अधिकारियों ने कहा- साबित करो कि दूध पिलाती हो

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Image caption गायत्री बोस दो बच्चों की मां हैं.

एक महिला ने एयरपोर्ट पर हुए 'अपमानजनक' व्यवहार के लिए जर्मन पुलिस के पास शिकायत दर्ज़ कराई है.

महिला का आरोप है कि हवाईअड्डे पर सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने उन्हें सीना दबाने को कहा ताकि ये साबित हो सके कि वो बच्चे को दूध पिलाती हैं.

गायत्री बोस नाम की महिला ने बीबीसी को बताया कि उनके लिए ये अनुभव 'अपमानजनक' था और वो इसे लेकर कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही हैं.

गायत्री के मुताबिक उनके सामान में ब्रेस्ट पंप था लेकिन उनके साथ बच्चा नहीं था. इस वजह से जर्मनी के फ्रैंकफ़र्ट एयरपोर्ट पर तैनात पुलिस को उन पर संदेह हुआ.

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जर्मन पुलिस ने इन आरोपों को लेकर बीबीसी की ओर से किए गए सवाल पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया.

लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसे तरीके 'निश्चित ही' सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं.

सिंगापुर की नागरिक गायत्री बोस बीते गुरुवार को पेरिस के लिए विमान पकड़ने जा रही थीं. वो अकेली थीं. उन्हें सुरक्षा स्क्रीनिंग केंद्र पर रोका गया था.

33 साल की गायत्री ने बताया कि जैसे ही उनका बैग एक्सरे मशीन से गुजरा उन्हें पूछताछ के लिए अलग बुला लिया गया. इस बैग में ही उनका ब्रेस्ट पंप था.

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Image caption सुरक्षा अधिकारियों को ब्रेस्ट पंप को लेकर संदेह था.

उन्होंने बताया, " उनका तरीका संदेह करने वाला था. क्या आप बच्चे को दूध पिलाती हैं? आपका बच्चा कहां है? आपका बच्चा सिंगापुर में है?"

गायत्री बोस के मुताबिक अधिकारी ये मानने को तैयार नहीं थे कि वो उपकरण ब्रेस्ट पंप है.

अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट रख लिया और आगे के सवाल-जवाब के लिए एक महिला अधिकारी उन्हें एक कमरे में ले गईं.

गायत्री बोस का दावा है कि कमरे के अंदर पुलिस अधिकारी ने उन्हें ये साबित करने को कहा कि वो बच्चे को दूध पिलाती हैं.

गायित्री बोस ने बताया, " उन्होंने मुझे ब्लाउज खोलने को कहा. उन्होंने सवाल किया कि अगर मैं बच्चे को दूध पिलाती हूं तो मेरी छाती पर कुछ लगा क्यों नहीं है. तब मैंने कहा कि स्थायी तौर पर कुछ लगाने की जरुरत नहीं होती है. हम पंप लगाते हैं और बाकी काम मशीन करती है.वो चाहती थीं कि मैं हाथ से दबाकर दिखाऊं."

गायत्री के मुताबिक उन्होंने ऐसा ही किया.

वो कहती हैं, "मैं सदमे में थी. मुझे यकीन नहीं था कि अगर वो मुझे परेशान करने का फ़ैसला करते हैं तो मेरे साथ क्या होगा. जब मैं कमरे से बाहर आई तो मुझे धीमे-धीमे समझ आने लगा कि हाल में क्या हुआ है. मैं रोने लगी. मैं बहुत परेशान थी."

उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उसके बाद पंप की जांच की और इसके बाद उनका पासपोर्ट वापस लिया. इसके बाद उन्हें पेरिस के विमान में सवार होने की इजाज़त मिली. उन्होंने महिला अधिकारी का नाम पूछा जिसने कागज के एक टुकड़े पर लिखकर दिया.

गायत्री बोस के मुताबिक ये पूरा मामला करीब 45 मिनट तक चला. ये बहुत 'अपमानजनक' और 'बहुत तकलीफ' देने वाला था.

वो कहती हैं कि उनके साथ जो कुछ हुआ अधिकारी उसे लेकर बेपरवाह थीं.

गायत्री बोस एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में मैनेजर हैं. उनका एक बच्चा तीन साल और एक सात महीने का है.

गायत्री कहती हैं कि वो कानूनी कार्रवाई करने को लेकर विचार कर रही हैं.

वो कहती हैं, " संदेह के घेरे में आने वाले सामान की जांच से मैं सहमत हूं लेकिन एक व्यक्ति की शालीनता का अतिक्रमण हद पार करने जैसा है."

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फ्रैंकफ़र्त एयरपोर्ट पर जर्मन फेडरल पुलिस यूनिट के प्रवक्ता क्रिस्टियान एल्टेनहोफेन ने बीबीसी को बताया कि वो 'डाटा सुरक्षा' की वजह से इस घटना पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, "अगर कोई संदिग्ध चीज नज़र आती है तो सामान और व्यक्ति की जांच होनी चाहिए लेकिन दूध पिलाने वाली मां के साथ जिस तरीके की जांच के बारे में आप कह रहे हैं वो निश्चित तौर पर इस प्रक्रिया में शामिल नहीं है."

उड्डयन मामलों के विशेषज्ञ एलिस टेलर का कहना है कि एक मां से ये साबित करने को कहना कि वो दूध पिलाती है 'बेतुका' है.

वो कहते हैं, "ये सामान्य नहीं है. प्रशासन से जुड़े कुछ लोग हद पार कर देते हैं. मुझे ये अभूतपूर्व मामला दिखता है और साफ तौर पर कहूं तो बेहद अपमानजनक है."

उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में एक्सरे जांच होनी चाहिए. उसके बाद सामान पर विस्फोटक की जांच हो सकती है. अधिकारी यात्री से पंप ऑन करने को कह सकते हैं. ताकि जानकारी हो सके कि ये कैसे काम करता है.

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