ट्रंप के आदेश का असर, इराक़ और यमन के कई नागरिकों को रोका

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इमेज कॉपीरइट EPA

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के देश की सीमाओं को अस्थाई रूप से चार महीने के लिए शरणार्थियों के लिए बंद करने के आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद मिस्र की राजधानी काहिरा में इराक़ और यमन के कई लोगों को अमरीका की उड़ान पर जाने से रोक दिया गया है.

हालाँकि इन लोगों के पास कथित तौर पर सही वीज़ा दस्तावेज़ थे.

इधर, न्यूयॉर्क के जॉन एफ़ कैनेडी हवाई अड्डे पर दो इराक़ी आप्रवासियों को हिरासत में ले लिया गया है. इनमें से एक अपनी पत्नी और बेटे से मिलने पहुंचे थे जो पहले ही अमरीका में बस चुके हैं.

सीरियाई शरणार्थियों के लिए अमरीकी दरवाज़े बंद

इमेज कॉपीरइट PA

इससे पहले गूगल ने अपने सफ़र कर रहे कर्मचारियों से कहा है कि इससे पहले की ट्रंप के ये आदेश लागू कर दिए जाएं, वो जल्द से जल्द अमरीका लौट आएं. कंपनी के अनुसार उसके 100 से अधिक कर्मचारी इस आदेश से प्रभावित हो सकते हैं.

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने बीबीसी को बताया है कि वो राष्ट्रपति ट्रंप के नए आदेश को तुरंत लागू करने के लिए काम कर रहा है.

ट्रंप को क्यों है चीन की ज़रूरत, 5 वजहें

मुसलमानों की प्रोफ़ाइलिंग हो: ट्रंप

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption एक्ज़ीक्यूटिव आदेश दिखाते हुए डोनल्ड ट्रंप

ट्रंप ने शनिवार को एक एक्ज़ीक्यूटिव आदेश पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार अमरीका को विदेशी इस्लामिक चरमपंथियों से बचाने के लिए अमरीका की सीमाएं शरणार्थियों के लिए चार महीनों के लिए बंद कर दी गई हैं.

इस आदेश के मुताबिक़ चार महीनों से लिए शरणार्थी अब अमरीका में कदम नहीं रख सकेंगे. साथ ही सात मुस्लिम बहुल देशों (ईरान, इराक़, सोमालिया, सूडान, सीरिया, लीबिया और यमन) के नागरिकों को वीज़ा जारी करने पर तीन महीने की रोक लगाई गई है.

अपने चुनावी वायदों में ट्रंप ने कई बार कहा था कि वो अमरीका में मुसलमानों के आने पर रोक लगाएंगे.

'अंदर से डरे हुए हैं अमरीका के मुसलमान'

ट्रंप और पुतिन क्या बात करेंगे?

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption लेबानन में अपने टेंट से झांकते सीरियाई शरणार्थी बच्चे

आदेश की आलोचना

ट्रंप के इस आदेश की दुनियाभर में तीखी आलोचना हुई है.

अमरीकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन ने कहा है कि शरणार्थियों पर दरवाज़े बंद कर के उन्होंने उनकी बात मान ली है जो अमरीका को नुक़सान पहुंचाना चाहते हैं. यूनियन का कहना है कि वो इस आदेश के ख़िलाफ़ कोर्ट का रुख़ करेंगे.

काउंसिल ऑफ़ इस्लामिक रिलेशंस ने भी कहा है को क़ानून के दरवाज़े खटखटाएंगे. काउंसिल ने ग़ैर अमरीकी नागरिकों, ख़ासकर आदेश से सीधे तौर पर प्रभावित देशों के नागरिकों से अपील की है कि वो अपने सफर की योजनाएं 90 दिनों तक के लिए स्थगित कर दें.

डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेटर एलिज़ाबेथ वारेन ने इस आदेश को अमरीकी मूल्यों के साथ धोखा कहा है.

जर्मनी: 'सीरियाई शरणार्थी का संबंध आईएस से था'

इमेज कॉपीरइट PA

नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई ने कहा कि अमरीका के राष्ट्रपति के हिंसाग्रस्त इलाकों से जान बचाकर भाग रहे बच्चों पर दरवाज़ा बंद करने के इस आदेश ने उनका दिल तोड़ दिया है.

वापस लौटते शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र ने अमरीका से गुज़ारिश की है कि वो शरणार्थियों की रक्षा करे. संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी ने कहा है कि हिंसा से बचकर भाग रहे लोगों की सुरक्षा करना समय की मांग है.

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेश्नल की प्रवक्ता ऑड्रे गॉघरन का कहना है, "यह बुरा है, शरणार्थियों को निशाना बनाया जा रहा है जो दुनिया के सबसे असहाय लोग हैं. इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए."

फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां मार्क ऐरो ने कहा है कि हमने अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और शरणार्थियों का स्वागत करना हमारा कर्तव्य है.

इमेज कॉपीरइट EPA

ईराऩ के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि ये देशों के बीच दीवारें बनाने का वक्त नहीं है.

अमरीका और मेक्सिको के बीच दीवार का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "वो भूल गए हैं कि काफी साल पहले बर्लिन की दीवार गिरा दी गई थी. अगर देशों के बीच दीवारें हैं भी तो उन्हें मिटा देना चाहिए."

मेक्सिको-अमरीका के बीच दीवार से क्या बदलेगा?

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption चेक गणराज्य के रष्ट्रपति मिलॉश ज़ेमन

हालांकि कई आलोचकों के बीच चेक गणराज्य के रष्ट्रपति मिलॉश ज़ेमन ने ट्रंप का समर्थन किया है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप अमरीकियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

ज़ेमन इससे पहले भी यूरोप में शरणार्थियों के प्रवेश की आलोचना करते रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)