रुस पर सख़्त हुए ट्रंप के सिपहसलार

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Image caption जेम्स मैटिस अमरीका का नया रक्षा मंत्री बनने के लिए ट्रंप की पहली पसंद हैं.

ट्रंप प्रशासन में रक्षा मंत्री होने जा रहे जनरल जेम्स मैटिस और ख़ुफ़िया सेवा प्रमुख होने जा रहे माइक पोमपियो ने सीनेट की अनुमोदन समिति के समक्ष रूस के प्रति कड़ा रुख अख़्तियार किया है.

जनरल मैटिस ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से नेटो पर सबसे बड़ा ख़तरा मंडरा रहा है वहीं माइक पोमपियो ने कहा कि रूस यूरोप के लिए ख़तरा बन रहा है.

वहीं राष्ट्रपति निर्वाचित डोनल्ड ट्रंप ने अमरीका के साथ बेहतर रिश्तों की उम्मीद ज़ाहिर की थी.

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सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के समक्ष पेश होते हुए जनरल मैटिस ने कहा, "मुझे लगता है कि अभी सबसे ज़रूरी बात ये है कि हम इस सच्चाई को स्वीकार करें कि पुतिन नेटो को तोड़ना चाहते हैं और हमें क़दम उठाने होंगे, समन्वित क़दम, राजयनिक, आर्थिक, सैन्य और अन्य गठबंधन से जुड़े क़दम, हमें अपने मित्र राष्ट्रों के साथ मिलकर काम करना होगा और जहां ज़रूरी है वहां अपनी रक्षा करनी होगी. मुझे लगता है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से नेटो पर सबसे बड़ा ख़तरा पैदा हो रहा है और ये रूस की ओर से है, चरमपंथी संगठनों की ओर से है और जो चीन दक्षिण चीन सागर में कर रहा है उससे है."

रिटायर्ड जनरल जेम्स मैटिस ने ये भी कहा कि पुतिन नेटो राष्ट्रों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंन नेटो को हालिया इतिहास का सबसे कामयाब सैन्य गठजोड़ बताया है. वहीं डोनल्ड ट्रंप ने 70 साल पुराने इस संगठन के महत्व पर सवाल खड़े किए थे.

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दूसरी ओर ख़ुफ़िया सेवा सीआईए के निदेशक होने जा रहे माइक पोमपियो को राष्ट्रपति निर्वाचित डॉनल्ड ट्रंप और ख़ुफ़िया सेवाओं के बीच हुई नोकझोंक पर सवालों का सामना करना पड़ा.

उन्होंने सीनेट समिति से कहा कि उन्हें अमरीका की ख़ुफ़िया सेवाओं में पूरा विश्वास है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों का हैकिंग के पीछे रूसी हैकरों का हाथ होने का आंकलन ठोस सबूतों पर आधारित है.

उन्होंने कहा, "मैं मानता हूं. मैंने एक बैठक में हिस्सा लिया. मैं उस बैठक में शामिल था जिसमें राष्ट्रपति निर्वाचित को जानकारियां दी गईं थीं. जो भी बातें मेरे सामने आईं उनसे मुझे लगा कि वो ठोस हैं.

पोमपियो ने ये भी कहा कि रूस के प्रति ट्रंप प्रशासन के रवैये का असर ख़ुफ़िया सेवाओं पर नहीं होगा.

उन्होंने कहा "हम रूस से कैसे निबटेंगे ये नीतिगत फ़ैसला है लेकिन ये ज़रूरी होगा कि एजेंसी नीति निर्मातओं को सटीक, सही वक़्त पर, पूर्ण और ठोस जानकारियां उपलब्ध कराए और रूसी गतिविधियों पर हम मुमकिन स्पष्ट विश्लेषण दे."

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