सिर्फ भारत में ही नहीं होता है सांडों का खेल

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मनोरंजन के लिए सांडों से लड़ाई का खेल दुनियाभर के कई देशों में खेला जाता है. जहां स्थानीय स्तर पर इस खेल को काफ़ी समर्थन मिलता है वहीं पशु अधिकार कार्यकर्ता इसका विरोध भी करते रहे हैं.

'बुलफ़ाइटिंग' या सांडों की लड़ाई के साथ स्पेन की छवि बनती हैं जहां के 'मेटाडोर' दर्शकों के रोमांच के लिए सांड के सामने जान की बाज़ी भी लगा देते हैं.

स्पेन की बुलफ़ाइटिंग में मेटाडोर दर्शकों के मनोरंजन के लिए सांड को उकसाते हैं और अंत में चांदी की तलवार से उस पर घातक वार करते हैं.

बुलफ़ाइटिंग को स्पेन में संस्कृति का अभिन्न अंग माना जाता है लेकिन यहां भी इस पर प्रतिबंध के लिए विरोध के स्वर प्रखर होते रहे हैं.

2010 में कैटेलोनिया क्षेत्र में इस खेल पर प्रतिबंध भी लगाए गए लेकिन बाद में अदालत ने इन्हें रद्द कर दिया.

अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि 'साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजना' स्थानीय सरकार की ज़िम्मेदारी है. अदालत ने बुलफ़ाइटिंग को साझा संस्कृति का हिस्सा माना था.

स्पेन के सांस्कृतिक असर वाले कई और देशों में भी ये खेल अलग-अलग प्रारूपों में खेला जाता है.

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Image caption फ्रांस के दक्षिणी इलाक़ों में भी बुलफ़ाइटिंग काफ़ी लोकप्रिय है.

फ्रांस के दक्षिणी इलाक़ों में सांडों से लड़ाई का खेल क़रीब डेढ़ सौ सालों से खेला जा रहा है.

फ्रांस में 1976 में पारित एक क़ानून के तहत पशु क्रूरता अपराध है लेकिन इस खेल को 'अटूट स्थानीय परंपरा' मानकर छूट दी गई है. नाइम्स में होने वाले सालाना पांचदिवसीय उत्सव में क़रीब दस लाख लोग शामिल होते हैं.

पुर्तगाल में होने वाले सांडों की लड़ाई के खेल के अंत में सांड की जान नहीं ली जाती है.

यहां लड़ाके घोड़े पर बैठकर सांड से लड़ते हैं. यही नहीं सांडों के सींगों को भी कई बार भर दिया जाता है ताक़ि उनका पैनापन कम किया जा सके.

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स्पेन के साम्राज्यवाद के साथ बुलफ़ाइटिंग भी मेक्सिको पहुँच गई और अब इस खेल के स्पेन के बाद सबसे उत्साही समर्थक यहीं हैं.

मेक्सिको सिटी में दुनिया का सबसे बड़ा बुलरिंग भी है.

मेक्सिको की बुलफ़ाइटिंग स्पेन जैसी ही होती है जिसमें मेटाडोर ही खेल का आकर्षण होता है.

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दक्षिण अमरीकी देश पेरू में दुनिया के सबसे पुराने बुलरिंग में से एक है जिसे 1766 में बनाया गया था. राजधानी लीमा में बुलफ़ाइटिंग का सालान उत्सव होता है जिसे देखने हज़ारों दर्शक उमड़ते हैं.

इक्वाडोर की राजधानी क्वीटो में हर साल दिसंबर में होने वाले सलाना बुलफ़ाटिंग उत्सव में दुनियाभर से मेटाडोर बुलाए जाते हैं जो हज़ारों दर्शकों के सामने अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं.

हालांकि इक्वाडोर में क्वीटो के बाहर इस खेल को ज़्यादा समर्थन प्राप्त नहीं है.

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Image caption जल्लीकट्टू के समर्थन में तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

वहीं भारत के तमिलनाडु में खेले जाने वाले पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू में लड़ाई के बाद बैल की जान नहीं ली जाती है और न ही बैल से लड़ने वाले युवा किसी हथियार का इस्तेमाल करते हैं.

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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू को पशु क्रूरता मानते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया है जिसे लेकर तमिलनाडु में प्रदर्शन हो रहे हैं.

प्रदर्शनकारी अदालत के फ़ैसले को अपनी परंपराओं में ग़ैर ज़रूरी दख़ल मान रहे हैं.

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