ट्रंप के फैसले से अमरीकी विदेश विभाग में फूट

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डोनल्ड ट्रंप के मुसलमान बहुल देशों के नागरिकों के अमरीका आने पर पाबंदी लगाने के आदेश पर अमरीका के भीतर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं.

व्हाइट हाउस की तरफ़ से जारी चेतावनी के बावजूद, अमरीकी विदेश विभाग के लगभग 900 अधिकारियों ने मुसलमान बहुमत वाले सात देशों के आप्रवासियों और शरणार्थियों पर रोक लगाने के डोनल्ड ट्रंप के फ़ैसले के ख़िलाफ़ एक दस्तावेज़ पर दस्तख़त कर दिए हैं.

सोमवार को अमरीका की कार्यकारी अटॉर्नी जनरल ने भी ट्रंप का ये आदेश मानने से इंकार किया था.

विदेश विभाग के एक उच्च अधिकारी ने बीबीसी को इस बात की पुष्टि की है कि ये डिस्सेंट मेमो या असहमति दस्तावेज़ प्रबंधन के सुपुर्द कर दिया गया है.

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सोमवार को जब इस मुहिम की ख़बर आई थी तो व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि "जो लोग इस नीति से असहमत हैं वो छोड़ कर जा सकते हैं."

दस्तावेज़ के अनुसार ट्रंप ने जो एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया है वो अमरीकी मूल्यों के ख़िलाफ़ है और इससे पूरी दुनिया में अमरीका विरोधी भावनाओं को हवा मिलेगी.

विदेश विभाग के अधिकारियों ने लिखा है: "वो नीति जो 20 करोड़ वैध यात्रियों को इस मक़सद से रोकती है कि इससे कुछ गिने-चुने वैसे लोगों को रोका जा सकेगा जो अमरीका को नुक़सान पहुंचाना चाहते हैं वो अमरीका को सुरक्षित बनाने में कारगर नहीं होगी."

विदेश विभाग के अधिकारी डिस्सेंट मेमो के ज़रिए प्रशासन की नीतियों के ख़िलाफ़ असहमति जता सकते हैं.

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डिस्सेंट मेमो की शुरुआत वियतनाम युद्ध के दौरान हुई थी और हाल के वर्षों में ओबामा की सीरिया नीति के ख़िलाफ़ कुछ अधिकारियों ने इसका इस्तेमाल किया था.

सोमवार को अमरीका की कार्यकारी अटॉर्नी जनरल ने भी ट्रंप का ये आदेश मानने से इंकार किया था और कहा था कि वो इस आदेश से सहमत नहीं हैं.

अटॉर्नी जनरल के एलान के एक घंटे के बाद ही ट्रंप ने उन्हें बर्ख़ास्त करने का आदेश जारी कर दिया था.

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ट्रंप सात मुस्लिम बहुल आबादी वाले देशों के नागरिकों के आने पर रोक लगाने के अपने फ़ैसले पर अडिग नज़र आ रहे हैं, लेकिन पूरे देश में और उनकी अपनी पार्टी के कुछ सांसदों की तरफ़ से भी इसकी ख़ासी आलोचना हो रही है.

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