फंसे हैं बिज़नेसमैन ट्रंप के कई मामले

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डोनल्ड ट्रंप के अमरीका के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले व्यवसायों का क्या होगा.

इसमें भारत के रियल एस्टेट तक फैला उनका व्यवसाय भी शामिल है.

वे अमरीकी राष्ट्रपति के तौर पर पहले से कहीं अधिक प्रभावी होंगे तो क्या इससे उनके व्यवसायों पर असर पड़ेगा?

हम अलग-अलग देशों में मौजूद कुछ ऐसे ही उनके व्यवसायों और उससे जुड़े पहलुओं पर एक नज़र डाल रहे हैं.

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ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन ट्रंप के रियल एस्टेट निवेश, ब्रांड और दूसरे व्यवसायों को देखने वाली कंपनी है.

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इस कंपनी का मैनहट्टन में एक दफ़्तर है जिसके किराए से वो पैसा कमाती है. ब्लूमबर्ग न्यूज़ के मुताबिक़ इस इमारत के पूर्व किरायदारों पर पांच संघीय जांचें चल रही हैं.

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जाँच पर होगा असर?

ये सभी संघीय जांच सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन की ओर से चलाए जा रहे हैं और अब इसके नए प्रमुख डोनल्ड ट्रंप हैं.

डैकोता एक्सेस पाइपलाइन के निर्माण को लेकर अमरीका में कई महीनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

इस परियोजना में ट्रंप का भी निवेश है.

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Image caption डैकोता एक्सेस पाइपलाइन को लेकर विरोध

हालांकि ट्रंप की कंपनी की प्रवक्ता होप हिक्स ने बताया है कि ट्रंप ने इसके शेयर बेच डाले हैं.

लेकिन बेचने के बाद भी इस परियोजना में 25 फ़ीसदी शेयर ट्रंप के बचे हुए थे. यह अब तक साफ़ नहीं है कि ये शेयर बचे हुए है या नहीं क्योंकि उन्होंने मई में ही अपनी आख़िरी वित्तीय घोषणा की थी.

ट्रंप के रियल एस्टेट व्यवसाय में पैसा लगाने वाली सबसे अहम कंपनी डॉयचे बैंक है.

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इस बैंक के ऊपर फिलहाल अमरीका में कानूनी मामला चल रहा है और बैंक समझौता करने की प्रक्रिया में है. बैंक के ऊपर ग्राहकों को लोन के मामले में ग़लत जानकारी देने का आरोप है.

ट्रंप का दखल?

अब ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद इस मामले में वो दखल दे सकते हैं.

पिछले साल तीन नवंबर को नेशनल लेबर रिलेशन बोर्ड ने कहा था कि ट्रंप इटरनेशनल होटल लास वेगास ने होटल के कर्मचारी संघ के साथ हुए समझौते को तोड़ कर कानून का उल्लंघन किया है.

होटल ने इस मामले में हाई कोर्ट में अपील की है. नेशनल लेबर रिलेशन बोर्ड के सामने इस होटल के मजदूरों से जुड़े आठ विवाद पहले से मौजूद हैं.

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ट्रंप राष्ट्रपति बनने के बाद नेशनल लेबर रिलेशन बोर्ड के दो सदस्यों की नियुक्ति ट्रंप के हाथ में है.

नेशनल लेबर रिलेशन बोर्ड के सामने यह बड़ी दुविधा होगी कि कैसे वो राष्ट्रपति के व्यवसाय को प्रभावित करने वाला फ़ैसला दे.

ट्रंप के विदेशी निवेश

ट्रंप के बीस देशों में वित्तीय निवेश हैं जिसमें भारत, चीन और ताइवान जैसे एशियाई देश भी शामिल हैं.

इसलिए अमरीकी व्यवसायों के साथ-साथ ट्रंप के लिए संविधानिक पद पर होकर इन देशों में भी अपने व्यवसाय को जारी रखने में उलझन होगी.

भारत में ट्रंप की कंपनी के पास मुंबई और पुणे में इमारतें बनाने का लाइसेंस है. लोढ़ा ग्रुप कंपनी के साथ उनका एक सौदा है.

मंगल लोढ़ा इस ग्रुप के संस्थापक हैं. वो भारत में सत्तारूढ़ दल बीजेपी के उपाध्यक्ष भी है.

ट्रंप के जीतने के बाद उनके कुछ भारतीय व्यवसायिक साझेदार ट्रंप से मिलने और उन्हें बधाई देने अमरीका भी गए थे.

उन्होंने भारत-अमरीका संबंधों पर बात उनसे बात भी की थी.

चीन में बैंक ऑफ़ चाइना वहां का सबसे बड़ा बैंक है. न्यूयॉर्क बिल्डिंग के निर्माण में इस बैंक ने 95 करोड़ अमरीकी डॉलर कर्ज दिया है.

इस बिल्डिंग में ट्रंप भी एक साझेदार हैं.

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चीन के एक दूसरे बैंक इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना का ट्रंप टावर में जगह है. इसके लिए वो ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन को किराया देता है.

ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन ने चीन में होटलों की सिरीज़ खोलने की कोशिश कर चुकी है और ट्रंप होटल्स के चीफ़ एक्जिक्यूटीव एरिक डैनज़िगर ने हांगकांग में मीडिया से कहा है कि वे साल 2017 में बीस से तीस होटल खोलना चाहते हैं.

इसी बीच ट्रंप के दामाद जो कि अब सिनियर एडवाइजर है, चीन की कंपनी अनबांग इंश्योरेंस ग्रुप के साथ न्यूयॉर्क सिटी में 666 फीफ्थ एवेन्यू को फिर से विकसित करने को लेकर एक सौदा करने की प्रक्रिया में हैं.

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