क्या था जो ट्रंप के भाषण में नहीं था

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अमरीका के 45वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन के दौरान डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि वे उग्र इस्लामिक चरमपंथ को धरती से मिटा देंगे.

लेकिन ये बड़ी अजीब बात है क्योंकि सीरिया में इस्लामिक स्टेट और अमरीका दोनों ही राष्ट्रपति बशर अल असद के ख़िलाफ़ लड़े हैं, एक तरह से सहयोगी रहे हैं.

उग्र इस्लामिक चरमपंथ को पूरी तरह ख़त्म कर देंगे: ट्रंप

इसी तरह यमन में अमरीका, आइसिस और सऊदी अरब मिलकर ईरान और हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं. इस्लामिक स्टेट और अमरीका कई जगह पर कूटनीतिक सहयोगी हैं और राष्ट्रपति ट्रंप उसे मिटाने की बात कह रहे हैं.

इस्लामिक स्टेट कोई ऐसी चीज़ थोड़ी है जिसे आप तोड़-फोड़कर फेंक देंगे. इस तरह तो और लोग चरमंपथ की राह पर प्रेरित होंगे और आगे चलकर बड़ी संख्या में शरणार्थियों की समस्या पैदा हो जाएगी.

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इसके बावजूद मुझे ये कहना पड़ रहा है कि ये डोनल्ड ट्रंप का अब तक का सबसे बढ़िया भाषण था. ये पहला मौक़ा था जब ट्रंप ने ख़ुद को पूरे अमरीका के राष्ट्रपति के तौर पर पेश करने की कोशिश की.

डोनल्ड ट्रंप के भाषण की 5 प्रमुख बातें

लेकिन अमरीका में पिछले कुछ समय में जिस तरह विभाजन बढ़ा है, जिस तरह नफ़रत भरी बातें बढ़ी हैं, उनकी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे लगता कि हां ट्रंप ने इन मसलों पर चिंता जताई है.

ये अलग बात है कि मुसलमानों और अफ्रीकी-अमरीकियों के ख़िलाफ़ जिस तरह के बयान ट्रंप पहले देते रहे हैं, वैसा कुछ अबकी बार उन्होंने नहीं कहा.

लेकिन ट्रंप ने महिलाओं और मुसलमानों के ख़िलाफ़ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल पहले किया था, वो बातें राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनका पीछा नहीं छोड़ेंगी.

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ट्रंप ने जब ये कहा कि वो अमरीका की जो लुटी हुई दौलत है, उसे वापस लाएंगे, तब उनका इशारा बराक ओबामा की तरफ़ लग रहा था.

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