नाम मुस्लिम हो तो नौकरी मिलनी कितनी मुश्किल?

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
क्या ब्रिटेन में मुस्लमान महिला होना एक चुनौती ?

नौकरी मांगने वाले किसी व्यक्ति के नाम से क्या बदल जाता है. अगर आवेदक कोई अंग्रेज/गैर मुसलमान हो तो क्या इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने के अवसर बढ़ जाते हैं.

बीबीसी की एक पड़ताल में ये बात सामने आई कि ब्रिटेन में किसी अंग्रेज को एक मुसलमान के बनिस्पत इंटरव्यू के तीन गुना ज़्यादा मौके मिलते हैं.

भारत में भी सरकारी से लेकर प्राइवेट सेक्टर तक में मुसलमानों की सीमित मौजूदगी को लेकर सवाल उठते रहे हैं. एक तबका इसे भेदभाव से भी जोड़कर देखता है.

ट्रंप के अमरीका में हिजाब पहन दिखाई ताकत

ये भेदभाव है या मुसलमानों की कमियां?

जेलों में मुसलमानों की बड़ी तादाद, आखिर क्यों?

सवाल उठता है कि एक ही तरह का अनुभव और प्रोफाइल रखने वाले दो लोग 'एडम' और 'मोहम्मद' के लिए क्या बदल जाता है.

नौकरी के लिए भेजे गए 100 आवेदनों में एडम को 12 जगहों से इंटरव्यू के लिए बुलाया आया जबकि मोहम्मद को चार जगहों से.

हालांकि बीबीसी की इस पड़ताल का सैंपल साइज बहुत छोटा था.

मुसलमानों का भेदभाव का आरोप

पूरी दुनिया में खतरे में हैं अल्पसंख्यक लोग

'बैंकों में मुसलमानों के प्रति भेदभाव'

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तारिक मदूद कहते हैं, "यह साफ तौर पर जाहिर होता है कि मुस्लिम नाम वाले लोगों के तीन आवेदनों में से एक ही पर इंटरव्यू के लिए विचार किया जाता है. लंदन जैसे शहर में ये आंकड़ें मेरी उम्मीद से बहुत खराब हैं."

उनका कहना है, "यहां बहुत विविधता है. यहां दुनिया भर से लोग आते हैं. उन्हें काम की तलाश रहती है और इस शहर को भी प्रतिभाओं की भूख है."

हालांकि भेदभाव की शिकायत केवल मुसलमानों की नहीं है.

यूरोप में मुसलमानों के साथ भेदभाव

'मुसलमानों की ओर भी हाथ बढ़ाएं ट्रंप'

मार्शल आर्ट सीखतीं मुस्लिम महिलाएं

Image caption नाम की वजह से भेदभाव का शिकार होने की बात योगेश भी करते हैं

योगेश कृष्ण दवे की उम्र 56 साल है. वे एक दवा कंपनी में सीनियर पोजीशन पर हैं. इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें दशकों लग गए.

वे भी यही बात कहते हैं कि नाम की वजह से उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया.

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के हालिया रिसर्च में ये बात सामने आई कि मुस्लिम पुरुषों को अपने इसाई समकक्षों की तुलना में नौकरी मिलने की संभावना 76 फीसदी कम रहती है.

ब्रितानी मुसलमान चिंतित

ब्रिटेन में क़ब्रिस्तानों में जगह की कमी

ब्रिटेन: युवाओं में मुसलमानों की छवि 'नकारात्मक'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
रोहिंग्या मुसलमानों के साथ भेदभाव

2011 के जनगणना के आंकड़ें के मुताबिक 82 लाख की आबादी वाले लंदन शहर में मुसलमानों की संख्या 10 लाख के आसपास है.

लेकिन मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन का कहना है कि दूसरे सामाजिक समूहों की तुलना में मुसलमानों में गरीबी ज्यादा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे