सुप्रीम कोर्ट में भी ट्रंप की राह आसान नहीं

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Image caption ट्रंप के लिए अपना ही फ़ैसला बना परेशानी का सबब

अमरीकी अपील कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की उस कोशिश को झटका दिया है, जिसमें वह ट्रैवल बैन को फिर से बहाल करने का प्रयास कर रहे थे. अब ट्रंप इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं.

ट्रंप ने सात मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों और शरणार्थियों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इस पर अमरीका की निचली अदालत ने रोक लगा दी थी. अदालत की इस रोक हटाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने अपील कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें यहां से भी झटका लगा है.

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ट्रंप के ट्रैवल बैन के फ़ैसले पर कोर्ट की रोक

ट्रंप के लिए यह बड़ा झटका है. कोर्ट ने साफ़ कहा कि यह फ़ैसला अमरीकी संवैधानिक और लोकतांत्रित मूल्यों के ख़िलाफ़ है.

इस फ़ैसले के बाद ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि देश की सुरक्षा दांव पर है और वह इसे कोर्ट में देखेंगे. नौवें अमरीकी सर्किट कोर्ट ने कहा कि वह निचली अदालत के फ़ैसले पर रोक नहीं लगाएगा.

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Image caption ट्रंप के लिए सुप्रीम कोर्ट की राह भी आसान नहीं

सुप्रीम कोर्ट जाएंगे ट्रंप?

ट्रंप अगर सुप्रीम कोर्ट जाते हैं, जिसके पूरे आसार हैं तो वहां भी फ़िलहाल आठ जजों की बेंच है. इनमें चार रिपब्लिकन रूझान वाले हैं और चार लिबरल रूझान वाले. अगर वहां फ़ैसला चार-चार का होता है तो फिर आज का यह फ़ैसला बरक़रार रहेगा.

यहां के क़ानूनी जानकर कह रहे हैं कि ट्रंप अगर वीज़ा क़ानूनों में सख़्ती चाहते हैं तो उनके लिए सबसे बेहतर रास्ता होगा कि इस पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करें और कांग्रेस की सहमति के साथ एक बिल लाएं, जिसे संवैधानकि तौर पर चुनौती नहीं दी जा सके.

लेकिन काफ़ी हद तक एक घूंसे के जवाब में फ़ौरन चार घूंसे लगाने की नीति में यक़ीन रखनेवाले डोनल्ड ट्रंप के लिए ये एक मुश्किल फ़ैसला होगा. उनकी कोशिश तो यही होगी कि कुछ ऐसा हो जिसे वो फ़ौरन अपनी जीत के तौर पर पेश कर सकें.

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इस पर तीन जजों के एक पैनल ने सर्वसम्मति से फ़ैसला सुनाया है. इस पैनल ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इस बात को साबित करने में नाकाम रहा कि प्रतिबंध आतंकी ख़तरों को रोकने के लिए है.

कोर्ट ने कहा, ''जिस तर्क की बुनियाद पर सरकार ने सात देशों के नागरिकों के आने पर अस्थायी रोक लगाई है उसके पक्ष में ठोस सबूत नहीं दे पाई.''

ट्रंप का कहना है कि कोर्ट का फ़ैसला राजनीति से प्रेरित है.

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Image caption ट्रंप के फ़ैसले का अमरीका के भीतर भी हो रहा है विरोध

हालांकि, तीन जजों के जिस पैनल ने यह फ़ैसला सुनाया है उनमें से दो की नियुक्ति जिमी कार्टर और ओबामा के शासनकाल में हुई थी और एक की रिपब्लिकन जॉर्ज डब्यू बुश के वक़्त में. ऐसे में ये बात लोगों के गले से मुश्किल से उतरेगी कि यह सियासी फ़ैसला है.

ट्रंप को नए अटॉर्नी जनरल जेफ़ सेशन की नियुक्ति में कांग्रेस से पुष्टि लेने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

ज़ाहिर है ट्रंप के नए अटॉर्नी जनरल के लिए ट्रैवेल बैन को कायम रखना एक बड़ी चुनौती होगी.

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