उर्दू प्रेस: 'नवाज़ शरीफ़ बोले, सिर्फ़ मुसलमानों का पीएम नहीं'

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पिछले हफ़्ते पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों ने जिन ख़बरों को सुर्ख़ियां बनाईं उनमें पांच नागरिकों का लापता हो जाना, पनामा लीक्स, प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का कटास राज मंदिर दौरा, भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच बढ़ती निकटता शामिल हैं.

पिछले हफ़्ते राजधानी इस्लामाबाद से पांच नागरिक लापता हो गए थे जिनका अब तक कोई पता नहीं चल सका है. पूरे हफ़्ते ये ख़बर अख़बारों के पहले पन्ने पर रही.

रोज़नामा दुनिया ने पाकिस्तानी संसद के उपरी सदन सीनेट के चेयरमैन रज़ा रब्बानी के एक बयान को सुर्ख़ी बनाते हुए लिखा है, "लोगों को ग़ायब करके क्या पैग़ाम दिया जा रहा है. संसद डरने वाली नहीं है."

रज़ा रब्बानी ने लापता हुए पांच लोगों के बारे में केंद्रीय सरकार से सोमवार तक रिपोर्ट देने को कहा है.

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अख़बार के मुताबिक़ रज़ा रब्बानी ने सख़्त लहजे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि लोगों को ग़ायब करके संसद को क्या संदेश दिया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद किसी भी ग्रूप से डरने वाली नहीं है.

रज़ा रब्बानी ने कहा कि नागरिकों के ग़ायब होने के मामले में संसद आंखें बंद नहीं कर सकती.

इस मौक़े पर एक और सांसद फ़रहतुल्लाह बाबर ने कहा कि लापता लोगों का मामला काफ़ी गंभीर हो गया है. उन्होंने कहा कि पहले लोग फ़ाटा और बलूचिस्तान से ग़ायब होते थे, अब तो इस्लामाबाद से लोग ग़ायब हो रहे हैं.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने पंजाब प्रांत के ऐतिहासिक कटास राज मंदिर परिसर का दौरा किया और वहां वाटर फ़िलट्रेशन प्लांट का उद्घाटन किया. कटास राज हिंदुओं का पवित्र स्थल है.

इस मौक़े पर उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित भी किया.

अख़बार जंग ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापते हुए नवाज़ शरीफ़ के एक बयान को सुर्ख़ी लगाई है.

अख़बार लिखता है, "सिर्फ़ मुसलमानों का प्रधानमंत्री नहीं, सबकी ख़ुशियों में शरीक होता हूं."

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अख़बार के मुताबिक़ नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ये दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यकों के दोस्त के तौर पर पहचाना जाएगा.

शरीफ़ का कहना था, "पगड़ी वाले हों या नंगे सिर, दाढ़ी वाले हों या बग़ैर दाढ़ी वाले मुसलमान हों या ग़ैर-मुस्लिम सबकी ख़ुशियों में शरीक होता हूं. अल्पसंख्यकों की हिफ़ाज़त और उन्हें बराबरी का हक़ देना हमारे ईमान का हिस्सा है. मज़हब सबका अपना-अपना लेकिन मानवता हमारी साझी विरासत है."

भारत और अफ़ग़ानिस्तान की बढ़ती दोस्ती भी पाकिस्तानी अख़बारों में सुर्ख़ियां बटोरती रहीं.

नवा-ए-वक़्त ने पहले पन्ने पर लिखा है, "भारतीय और अफ़ग़ान ख़ुफ़िया एजेंसियों के गठजोड़ पर चिंता, पाकिस्तान में दहशतगर्दी करा रही हैं."

अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफ़ीस ज़करिया ने कहा कि विदेशी ताक़तें हालात को बिगाड़ रही हैं और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर रही हैं. नफ़ीस ज़करिया ने कहा कि पाकिस्तान अपनी धरती किसी दूसरे मुल्क के ख़िलाफ़ हमले के लिए इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं देगा.

भ्रष्टाचार के मामले से जुड़े पनामा लीक्स की ख़बरें भी पूरे हफ़्ते छाई रहीं.

रोज़नामा दुनिया ने बीबीसी के हवाले से लिखा है कि लंदन में नवाज़ शरीफ़ का परिवार जिन घरों का इस्तेमाल करता है उन्हें 90 की दशक में ख़रीदा गया था.

अख़बार के मुताबिक़ बीबीसी के पास मौजूद दस्तावेज़ के आधार पर कहा जा सकता है कि लंदन के सबसे महंगे इलाक़ों में से एक मेफ़ेयर में कुल पांच फ़लैट्स ख़रीदे गए थे. जिन कंपनियों के नाम ये मकान ख़रीदे गए हैं उनके मालिक होने की बात नवाज़ शरीफ़ के बेटे हुसैन नवाज़ स्वीकार कर चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट में पनामा लीक्स की सुनवाई के दौरान प्रधानमंत्री के वकील मख़दूम अली ख़ान ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 62 के तहत किसी भी सांसद की सदस्यता को रद्द तभी किया जा सकता है जब किसी अदालत ने उस सदस्य को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी क़रार देते हुए सज़ा सुना दी हो.

रोज़नामा ख़बरें ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही अनुच्छेद 62 को एक डरावना ख़्वाब कह चुकी है इसलिए उसका इस्तेमाल प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ नहीं हो सकता है.

भारत से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी पर क़ब्ज़े के लिए मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बीच तकरार, खादी ग्राम उद्योग के कैलेंडर और डायरी पर महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और हज सब्सिडी से जुड़ी ख़बरें प्रमुखता से छपीं.

इंक़लाब ने लिखा हैं, "साइकिल पर कौन होगा सवार, अभी और इंतज़ार."

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जदीद ख़बर ने हज सब्सिडी को ख़त्म किए जाने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय के ज़रिए एक कमेटी के गठन किए जाने के फ़ैसले पर संपादकीय लिखा है.

अख़बार के मुताबिक़ आज तक ये रहस्य समझ में नहीं आ सका है कि सरकार हज सब्सिडी मुसलमानों की तरफ़दारी के नाम पर देती है या फिर ये भारत की राष्ट्रीय एयरलाइंस एयर इंडिया को नुक़सान से बचाने के लिए देती है.

खादी ग्राम उद्योग के कैलेंडर और डायरी पर मोदी की तस्वीर के बारे में हिंदुस्तान एक्सप्रेस ने सुर्ख़ी लगाई है, "महात्मा गांधी की जगह नरेंद्र मोदी!"

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