फ़ैसले की चौतरफ़ा निन्दा, पर ट्रंप अड़े

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Image caption न्यूयॉर्क में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप की नीति का विरोध किया

शरणार्थियों और सात मुख्यतः मुस्लिम देशों के लोगों को अमरीका आने से रोकने के अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के फ़ैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निन्दा हो रही है.

अमरीका के भीतर भी उनके इस फ़ैसले को लेकर कई हलकों में चिन्ता जताई जा रही है. मगर ट्रंप प्रशासन अपने फ़ैसले पर मज़बूती से टिका हुआ है.

डोनल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाक़ात करनेवाली पहली अंतरराष्ट्रीय नेता ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के दफ़्तर ने कहा है कि उन्होंने अपने गृह और विदेश मंत्रियों को अपने अमरीकी समकक्षों से संपर्क कर अपनी चिन्ता जताने का निर्देश दिया है.

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Image caption ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने ट्रंप के फ़ैसले पर चिन्ता जताई है

'रद्द हो ट्रंप का ब्रिटेन दौरा'

ब्रिटेन में विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष कंज़र्वेटिव सांसद क्रिस्पिन ब्लंट ने इस पाबंदी की आलोचना करते हुए कहा है,"ये एक बकवास नीति है, ये एक अपरिपक्व प्रशासन का काम है, इसपर सोचने के लिए किसी को भी पाँच मिनट से ज़्यादा नहीं लगता कि इसमें क्या गड़बड़ियाँ हैं."

वहीं ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने कहा है कि डोनल्ड ट्रंप के ब्रिटेन दौरे को रद्द कर दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा,"मुझे अच्छा नहीं लगेगा कि वो यहाँ आएँ, तबतक जबतक कि इस पाबंदी को हटा नहीं लिया जाता. क्योंकि देखिए उन देशों में क्या हो रहा है, और कितनों के साथ ऐसा होगा? और इसका बाक़ी दुनिया पर क्या दूरगामी असर पड़ेगा?"

जर्मनी की चांसलर एंगेला मैरकल की प्रवक्ता स्टेफ़न ज़ाइबर्ट ने कहा है कि वे नहीं मानतीं कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में किसी एक जगह या किसी एक मान्यता के लोगों पर संदेह करने को जायज़ ठहराया जा सकता है.

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Image caption रिपब्लिकन सेनेटर जॉन मैक्केन ने कहा है कि इससे आइसिस को फ़ायदा हो सकता है

'आइसिस को मिलेगा मौक़ा'

फ़्रांस के पूर्व विदेश मंत्री बर्नार्ड कुचनर ने कहा कि ट्रंप के मुस्लिम विरोधी रवैये का समर्थन करना नामुमकिन है.

उन्होंने कहा,"राष्ट्रपति ट्रंप के आतंकवादी-विरोधी होने की बात समझ आती है, मगर लोगों के अमरीकी एयरपोर्ट पहुँचने पर पाबंदी लगाना जैसा क़दम, मेरे ख़याल में काफ़ी ख़तरनाक है."

अमरीका के भीतर भी ट्रंप के फ़ैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं. रिपब्लिकन सेनेटर जॉन मैक्केन ने कहा कि ये बिना सोचे-समझे लिया गया फ़ैसला लगता है जिससे आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ना और मुश्किल हो जाएगा.

उन्होंने कहा,"मुझे लगता है कि इससे आइसिस को प्रोपेगेंडा का मौक़ा मिल सकता है. अगर हम चरमपंथियों और आइसिस के ख़िलाफ़ जंग की बात कर रहे हैं तो इस वक़्त मोसुल में लड़ाई चल रही है, और हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि आइसिस को मोसुल से खदेड़ने के बीच कोई अड़चन आए."

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Image caption सऊदी अरब के शाह से व्हाइट हाउस में बात करते डोनल्ड ट्रंप

ट्रंप प्रशासन अपने फ़ैसले पर कायम

मगर राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्विटर पर अपने फ़ैसले का बचाव किया है. राष्ट्रपति के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ राइंस प्रीबस ने कहा कि इससे कोई अफ़रा-तफ़री नहीं मची है.

उन्होंने कहा,"कल विदेशों से तीन लाख 25 हज़ार लोग अमरीका आए, इनमें पूछताछ के लिए 109 लोगों को हिरासत में लिया गया जिनमें अधिकतर को छोड़ दिया गया. मगर यदि कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें इस देश में नहीं होना चाहिए तो उन्हें हिरासत में रखा जाएगा."

मगर अमरीका के फ़ैसले पर अमरीका के बाहर आलोचना तेज़ होती जा रही है.

अरब लीग के प्रमुख अहमद अबूल गेथ ने इसे अस्वीकार्य बताया है.

वहीं ईरान और इराक़ ने इसके जवाब में अमरीकी नागरिकों के अपने देश में आने पर पाबंदी लगाने की धमकी दी है.

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