जिस ज़हर से 700 कुत्ते मारे थे, उसी से ख़ुदकुशी

ताइवान
Image caption अपने कुत्ते के साथ चेंग

ताइवान में जानवरों को मारने पर प्रतिबंध लगाने वाला क़ानून शनिवार से लागू होने जा रहा है.

देश में आवारा जानवरों की दुर्दशा से दुखी होकर एक पशु चिकित्सक की आत्महत्या के एक साल बाद यह क़ानून लागू होने जा रहा है. बीबीसी की ताइवान संवाददाता सिडी सुई ने इस पूरी त्रासदी को बयां किया है.

शायद पशु डॉक्टर और जानवर प्रेमी चीन चिह चेंग ग़लत समय पर एक ग़लत पेशे में चली गई थीं.

ताओयुआन सिटी में आवारा कुत्तों के शेल्टर में उनकी सहकर्मी विनी लाई बताती हैं, ''वह अक्सर ओवरटाइम करती थीं. शायद ही कभी वह ठीक से लंच करने के लिए ब्रेक लेती थीं. कुत्तों की देखभाल करने के लिए वह अपनी छुट्टियां भी कुर्बान कर देती थीं. वह कुत्तों की बदतर स्थिति को दुरुस्त करने में लगी रहती थीं.''

सिविल सेवा परीक्षा की टॉपर

ताइवान की टॉप यूनिवर्सिटी से उन्होंने ग्रेजुएशन किया था. सिविल सेवा की परीक्षा में वह अव्वल आई थीं. चेंग हेड ऑफ़िस में डेस्क जॉब का चुनाव कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने ताइवान में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने की चुनौती को स्वीकार किया था.

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शेल्टर की लॉबी में जानवरों की तस्वीर लगी है. इन तस्वीरों के माध्यम से चेंग लोगों को इन आवारा जानवरों को गोद लेने के लिए उत्साहित करती थीं. पिछले साल पांच मई को चेंग ने ख़ुद को ही मार डाला. ख़ुद को मारने के लिए भी उन्होंने उसी दवाई का इस्तेमाल किया, जिसका इस्तेमाल जानवरों को मारने में किया जाता है. वह यह बताना चाहती थीं लोग समझें कि ताइवान में आवारा जानवरों के साथ क्या हो रहा है.

Image caption चेंग के द्वारा लगाई गईं तस्वीरें

आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहा ताइवान

इस आत्महत्या को लेकर ताइवान में काफ़ी ग़ुस्सा देखा गया था. लोगों ने पूछा कि छोड़ दिए गए पालतू कुत्तों से जूझने में ताइवान के वर्कर क्यों इतने दबाव में हैं. स्थानीय टीवी स्टेशन सीटीआई को चेंग ने एक इंटरव्यू दिया था.

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चेंग ने इस इंटरव्यू में कहा था कि पहली बार जब उन्होंने जानवर को मारते हुए देखा तो वह घर जाकर रात भर रोती रही थीं. हालांकि मीडिया में यह बात उस तरह से नहीं आई और उन पर निजी हमले हुए.

Image caption चेंग की सहकर्मी रोते हुए उनके बारे में बताती हुई

जब यह बात सामने आई तो वह पिछले दो सालों में 700 कुत्तों को ख़त्म कर चुकी थीं. उन्हें 'ख़ूबसूरत कसाई' के रूप में पेश किया गया. शेल्टर वर्कर्स कुत्तों को मारने के लिए कुख्यात हैं. हालांकि चेंग इसे अनचाहे चीज़ की बढ़िया अंत के रूप में देखती थीं. बढ़ती उम्र में इन जानवरों को ठसाठस भरे शेल्टर में रखना जोखिम भरा होता है क्योंकि बीमारी फैलने की आशंका रहती है.

चेंग को लोग ख़ूबसूरत कसाई कहते थे

चेंग के एक सहकर्मी काओ यू-जी ने बताया, ''उन्हें लोग कसाई कहते थे. हमें लोग आसानी से दोषी ठहराते हुए गाली देते हैं. कुछ लोग तो हमें कहते हैं कि नरक में जाएंगे. लोगों का कहना था कि हम हत्या से प्यार करते हैं. हालांकि लोग अब भी अपने पालतू कुत्तों को छोड़ दे रहे हैं.''

ताइवान में पालतू कुत्तों को छोड़ने की कई वजहें हैं- उनके कुत्ते ज़्यादा भौंकते हैं या उनके कुत्ते कम भौंकते हैं.

Image caption अब लोग कुत्तों को शेल्टर गोद ले रहे हैं

कुत्तों को घर से बाहर छोड़ने के ख़िलाफ़ अभियान

ताइवान में जानवरों को लेकर दो मुख्य समस्याएं हैं. भारी संख्या में पालतू कुत्तों को छोड़ दिया जाता है और फिर ये आवारा कुत्ते प्रजनन कर और कुत्तों को जन्म देते हैं. पिछले दशक से इस मामले में कुछ स्थिति सुधरी है. इसमें लोगों की जागरूकता का बड़ा योगदान है. लोगों ने कुत्तों को घर से बाहर छोड़ने के ख़िलाफ कैंपेन चलाया और फिर इन्हें ख़रीदने के बजाय गोद लेने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित किया.

लेकिन भारी संख्या में अब भी जानवर शेल्टर में रह रहे हैं और इन शेल्टरों की हालत बहुत ख़राब है. कुछ शेल्टरों में तो आधे से ज़्यादा जानवरों को मार दिया गया. 2015 में 10,900 जानवरों को मारा गया. इसके साथ ही पिछले साल 8,600 जावनर शेल्टरों में अन्य कई वजहों से मर गए.

Image caption जागरूकता के बाद स्थिति कुछ बदली

सीटीआई को दिए इंटरव्यू में चेंग ने कुत्ते को मारने की प्रक्रिया के बारे में कहा था, ''हम इन्हें पहले सैर के लिए निकालते हैं. फिर उन्हें कुछ खाने के लिए देते हैं. इसके बाद हम इन्हें एक कमरे में ले जाते हैं. जब इन्हें हम एक टेबल पर रखते हैं तो ये काफी डर जाते हैं. इसके बाद हम ड्रग का इंतज़ाम करते हैं. इस दवाई से इन्हें मरने में तीन से पांच सेकंड का वक़्त लगता है. यह काफ़ी दुखदायी प्रक्रिया है.'' शेल्टर स्टाफ को कोई मनोवैज्ञानिक ट्रेनिंग नहीं दी जाती है.

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