12 घंटे तक मौत का खेल और फिर...

युद्ध में शामिल सैनिकों को युद्ध सीमा पर तैनात होना पड़ता है और इस दौरान वे अपने परिवार से दूर रहे हैं. लेकिन अमरीका में सैनिकों के एक नए समूह को ऐसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा है.

जो हमारी और आपकी तरह रोजाना अपने घर से काम पर जाकर, घर लौट आता है, परिवार के साथ समय बिताने के लिए. ये ड्रोन पायलट हैं और अमरीकी एयर फ़ोर्स के सदस्य हैं.

इन लोगों के काम को देखने और समझने का मौका बीबीसी संवाददाता विन रे को मिला है. उन्होंने अमरीकी एयरफ़ोर्स के बेस को साइंस फिक्शन की किताबों जैसा पाया. जहां ड्रोन किसी हल्के फुल्के विमान की तरह थे और आदमी के बिना नियंत्रित होने वाले थे.

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लेकिन जो बात सबसे अलग थी, वो थी सेना के जवानों जैसा समूह नज़र नहीं आया. परंपरागत तौर पर सेना के जवान एक दूसरे के साथ रहते हुए सुख दुख के साथी बन जाते हैं, क्योंकि वे परिवार से काफ़ी दूर तैनात होते हैं.

लेकिन यहां तो आदमी सुबह छह बजे ड्यूटी पर आकर छह बजे शाम अपने अपने घर लौट जाते हैं. ये वो सैनिक हैं जो अपने घर पर नाश्ता करते हैं और अचानक से युद्ध क्षेत्र में पहुंच जाते हैं और शाम होते ही फिर से अपने परिवार के साथ होते हैं.

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लेकिन सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक इनके पास विरोधियों को मारने का लाइसेंस होता है. लेफ्टिनेंट कर्नल मैट मार्टिन के पास काफ़ी अनुभव हो चुका है.

मार्टिन काफ़ी अनुभवी ड्रोन पायलट हैं और वे मानते हैं कि ऐसी स्थिति में काम करना बेहद दबाव भरा होता है और सामान्य ज़िंदगी जी पाना संभव नहीं होता है.

वे कहते हैं, "यह काफ़ी मुश्किल काम है. आप गाड़ी ड्राइव करके काम पर आते हैं लेकिन उसके बाद आपको विमान उड़ाना होता है. मैं तो उसी तरह से काकपिट में बैठता हूं और विमान उड़ाने में मगन हो जाता हूं. उसके कुछ घंटे के बाद मैं ड्रोन से बाहर निकलकर लास वेगास पहुंच जाता हूं. अलग ज़ोन और अलग समय क्षेत्र में."

बेस कमांडर कर्नल केस कनिनगहेम ने बताया, "दरवाजे के अंदर आते ही, वे युद्ध क्षेत्र में पहुंच जाते हैं. हालांकि वे सशरीर घर में होते हैं, लेकिन मानसिक तौर पर युद्ध में होते हैं. इसलिए हम उन्हें रोजाना घर भेजते हैं, अपने परिवार वालों के साथ समय बिताने ताकि वे पूरे मन से फिर लड़ाई के मैदान में लौटें."

यह नए तरह का युद्ध का मैदान है. इसमें काम करने वाले ड्रोन पायलट नेवादा में बैठकर करीब 12 हज़ार किलोमीटर दूर स्थित अपने विरोधियों को निशाना बना सकते हैं.

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इसके लिए वे महीनों पहले से अपने विरोधियों पर नज़र रखते हैं, उसकी जीवनशैली के रूटीन को समझते हैं. एयरफ़ोर्स का परंपरागत फ़ाइटर मिसाइल दागने के बाद बेस में लौट आते हैं लेकिन ड्रोन पायलट निशाने लगाने के बाद भी निशाने की जगह पर नज़र रखते हैं ताकि कितना नुकसान किया गया है, इसका अंदाजा लगाया जा सके.

वे जिन तस्वीरों को देखते हैं, उसकी क्वालिटी काफ़ी बेहतर होती है, उसमें हताहत लोगों की तस्वीरें भी दिखाई देती हैं.

हालांकि स्विच ऑफ़, स्विच ऑन जैसी स्थिति का असर इन पायलटों पर ख़ूब पड़ता है और ड्रोन पायलट भी तनाव का सामना करते हैं, ऐसे में उन्हें मनोचिकित्सकों से भी मदद लेनी पड़ती है.

जब विन रे इस बेस से बाहर निकले, तो करीब 3500 ड्रोन पायलट अपने अपने घर लौटने के लिए बाहर निकल रहे थे, लिहाजा ट्रैफ़िक जाम जैसी सूरत बन गई थी.

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ये लोग जब घर पहुंचेंगे तो परिवार वाले यही पूछेंगे- कैसे रहा आज का दिन. और ये बताते हैं कि उन्होंने आज दुनिया के किस कोने में किन लोगों को मिसाइल से उड़ा दिया.

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