ट्रंप, 'सेक्स टेप' और रूस की कठपुतली राष्ट्रपति

  • 12 जनवरी 2017
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Image caption ट्रंप ने ख़बर को फर्जी बताया और ख़ुफ़िया एजेंसी के ज़रिये इसे लीक करने की निंदा की है.

डोनल्ड ट्रंप ने कुछ जगहों पर छपी उस ख़बर को 'फर्ज़ी' बताया है कि उनके चुनाव प्रचार की रूस से मिलीभगत थी - और रूस के पास उनके निजी जीवन से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री है.

बीबीसी के पॉल वुड की जानकारी में चुनाव के पहले से ही इस तरह के आरोप लग रहे थे, वो बता रहे हैं कि ये पूरा मामला कैसे सामने आया.

अगर ये विवाद सच हैं तो रूसी अमरीकी राष्ट्रपति को ब्लैकमेल कर सकते हैं.

मेरी जानकारी में सीआईए को लगता है कि रूस के पास नवनिर्वाचित राष्ट्रपति से जुड़ी 'कॉमप्रोमैट' - या आपत्तिजनक सामग्री है. साथ ही साथ एक ज्वायंट टास्कफोर्स, जिसमें सीआईए और एफ़बीआई भी शामिल है, इस बात की जांच कर रहे हैं कि रूसियों ने चुनाव प्रचार के लिए ट्रंप या उनकी किसी संस्था को पैसा भेजा था या नहीं.

यह दावा एक पूर्व ब्रितानी ख़ुफ़िया एजेंट की लिखी रिपोर्टों में किया गया था. MI6 के लिए काम करनेवाला ये एजेंट मॉस्को स्थित ब्रितानी दूतावास में काम करता था और रिटायर होने के बाद वो एक कंसलटेंसी चलाता है जो रूस में व्पायार या उद्योग लगाने पर लोगों को सलाह देती है.

एजेंट ने रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी एफएसबी के कई पुरानी पहचान वालों से बात की थी और उनमें से कुछ को तो सूचना के बदले पैसे भी दिए थे. उन लोगों ने इस एजेंट को बताया कि ट्रंप का एक वीडियो मॉस्को के रिट्ज़ कार्लटन होटल में बनाया गया था जिसमें वो बहुत सारी यौनकर्मियों के साथ मौजूद थे.

एफएसबी को पहले केजीबी के नाम से जाना जाता था.

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों पर ट्रंप का हमला

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Image caption उम्मीदवारों की डिबेट में हिलेरी क्लिंटन ने डोनल्ड ट्रंप पर रूस की कठपुतली कहा.

मुझे इन बातों की जानकारी पहले थी क्योंकि राजनीति के क्षेत्र में रिसर्च करनेवाली एक संस्था ने मुझे ये चुनाव प्रचार के आख़िरी दिनों में ये रिपोर्ट दिखाई थी. इसी संस्था ने ये रिपोर्ट ब्रितानी एजेंट को कमीशन की थी. हमने तब इसका इस्तेमाल नहीं किया, हमें नहीं मालूम था कि क्या सचमुच ऐसा टेप मौजूद था और हमारा तर्क था कि टेप को बिना देखे हमें कैसे मालूम कि ये दावे सच हैं या नहीं.

इन रिपोर्टों में जो लिखा था वो वाक़ई बहुत रंगीन था. इन रिपोर्ट की सीरिज़ अब इंटरनेट न्यूज़ साइट बज़फ़ीड पर पोस्ट कर दी गई हैं.

ट्रंप समर्थकों का कहना है कि ये हमले राजनीतिक विद्वेष से किए जा रहे हैं. बेहद नाराज़ नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने ट्विटर पर पूछा है, 'क्या हम नाज़ी जर्मनी में रह रहे हैं?'

बाद में उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेस में कहा कि 'इस तरह की रिपोर्ट कभी लिखी ही नहीं जानी चाहिए थी.' और 'कम से कम इसे कभी भी रिलीज़ नहीं किया जाना चाहिए था.'

ट्रंप ने कहा कि 'मेमो कुछ बीमार मानसिकता के लोगों ने लिखी है और कुछ बकवास बातों को जमा करने की कोशिश की है.'

विरोधी शोध संस्था ने राष्ट्रपति चुनाव के प्राइमरी के दौरान ट्रंप विरोधी ख़ेमे के लिए काम करती थी. फिर चुनाव के दौरान उसकी फंडिग एक डेमोक्रेटिक पार्टी के एक अज्ञात समर्थक ने की.

लेकिन ये राजनीति पर लिखनेवाले पत्रकार नहीं, उनका काम सामान्य तौर पर MI6 एजेंट की कंसलटेंसी की तरह मुल्कों का विश्लेषण है कि वहां धंधा करना आर्थिक रूप से कैसा होगा.

ऐसा लगता है कि ब्रितानी एजेंट ने एफ़बीआई को अपनी रिपोर्ट उनकी सलाह के बिना दी थी. लेकिन नवनिर्वाचित राष्ट्रपति पर कॉमप्रोमैट का दावा करनेवाला अकेला सूत्र MI6 का यह एजेंट ही नहीं था.

मुझे एक पूर्व जासूस ने अगस्त में इस रिपोर्ट के बारे में बताया था. उस पूर्व जासूस को इसके बारे में 'पूर्वी यूरोप की ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख से पता चला था.'

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Image caption ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति को अपना दोस्त बुलाया है. जिसे अमरीका में शायद उतनी अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता.

मैंने बाद में मैंने एक बिचौलिये की मार्फ़त इस केस फ़ाइल पर काम कर रहे सीआईए एजेंट से कुछ सवाल किए. वो मुझसे सीधे बात नहीं करने को तैयार नहीं थे.

मुझे जवाब मिला कि वैसे 'एक नहीं कई टेप हैं,' 'ऑडियो और वीडियो दोनों' और 'अलग-अलग तारीख़ों के' और 'कई जगहों के' - मॉस्को के रिट्ज़ कार्लटन के और सेंट पीटरबर्ग्स के भी. कहा गया कि ये 'टेप सेक्स से संबंधित' हैं.

सीआईए को लगता था कि ये दावे 'विश्वसनीय' हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक़ इन दावों की रिपोर्ट पिछले हफ़्ते राष्ट्रपति ओबामा के पास पहुंच गई, संसद के नेताओं को भी सूचना दी गई और ख़ुद ट्रंप को भी बताया गया.

ट्रंप ने नवंबर 2013 में मॉस्को की यात्रा की थी, समझा जाता है कि वो टेप उसी वक़्त बनाया गया था. एक टीवी फ़ुटेज मौजूद है जिसमें वो मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में नज़र आ रहे हैं. मॉस्को के किसी आलीशान होटल में रुकनेवाले किसी भी शख़्स को मालूम होगा कि वहां मिनी बार के साथ छुपा हुआ कैमरा और माइक्रोफ़ोन भी मौजूद होगा.

कॉमप्रोमैट हासिल करने में रूसी सुरक्षा एजेंसियों को महारत है. रूसी मामलों के एक विशेषज्ञ ने मुझे बताया कि व्लादीमीर पुतिन भी कभी-कभी कहते हैं कि उनका कॉमप्रोमैट भी मौजूद है - लेकिन हो सकता है पुतिन मज़ाक कर रहे हों.

एक विशेषज्ञ ने मुझे बताया कि एफ़एसबी अधिकारी बड़े लोगों के टेप मौजूद होने के बारे में शेख़ी बघारने के आदी है, और अगर वो इस तरह का कोई दावा करते हैं तो उसको लेकर सजग रहने की ज़रूरत है. सीआईए के एक पूर्व एजेंट ने बताया कि उन्होंने एक एफ़एसबी अधिकारी से टेप को लेकर बात की. उनका कहना था कि 'ये बकवास है.' ट्रंप और उनके समर्थक ये सही कह रहे हैं कि ये आरोप आधारहीन हैं.

लेकिन ये मामल सिर्फ़ सेक्स का नहीं, पैसे का भी है. पूर्व MI6 एजेंट ने विस्तार से लिखा है कि रूस ने ट्रंप को ये कहकर ख़रीदने की कोशिश की, ये कहा गया कि वो उन्हें रूस में 'फ़ायदे का सौदा करने का मौक़ा देंगे.' ट्रंप से इससे इंकार कर दिया और कहा कि रूस में उनका काम-धंधा बड़ा नहीं है.

लेकिन एक ज्वांट इंटेलिजेंस एंड लॉ इंफोर्समेंट टास्क फ़ोर्स इस मामले की जांच कर रही है कि ट्रंप को उनके क़रीबियों के ज़रिये पैसे दिए गए. 15 अक्टूबर को यूएस सीक्रेट इंटेलिजेंस कोर्ट ने दो रूसी बैंको की जांच के लिए वारंट जारी किया है.

ये ख़बर मेरे पास कई जगहों से पहुंची और इसकी प्रामाणिकता पर एक शख़्स ने बात की. उन्हें मैं अमरीकी सुरक्षा एजेंसी का सीनियर मेम्बर कहकर बुलाउंगा. वो मुझे ख़ुद से कुछ नहीं बताता था - क्योंकि ऐसा करना ग़ैर-क़ानूनी होता -लेकिन वो मुझे अपने स्त्रोत से पता चले सूचनाओं के सही या ग़लत होने के बारे में बता देते थे.

मैं उनसे कहता था, .... मैं एक रिपोर्ट लिखने जा रहा हूं. अगर मेरी सूचना सही होती तो वो कहता मुझे कोई दिक्क़त नहीं है. वो मुझसे ख़बरों के क्रम के बारे में बता देते.

पिछले अप्रैल में, सीआईए डायरेक्टर के पास ऐसी ख़ुफ़िया जानकारी पहुंची जिसे लेकर वो चिंतित हो गए. कथित तौर पर ये एक बातचीत की रिकॉर्डिंग थी जिसमें अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी पैसे दिए जाने की जानकारी थी.

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Image caption चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप का विरोध ज़ोर-शोर से हुआ और कई बार तो सभाओं में विरोधी नारे भी लगे.

अमरीका को ये सूचना किसी बाल्टिक देश की ख़ुफ़िया एजेंसी से मिली थी.

सीआईए देश के भीतर किसी शहरी के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर सकती है इसलिए छह अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों को मिलाकर एक ज्वांयट काउंटर इंटेलिजेंस टास्क फ़ोर्स का गठन किया गया.

फिर इस मामले को ख़ुफ़िया अमरीकी अदालत में ले जाया गया. ये अदालत ख़ुफ़िया मामलों की सुनवाई करती है. अदालत से दो रूसी बैंकों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डस पर नज़र रखने की बात कही गई. जज ने उसे पिछले जून को सीधे तौर पर इंकार कर दिया. जुलाई में वो फिर एक बेहतर याचना के साथ अदालत गए और अदालत ने फिर उसका हुक्म देने से मना कर दिया. आख़िरकार, इसकी इजाज़त मतदान के तीन हफ़्ते पहले हासिल हुआ. तबतक अदालत में नए जज नियुक्त हो गए थे.

अदालत के हुक्म में ट्रंप और उनके क़रीबियों का ज़िक्र नहीं है, इसमें सिर्फ़ विदेशी तत्वों की बात कही गई है, जो इस मामले में दो रूसी बैंक हैं. लेकिन आख़िरकार जांच रूस से अमरीका भेजे गए फंड का है, और अगर साबित हो जाता है, तो गंभीर अपराध का मामला है.

न्याय मंत्रालय की जानकारी रखनेवाले एक वकील ने मुझे बताया कि जांच ट्रंप के तीन नज़दीकियों को लेकर है. उन्होंने कहा 'लेकिन ये साफ़ है कि ये ट्रंप से जुड़ा है.' मैंने उन तीनों से बात की जिनके बारे में वकील ने मुझे बताया था लेकिन तीनों से साफ़ तौर पर कहा कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया.

दो में से एक रूसी बैंक ने किसी तरह के दुराचार से मना किया, जबकि दूसरे ने कोई जवाब नहीं दिया.

जांच चुनाव के दौरान भी जारी रही. इसी दौरान सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैरी रीड ने एफ़बीआई डायरेक्टर पर ट्रंप, उनके क़रीबी और रूसी सरकार पर विस्फोटक जानकारियां छुपाने का इलज़ाम लगाया.

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Image caption ट्रंप का रूस में व्यापार बहुत बड़ा नहीं है.

अदालती वारंट के बारे में मुझे सीबीआई, एफ़बीआई और सरकार में से किसी ने भी बताने से इंकार कर दिया. ये मालूम नहीं कि ट्रंप प्रशासन में पूरी जांच किस तरह चल पाएगी. रूसियों ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति चुनाव को किसी भी तरीक़े से प्रभावित करने की कोशिश से इंकार कर दिया है.

अगर ऐसा कोई टेप है भी तो रूसी उसे नहीं देंगे. हालांकि कुछ लोगों को उम्मीद है कि ढेर सारा पैसा बनाने के चक्कर में शायद कोई एफ़एसबी अधिकारी टेप हवाले कर दे.

चुनाव के दौरान ही पोरनोग्राफ़िक मैगज़ीन हस्टलर ने ट्रंप टेप के लिए 10 लाख डॉलर देने का ऐलान किया था. अब इसी तरह का ऑफर उसी तरह की दूसरी पत्रिका पेंटहाउस की तरफ़ से दिया गया है.

ये बड़ी अजीब सी स्थिति है जब 10 दिनों से भी कम में ट्रंप को राष्ट्रपति पद की शपथ लेनी है. हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान इस पर फोकस कम हो गया था.

उम्मीदवारों के बीच हुई डिबेट में हिलेरी क्लिंटन ने ट्रंप को रूस को 'कठपुतली' बुलाया, जिसपर ट्रंप ने उन्हें रोकते हुए कहा 'नहीं, नहीं, तुम कठपुतली हो.'

सीआईए के पूर्व डायरेक्टर ने माइकल मूर ने अगस्त में न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा, 'ख़ुफ़िया जगत में, हम कहेंगे कि पुतिन ने ट्रंप को उनके जाने बग़ैर रूस का एजेंट बना लिया है.'

एजेंट और कठपुतली दोनों शब्दों में नियंत्रण का भाव निहित है.

सीआईए और एनएसए के पू्र्व प्रमुख माइकेल हेडन ने ट्रंप को ऐसा बेवक़ूफ़ बताया है जिसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांकि इन शब्दों के पीछे क्या कहानी है ये जानकारी तब ख़ुफ़िया समुदाय के बीच ही मौजूद थी और अब इन दावों को सभी अमरीकियों ने सुन लिया है.

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