चीनी सरकारी मीडिया: सैनिक को छोड़े भारत

भारत में 54 साल से फंसे चीन के नागरिक वांग छी के बारे में छपी बीबीसी की कहानी पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा है कि इस मामले पर विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय के संपर्क में है.

54 साल से भारत में फंसा चीनी सैनिक

1963 में भारत में पकड़े गए वांग छी क्यों वापस नहीं जा सके - वीडियो देखें

उन्होंने कहा, "हमें इस मामले के बारे में पता है, खासकर जब बीबीसी डॉक्यूमेंट्री ने इसे ज़्यादा लोगों तक पहुंचा दिया है. हम ज़्यादा जानकारी के लिए गृह मंत्रालय के संपर्क में हैं. हम देखेंगे कि इस मामले को बेहतर तरीके से कैसे सुलझाया जाए."

इस कहानी पर भारत में चीन के दूतावास ने कहा था कि उन्हें वांग छी से सहानुभूति है और वो उनको लगातार मदद देते रहे हैं.

चीन की सरकारी मीडिया ने भी वांग छी की कहानी पर प्रतिक्रिया दी है.

चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कहा, "भारतीय अधिकारियों को इस मामले पर पूरा ध्यान देना चाहिए, चीन के दूतावास से सक्रियता से संपर्क करना चाहिए और इस मामले को निपटाने के लिए प्रशासनिक क्षमता को बेहतर बनाना चाहिए, जबकि चीन को ज़रूरी दस्तावेज़ भारत को मुहैया करवाने चाहिए जिनकी भारत को ज़रूरत है."

ग्लोबल टाइम्स ने कहा, "वांग छी की कहानी ने चीन के सोशल मीडिया पर काफ़ी हंगामा मचा दिया है और इस बात के लिए अपील बढ़ रही है कि उन्हें जल्द से जल्द घर पहुंचाया जाए. इस बात पर भी अटकलें लग रही हैं कि भारत जानबूझकर वांग के वापस जाने में मुश्किलें पैदा कर रहा है ताकि वो चीन न जा पाएं."

ग्लोबल टाइम्स की वेवसाइट के अनुसार, "चीन के दूतावास ने उन्हें 2013 में चीन का पासपोर्ट दिया था और उन्होंने 2014 में चीन जाने के लिए के लिए अनुमति की दरख़्वास्त दी लेकिन तब से ये दरख़्वास्त नई दिल्ली के आधिकारिक कार्रवाइयों में खोई हुई है. अगर परिवार से मिलने की उनकी उम्मीद टूट जाती है, इससे चीन के बड़ी संख्या में नेटिज़ंस की भावनाओं को झटका लगेगा."

पत्रिका के मुताबिक "इससे पहले 1962 के युद्ध में पकड़े गए दो चीनी सैनिकों को 35 साल तक मानसिक अस्पताल में रखने के बाद 2003 में छोड़ दिया गया था और उन्हें चीन भेज दिया गया. इससे उम्मीद बंधी थी कि दोनों देश 1962 युद्ध की परछाई से बाहर निकल पाएंगे."

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, "अगर इसे सही तरीके से हैंडल किया गया और सुलझा लिया गया, इससे दोनो देशों के लोगों के बीच आपसी समझ बढ़ाने में मदद मिलेगी जिससे दोनो देशों के संबंध बेहतर होंगे."

हांगकॉंग स्थित बीबीसी मॉनिटरिंग पत्रकार जेफ़ ली के मुताबिक इस ख़बर की चीन में ख़ासी चर्चा है.

ली के मुताबिक चीन में ट्विटर के तर्ज पर वेइबो पर ये कहानी गुरुवार को हैशटैग #ChineseSoldierTrappedInIndiaFor50Years से ट्रेंड कर रही थी.

करीब 30 लाख लोगों ने वेइबो पर इस हैशटैग का इस्तेमाल कर कहानी पढ़ी.

कई लोग चीन की सरकार से नाराज़ थे कि उसने अभी तक कोई इशारा नहीं दिया है कि वांग छी कब तक वापस चीन लौटेंगे.

'तिंगलाइओ चिगुआंग 123' ने कहा अगर बीबीसी ने ये कहानी नहीं की होती तो शायद उन्होंने ये कहानी सुनी ही नहीं होती.

पुटी शूचिन भी सरकार से नाराज़ थे. उन्होंने कहा, "विदेशी मीडिया में ख़बर आने के बाद (चीन के) दूतावास ने कहा कि इस मामले का पूरा निपटारा होगा. ये बिल्कुल चीन में रहने वाले लोगों जैसा व्यवहार है."

कुछ लोगों को लगा कि अगर वांग किसी और देश के होते तो उनके साथ अलग व्यवहार किया जाता.

ब्लू वेइलान ने लिखा, अमरीका वांग को बचाने के लिए बहुत पहले मदद भेज चुका होता. इस कमेंट को 400 लोगों ने लाइक किया.

कुछ ने कहा, उन्हें वांग के चीन आने की उम्मीद कम है.

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, वांग भारत में रहने की सोच सकते हैं, "आखिरकार उनका परिवार भारत में है."

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