कर नए क्षेत्रीय उत्पादन केंद्र बनाए जाएं. इसके ज़रिए चीन समुद्र और सड़क के ज़रिए अपना प्रभाव पश्चिम की ओर बढ़ाए.

न्यू सिल्क रो़ड परियोजना के तहत चीन मध्य पूर्व और अफ्रीका तक अपनी पंहुच बनाना चाहता है. इसके तहत बड़े पैमाने पर रेल लाइन, बंदरगाह और राजमार्गों का निर्माण होना है.

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राजमार्ग के ज़रिए मध्य एशिया, पूर्वी यूरोप और पश्चिमी यूरोप को एशिया की मुख्य ज़मीन से जोड़ना है. यह वही रास्ता है जिस पर चल कर 800 साल पहले चंगेज़ ख़ान ने दुनिया के कई इलाक़ों को अपने क़ब्ज़े में कर लिया था.

समुद्री रास्ते से चीन सागर, हिंद महासागर, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका और लाल सागर होते हुए भूमध्य सागर तक पंहुचने की योजना है.

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