ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध पर रोक बरकरार

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अमरीका की संघीय अपील अदालत से राष्ट्रपति ट्रंप को नुकसान पहुंचा है.

ट्रंप के विवादित यात्रा प्रतिबंध आदेश पर रोक लगाने के सिएटल की एक अदालत के फ़ैसले को अपीली अदालत ने बरकार रखा है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने 27 जनवरी को एक विवादित एक्ज़ीक्यूटिव आदेश पारित कर सात मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के अमरीका आने पर रोक लगा दी थी.

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अदालत के इस फ़ैसले पर पुनर्विचार के लिए संघीय अपील अदालत में सुनवाई हुई जिसने अदालत के फ़ैसले को बरकरार रखा.

अपील अदालत ने कहा कि इन मुस्लिम देशों से ख़तरे के सबूत नाकाफ़ी थे.

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फ़ैसले के बाद ट्रंप ने ट्वीट किया कि अदालत में मिलेंगे, हमारे देश की सुरक्षा पर ख़तरा है.

ट्रंप ने इस फ़ैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है लेकिन माना जा रहा कि ये दलील हजम करना लोगों के लिए मुश्किल काम होगा. उसकी वजह ये है कि बेंच के तीन जजों में से दो डेमोक्रैटिक रूझान वाले और एक रिपब्लिकन रूझान वाले माने जाते हैं और ये फ़ैसला सर्वसम्मति से हुआ है यानि तीनों ही जजों की इसपर एक जैसी राय थी.

राष्ट्रपति की शक्तियां

इससे पहले, ट्रंप ने अपने उस विवादास्पद आदेश का बचाव करते हुए कहा था कि विदेशियों के अमरीका आने पर प्रतिबंध लगाने का उन्हें क़ानूनी अधिकार है.

पुलिस प्रमुखों की एक बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने संघीय अपील अदालत में इस यात्रा प्रतिबंध पर पुनर्विचार की ट्रंप ने इस फ़ैसले को राजनीति से प्रेरित बताया था और इस सुनवाई को शर्मनाक करार दिया था और कहा कि ऐसा राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि लगता है कि अदालतें भी सियासी हो गई हैं और बेहतर होता कि वो बयानों को पढ़ते और वो करते जो सही है.

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जजों के कड़े सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान अपील कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के विवादित यात्रा प्रतिबंध का बचाव करने वाले और उसे चुनौती देने वालों से कड़े सवाल पूछे.

तीन जजों के एक पैनल ने राष्ट्रपति की ताक़त को सीमित करने और सात देशों को आतकंवाद से जोड़ने पर सबूतों को लेकर कई सवाल खड़े किए थे.

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