अमरीकी जासूसों ने दी रूसी हैकिंग पर गवाही

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Image caption राष्ट्रीय गुप्तचर एजेंसी के निदेशक जेम्स क्लैपर का आरोप है कि ई-मेल हैक करने के पीछ रूस का हाथ था.

अमरीकी गुप्तचर संस्थाओं के चोटी के अफ़सरों ने चुनाव के दौरान रूसी हस्तक्षेप पर गवाही दी है और सबूत पेश किए हैं.

सीनेट की सैन्य सेवा समिति यह सुनवाई कर रही है. इसकी अगुवाई रिपब्लिकन सीनेटर जॉन मैक्केन कर रहे हैं.

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रूस पर यह आरोप है कि उसने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ई-मेल लीक कर और दूसरी तरीकों से रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप की मदद की थी.

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Image caption जॉन मैक्केन सीनेट की सैन्य सेवा समिति की अगुवाई कर रहे हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस मामले में 35 रूसी राजनयिकों को देश छोड़ कर चले जाने को कहा और उसके दो परिसरों को बंद कर दिया था.

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सुनवाई के दौरान कहा, "यह सुनवाई इसलिए की जा रही है कि रूसियों ने जो कुछ किया, उसके मद्देनज़र गुप्तचर सेवा की सुरक्षा को और मजबूत किया जाए."

गवाही में यह भी कहा गया , "रूस के पास विकसित साइबर कार्यक्रम हैं, जिनसे अमरीकी हितों को बड़ा ख़तरा है."

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इस साझा गवाही को राष्ट्रीय गुप्तचर के निदेशक जेम्स क्लैपर, गुप्तचर सुरक्षा के अंडर सेक्रेटरी मार्सल लेटर और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के निदेशक एडमिरल माइकल रोजर्स ने लिखा है.

दूसरी ओर, गुरूवार को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि वे गुप्तचर एजेंसियों के "बड़े फ़ैन" हैं. वे इस पर भी शक जताते रहे हैं कि क्रेमलिन ने डेमोक्रेटिक पार्टी के ई-मेल्स को लीक करने का आदेश दिया था.

लेकिन आंतरिक सुरक्षा विभाग ने दिसंबर में एक डीक्लासिफ़ाइड रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट से इस आरोप को बल मिलता है कि रूसी सरकार ने चुनाव के दौरान सुनियोजित तरीके से ट्रंप की मदद की थी.

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