पाक मिसाइल 'बाबर' कहीं फ़र्ज़ी तो नहीं?

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Image caption परमाणु क्षमता वाले क्रूज़ मिसाइल का रेंज 450 किलोमीटर बताया जा रहा है.

पाकिस्तान के बाबर-3 मिसाइल टेस्ट पर जो शक और सवाल उठाए जा रहे हैं उस पर भारत के रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि 'परीक्षण सचमुच किया गया लगता है.'

नौसेना के रिटायर्ड कोमोडोर सी. उदय भास्कर का कहना है कि पाकिस्तान एक ज़िम्मेदार मुल्क है और 'मुझे नहीं लगता है कि वो ऐसे किसी मामले में फ़ोटोशापिंग करके इस तरह का दावा करेगा.'

बाबर-3 क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण'

वहीं भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल अफ़सर करीम का कहना है, 'पाकिस्तान बहुत दफ़ा ऐसे दावे कर चुका है इसलिए उसके इस दावे को सीधे तौर पर दुरुस्त ठहराना मुश्किल है. सच क्या है ये जब पूरा तथ्य सामने आएगा तो मालूम होगा.'

लेकिन उनके मुताबिक़ 'एक ट्रायल किया गया है और वो किसी छिछले पानी (झील या नदी) से किया गया लगता है, पनडुब्बी से नहीं. लेकिन इसका मतलब है कि वो भविष्य में इसका ट्रायल पनडुब्बी से करना चाहते हैं.'

पाकिस्तानी सेना ने चंद दिनों पहले दावा किया था कि उन्होंने पनडुब्बी से छोड़ी जा सकने वाली न्यूकिलयर क्रूज़ मिसाइल - बाबर-3 का सफल परीक्षण किया है.

लेकिन भारतीय मीडिया के कुछ हलक़ो में ये ख़बर छपी कि पाकिस्तानी सेना ने टेस्ट का जो वीडियो जारी किया था वो नक़ली था.

कहा गया कि पाकिस्तानी सेना ने जो वीडियो जारी किया है उसमें ग़ौर से देखने पर एक समय पर ही दो मिसाइलें दिखती हैं, लगता है कि मिसाइल का उड़ने का सीन कंप्यूटर जेनेरेटेड ग्राफ़िक है.

एक जगह तो कहा गया कि भारतीय नौसेना, जो ऐसी गतिविधियों पर नज़र रखती है, उसने कहा है कि पाकिस्तानी जलसीमा में इस तरह का कोई परीक्षण हुआ ही नहीं है.

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Image caption भारत-पाकिस्तान के बीच हमेशा से जारी तनाव इन दिनों और बढ़ गया है.

अफ़सर करीम कहते हैं कि मीडिया में जो दिखाया जाता है उस पर आप यक़ीन नहीं कर सकते हैं क्योंकि उसमें से तथ्य अकसर नदारद रहते हैं.

उदय भास्कर सोसाइटी फ़ॉर पालिसी स्टडीज़ के डायरेक्टर भी हैं, उनका कहना है कि दोनों मुल्कों में ऐसे लोग हैं जो दूसरे की उपलब्धि को झूठा बताने की जुगत में लगे रहते हैं.

वो कहते हैं कि हमें (भारत) को ये देखना चाहिए कि अगर पाकिस्तान इस तरह के मिसाइल को डेवलप करने में कामयाब हो रहा है तो उसका भारत पर क्या असर पड़ेगा.

उदय भास्कर का कहना है कि जो ये कह रहे हैं कि पाकिस्तान के पास ऐसी क्षमता है ही नहीं, उन्हें चाइना फ़ैक्टर को नहीं भूलना चाहिए.

उनका मानना है कि पिछले 4-5 सालों से चीन की ये कोशिश है कि वो दक्षिण चीन सागर और वेस्टर्न पेसिफिक में अमरीकी नौसेना को रोकने की क्षमता पैदा कर पाए.

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Image caption हिंद महासागर में प्रभाव बढ़ाने में पाकिस्तान चीन के लिए अहम

चीन अगर हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है तो वो इसमें पाकिस्तान का सहारा लेने की कोशिश करेगा.

उदय भास्कर कहते हैं कि चीन ने हाल में पाकिस्तान को आठ पनडुब्बी देने का वादा भी किया है.

वो कहते हैं कि ये भारत के लिए एक बहुत जटिल चुनौती होगी.

उदय भास्कर उन अटकलों को भी ग़लत बताते हैं कि इस टेस्ट के साथ पाकिस्तान के पास तीनों- जल, थल और वायु से परमाणु मिसाइल दाग़ सकने की क्षमता पैदा हो जाएगी. इस क्षमता को ट्रायड कहते हैं.

वो कहते हैं कि ट्रायड की विश्वसनीय क्षमता सिर्फ़ अमरीका, रूस और सीमित रूप से फ्रांस के पास है.

और ऐसी क्षमता न ही चीन के पास है और न भारत के पास.

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