7 मुस्लिम देश, जो ट्रंप के निशाने पर नहीं आएंगे और क्यों

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राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सात मुस्लिम बहुल देशों के अमरीका आने पर पाबंदी लगाने के आदेश से भ्रम की स्थिति बन गई है.

लेकिन जिन मुस्लिम बहुल देशों के अमरीका के साथ कारोबारी रिश्ते मज़बूत हैं, वो देश इस सूची में नहीं हैं.

प्रभावित देशों के वीजाधारकों को अमरीका जाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. उन्हें आशंका है कि अमरीका में दाखिल होने के लिए उनके पास सीमित विकल्प रह गए हैं.

हालांकि ट्रंप के आदेश पर एक फ़ेडरल कोर्ट ने रोक लगाई है और गूगल, ऐपल और फ़ेसबुक जैसी कंपनियों ने भी इस आदेश को अदालत में चुनौती दी है.

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ट्रंप प्रशासन के कार्यकारी आदेश में कहा गया था कि इराक़, सीरिया, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन से कोई भी व्यक्ति 90 दिनों तक अमरीका नहीं आ सकेंगे.

इसी आदेश के तहत अमरीका के शरणार्थी प्रवेश कार्यक्रम को 120 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था.

साथ ही सीरियाई शरणार्थियों के अमरीका में आने पर अनिश्चतकाल के लिए रोक लगा दी गई थी.

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दिलचस्प तथ्य ये है कि ट्रंप की इस सूची में सिर्फ़ एक ही नाम ऐसा है, जिसका अमरीका की माली हालत पर कुछ असर पड़ सकता है.

वो है इराक़, जिसके अमरीका से मज़बूत व्यापारिक संबंध हैं. अमरीका जिन देशों से तेल आयात करता है, उनमें इराक़ प्रमुख है.

वैसे अमरीकी विभाग यूएस सेन्सस ब्यूरो के मुताबिक़ दुनियाभर में ऐसे लगभग 47 मुस्लिम देश हैं जिनसे अमरीका के कारोबारी रिश्ते हैं और साल 2015 में इन देशों के साथ 220 अरब डॉलर का कारोबार हुआ.

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ब्यूरो के मुताबिक नवंबर 2016 तक इन देशों के साथ ये कारोबार करीब 195 अरब डॉलर तक पहुँच गया था.

ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार ट्रंप ने जिन मुस्लिम देशों को ट्रैवल बैन की सूची में डाला है, उनमें इराक़ को छोड़कर किसी दूसरे देश की अमरीकी व्यापार में हिस्सेदारी नाममात्र की है.

जिन मुस्लिम बहुल देशों के अमरीका के साथ कारोबारी रिश्ते मज़बूत हैं, वो देश इस सूची में नहीं हैं.

1-सऊदी अरब

मज़बूत कारोबारी रिश्ते वाले मुस्लिम देशों में सबसे ऊपर है सऊदी अरब.

सऊदी अरब अमरीका में बनी कारों, औद्योगिक मशीनरी, निर्माण उपकरणों, हवाई विमान, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाइयों का बड़ा ख़रीदार है.

यूएस सेन्सस ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार साल 2016 के 11 महीनों में सऊदी अरब को अमरीका का एक्सपोर्ट 31 अरब डॉलर तक पहुँच गया था.

यही नहीं, अमरीका की कई कंपनियों ने अपनी उप कंपनियों (सब्सडिरियों) के मार्फत सऊदी अरब में अरबों डॉलर का निेवेश किया है, जिनमें अकेले जनरल इलेक्ट्रिक ने ही 100 करोड़ डॉलर निवेश किया है.

दिलचस्प बात ये है कि अमरीका पर 9/11 हमले के अभियुक्तों में से अधिकांश के तार सऊदी अरब से जुड़े थे.

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2- मलेशिया

मलेशिया का अमरीका से सालाना करीब 23 अरब डॉलर का कारोबार होता है.

यही नहीं डाओ केमिकल, मर्फ़ी ऑयल, कोनको फिलिप्स और एक्सॉन मोबिल जैसी कंपनियों ने मलेशिया में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है.

3- संयुक्त अरब अमीरात

यूएन सेन्सस के रिकॉर्ड के अनुसार साल 2016 में नवंबर तक अमरीका का अमीरात के साथ व्यापार 23 अरब डॉलर के आंकड़े को छू गया था.

सैकड़ों की तादाद में अमरीकी कंपनियां संयुक्त अरब अमीरात में काम कर रही हैं. बोइंग जैसी कई अमरीकी कंपनियों के मध्य पूर्व के मुख्यालय दुबई में हैं.

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4- इंडोनेशिया

इंडोनेशिया दुनिया का सबसे ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है. यूएन सेंसस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में नवंबर तक द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा 23 अरब डॉलर तक पहुँच गया था.

इंडोनेशिया के सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमरीका से आयात के मुक़ाबले निर्यात अधिक है.

2013 में जहाँ इंडोनेशिया ने अमरीका को 15 अरब डॉलर से अधिक के सामान का निर्यात किया, वहीँ आयात का आंकड़ा करीब 9 अरब डॉलर रहा.

5- तुर्की

तुर्की की व्यापार इकाई टस्कॉन के अनुसार तुर्की में 1200 से अधिक कंपनियों के दफ्तर हैं. यही नहीं अमरीका के साथ द्विपक्षीय व्यापार भी लगातार बढ़ता जा रहा है.

टस्कॉन के अनुसार जहाँ 2012 में व्यापार का ये आंकड़ा 21 अरब डॉलर का था, वहीं यूएस सेन्सस के मुताबिक साल 2016 के 11 महीनों में द्विपक्षीय व्यापार इस आंकड़े को पीछे छोड़ गया है.

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6- मिस्र

मिस्र के साथ भी अमरीका के व्यापारिक रिश्ते अच्छे रहे हैं. मार्च 2016 में मिस्र की राजधानी काहिरा में हुए सम्मेलन में 53 अमरीकी कंपनियों ने मिस्र में निवेश करने में रुचि दिखाई थी.

7- कुवैत

कुवैत में अमरीकी टेक्नोलॉजी, सेवाओं और उत्पादों की भारी मांग है.

यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि 90 के दशक में कुवैत पर सद्दाम हुसैन के हमले के बाद अमरीका ने ही कुवैत की मदद की थी.

इसके बाद से कुवैत में बड़ी तादाद में अमरीकी कंपनियां काम कर रही हैं.

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