उर्दू प्रेस रिव्यू: 'पहले कश्मीरियों को हक़ दो, फिर भारत से बात'

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भारत और पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात करें तो बीते सप्ताह पाकिस्तान में जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी, भ्रष्टाचार से जुड़ा पनामा लीक्स मामला, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और कश्मीर का मुद्दा सुर्ख़ियां बने तो भारत से छपने वाले अख़बारों में पांच राज्यों में होने वाले चुनावों से जुड़ी ख़बरें प्रमुखता से रहीं.

पहले बात पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों की

रोज़नामा ख़बरें के अनुसार पाकिस्तान की सूचना एवं प्रसारण मंत्री मरियम औरंगज़ेब ने कहा है कि कश्मीर का हर बच्चा बुरहान वानी है.

अख़बार के मुताबिक़ कश्मीरियों के साथ हमदर्दी जताने के लिए आयोजित किए गए एक सेमिनार में पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि भारत सिर्फ़ ताक़त के बल पर कश्मीरियों की आवाज़ नहीं दबा सकता है. उन्होंने कहा कि पहले कश्मीरियों को उनका हक़ देना होगा उसके बाद ही भारत से कोई बातचीत होगी.

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भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह का एक बयान पाकिस्तानी अख़बारों में छाया रहा. राजनाथ सिंह ने भारत के एक निजी न्यूज़ चैनल को इंटरव्यू में कहा था कि भविष्य में पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक नहीं करने की ज़मानत नहीं दी जा सकती.

भारत का दावा है कि उसकी सेना ने पिछले साल (2016) अगस्त में भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर हमले कर कई चरमपंथियों को मार दिया था जो भारत पर चरमपंथी हमले की योजना बना रहे थे. भारत ने इसे सर्जिकल स्ट्राइक का नाम दिया था. पाकिस्तान की सरकार भारत के इस दावे को अब तक ख़ारिज करती रही है.

रोज़नामा जंग लिखता है कि भारतीय गृहमंत्री ने इसी संदर्भ में इंटरव्यू के दौरान कहा था कि पाकिस्तान पड़ोसी मुल्क है अगर वो बदलता है तो भारत को इस तरह के क़दम उठाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी लेकिन अगर सीमापार में सक्रिय कोई चरमपंथी संगठन भारत को निशाना बनाता है तो फिर सर्जिकल स्ट्राइक दोबारा नहीं करने का आश्वासन नहीं दिया जा सकता है.

पाकिस्तानी सेना प्रमुख बाजवा की चुनौतियां

कौन हैं जनरल क़मर जावेद बाजवा?

सोशल: हाफ़िज़ सईद को नज़रबंद किए जाने पर क्या बोले पाकिस्तानी?

पाकिस्तान ने इसका जवाब दिया है जिसका ज़िक्र सभी अख़बारों में है.

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Image caption पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा

जंग के मुताबिक़ पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने कहा है कि भारत के किसी भी हमले का मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा.

रोज़नामा एक्सप्रेस के मुताबिक़ जनरल बाजवा ने कहा कि एलओसी पर फ़ायरिंग कर भारत अपने 'क़ब्ज़े वाले कश्मीर' में हो रहे ज़ुल्म से दुनिया का ध्यान हटाना चाहता है.

चरमपंथी संगठन जमातुददावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को नज़रबंद किए जाने की ख़बर भी सारे अख़बारों में पहले पन्ने पर रही.

अख़बार नवा-ए-वक़्त ने लिखा है कि पाकिस्तानी सेना ने हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी के फ़ैसले का स्वागत किया है.

अख़बार ने सेना के प्रवक्ता के हवाले से लिखा है कि हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी का फ़ैसला सरकार ने राष्ट्रीय हित में किया है.

रोज़नामा ख़बरें ने इसी मुद्दे पर सुर्ख़ी लगाई है, ''भारत शांति की ख़्वाहिश को कमज़ोरी न समझे: पाक सेना''.

रोज़नामा एक्सप्रेस ने लिखा है कि हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी के विरोध में पूरे पाकिस्तान में प्रदर्शन हुए और रैलियां निकाली गईं जिस दौरान भारत और अमरीका के झंडे भी जलाए गए.

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रोज़नामा जंग ने लिखा है कि पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत उठाया गया क़दम क़रार दिया है.

अख़बार गृहमंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से लिखता है, ''पाकिस्तान ने जमात-उद-दावा से संबंधित अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियां पूरी की हैं. पाकिस्तान को भारत के किसी सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं.''

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ज़रिए सात मुस्लिम देशों के नागरिकों को अमरीका आने से रोकने और कई देशों के लोगों को वीज़ा दिए जाने के नियमों में बदलाव को लेकर किए गए फ़ैसले की ख़बरें भी सुर्ख़ियां बटोरती रहीं.

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रोज़नामा एक्सप्रेस ने अमरीकी विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा है, ''पाकिस्तानियों पर किसी तरह की पाबंदी लगाने का कोई इरादा नहीं है.''

भारत से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से जुड़ी ख़बरें हफ़्ते भर सुर्ख़ियां बटोरती रहीं. हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के कुछ फ़ैसले भी पहले पन्ने पर दिखे.

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रोज़नामा ख़बर जदीद ने सुर्ख़ी लगाई है, ''इस्लामी देशों पर अमरीका में दाख़िल होने पर पाबंदी का फ़ैसला ख़ारिज''

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रोज़नामा सहाफ़त ने लिखा है, ''सूरज उगते ही ट्रंप का सूरज डूब गया, ज़्यादातर अमरीकी ओबामा की वापसी चाहते हैं.''

रोज़नामा सहारा ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख की एक चुनावी रैली का हवाला देते हुए लिखा है, ''आरक्षण को बनाए रखने के लिए बीएसपी का यूपी में सत्ता में आना ज़रूरी''

गुजरात में साल 2002 में हुए दंगे से जुड़ी एक ख़बर भी हर अख़बार में है.

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रोज़नामा सहारा ने पहली सुर्ख़ी लगाई है, ''गुजरात दंगों के 28 अभियुक्त बरी.''

अख़बार के अनुसार निचली अदालत ने ये कहते हुए 28 अभियुक्तों को रिहा कर दिया कि उनके ख़िलाफ़ कोई ठोस सुबूत नहीं थे.

रोज़नामा जदीद ख़बर ने आरएसएस कार्यकर्ता सुनील जोशी हत्याकांड और मालेगांव धमाकों के मामले में अभियुक्त प्रज्ञा ठाकुर की रिहाई पर संपादकीय लिखा है.

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अख़बार लिखता है कि प्रज्ञा ठाकुर को क्लीन चिट देने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जो तैयारियां की है उनमें उन्हें पहली सफलता मिल गई है.

मध्यप्रदेश की एक निचली अदालत ने आरएसएस कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या में अभियुक्त प्रज्ञा ठाकुर को बाइज़्ज़त बरी कर दिया है.

संपादकीय में अख़बार ने लिखा है कि अजीब बात ये है कि भारत ये उम्मीद करता है कि दुनिया भर में जहां कहीं भी चरमपंथी गतिविधियां हो रही हैं उनमें शामिल लोगों के ख़िलाफ़ उस देश के क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जानी चाहिए लेकिन जब भारत में ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ क़दम उठाने का वक़्त आता है तो एजेंसियों के हाथ कांपने लगते हैं. अख़बार आगे लिखता है आतंकवाद के मामले में निष्पक्ष हुए बग़ैर दहशतगर्दी का ख़ात्मा संभव नहीं.

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