गांबिया: पद छोड़ने के लिए राज़ी नहीं हैं राष्ट्रपति

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गांबिया के राष्ट्रपति यायहा जमेह के पद छोड़ने और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को सत्ता सौंपने की समय सीमा खत्म हो गई है. उन्हें कहा गया था कि या तो वे अपनी हार मान लें या विदेशी सेना के हस्तक्षेप से निपटें.

पिछले महीने हुए चुनाव में एडम बैरो ने मौजूदा राष्ट्रपति यायहा जमेह को हरा दिया था. लेकिन यायहा जमेह से पद छोड़ने से इंकार कर दिया जिसके बाद एडम बैरो ने सेनेगल में शरण ली.

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सेनेगल की सेना गांबिया की सीमा पर पहुंच चुकी है. सेना के मुताबिक़ पश्चिमी अफ़्रीकी सैन्य बल गांबिया में बीते चुनावों में जीते एडम बैरो को सत्ता हस्तांतरण में मदद करने के लिए तैयार है.

नाइजीरिया ने इस इलाक़े में अपने लड़ाकू विमान भेज दिए हैं और कहा है कि उनकी नौसेना का जहाज़ गांबिया के रास्ते पर है. मॉरिशस के राष्ट्रपति मोहमेद आउल्द अब्देल अज़ीज़ गाम्बिया में मौजूद हैं.

इसे जमेह को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति एडम बैरो को सत्ता सौंपने के लिए राज़ी करने की आख़िरी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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Image caption गांबिया के राष्ट्रपति यायहा जमेह

जीते हुए उम्मीदवार को सत्ता हस्तांतरण करने की मियाद बुधवार आधी रात को ख़त्म हो गई.

नाइजीरियाई राष्ट्रपति के आधिकारिक प्रवक्ता गारबा शेहु ने बीबीसी को बताया कि जैसे ही एडम बैरो शपथ लेते हैं और सहयोग की अपील करते हैं, नाइजीरियाई सेना हस्तक्षेप के लिए तैयार है.

गारबा शेहु ने कहा, "अभी हमारी प्राथमिकता गांबिया में रह रहे नाइजीरियाई और दूसरे पश्चिमी अफ़्रीकियों की सुरक्षा है. गुरुवार को कार्यभार संभालने वाले नए राष्ट्रपति एडम बैरो तय करेंगे कि कोई सैन्य गतिविधि होगी या नहीं."

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Image caption गांबिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति एडम बैरो

न्यूयॉर्क में सेनेगल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वो पश्चिमी अफ़्रीकी क्षेत्रीय संगठन इकोवास को अधिकार दें कि वो सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठा सकें.

राष्ट्रपति जमेह ने कहा था कि जब तक नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव नहीं हो जाते तब तक वो अपना पद नहीं छोड़ेंगे.

उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में कई अनियमितताएं थीं. मतदान केंद्र से उनके कुछ समर्थकों को लौटा दिया गया था. उन्होंने चुनाव आयोग पर भी गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है.

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जमेह ने देश में 90 दिनों का आपातकाल लगा रखा है. उन्होंने सुरक्षा बल को आदेश दिया है कि वे "शांति और क़ानून व्यवस्था" पूरी तरह बनाए रखें.

यदि वे फिर से सत्ता हासिल कर लेते हैं तो उन्होंने अपने शासन के दौरान जो भी गलतियां की हैं उनको लेकर उन पर कोई मुक़दमा नहीं चलाया जा सकेगा.

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