"सेक्स शिक्षा की कमी टाइम बम जैसी है"

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भारत के स्कूलों में तो सेक्स की पढ़ाई अभी नाम मात्र की होती है लेकिन ब्रिटेन में भी इसे लेकर चिंता बढ़ गई है. जानकार तो मान रहे हैं कि सेक्स की पढ़ाई ना होने से पैदा हुई स्थिति "टाइम बम जैसी है जिसकी टिक टिक सुनाई दे रही है."

ये हालत तब है जब ब्रिटेन के ज़्यादातर स्कूलों में सेक्स की अनिवार्य पढ़ाई होती है.

इंग्लैंड में स्थानीय सरकारों के संघ, एलजीए यानी लोकल गवर्नमेंट एसोसिएशन का मानना है कि सभी सरकारी सेंकेंडरी स्कूलों में सेक्स की अनिवार्य पढ़ाई होनी चाहिए.

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यौन शिक्षा पर आपत्ति

संघ का कहना है कि छात्रों को जवान होने के लिए तैयार नहीं किया जा रहा है और ऐसे में उनके यौन संक्रमण का शिकार होने का खतरा है.

एलजीए का कहना है कि उचित उम्र में सभी छात्रों के लिए यौन शिक्षा को उनके पाठ्यक्रम का जरूरी हिस्सा बनाया जाना चाहिए, लेकिन फिलहाल अभिभावकों के पास यह विकल्प है कि वो अपने बच्चे को इससे दूर रख सकें.

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 2015 में इंग्लैंड के 78,066 यौन संक्रमण के शिकार हुए. ये संख्या 15-19 साल की उम्र के बच्चों की है. 20-24 साल के युवाओं में यह तादाद 141,260 थी.

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सेक्स एजुकेशन देने वाले टीचरों की मुसीबत

सार्वजनिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है और उसके मुताबिक हर साल करीब 60 करोड़ पाउंड यौन स्वास्थ्य पर खर्च हो रहे हैं.

सेक्स शिक्षा से असंतुष्ट युवा

15 साल की एक लड़की ने कहा, "हममें से बहुत सारे 16 की उम्र में पहुंच रहे हैं जो सेक्स के लिए कानूनी उम्र है, हमारे लिए ये जानना जरूरी है कि रिश्तों में क्या अनुचित है."

15 साल के एक लड़के ने कहा, "सेक्स को अब भी वर्जित विषय माना जाता है और टीचर इसके बारे में बात करने में असहज हैं. इस विषय को बिल्कुल जीव विज्ञान की तरह पढ़ा दिया जाता है जिसमें रिश्तों के बारे में बात नहीं होती और सब कुछ बस कुछ ही अध्यायों में ड्रग्स एजुकेशन के साथ सत्र के अंत में निबटा दिया जाता है."

16 साल की एक लड़की ने अपने साथ हुए बुरे अनुभव के बारे में बताया, "मेरे साथ यौन हिंसा हुई और किसी ने नहीं बताया कि जो मेरे साथ हुआ वो गलत था. हम एक अनजान डर में घिर गए. वो मेरे दादा थे. मुझे ये अच्छा नहीं लगा लेकिन मैं नहीं जानती थी कि ये गलत था. मैं लज्जित थी क्योंकि मुझे लगा कि ये मेरी गलती थी. अगर मुझे पता होता कि ये गलत था तो मैं किसी को इस बारे में बता सकती थी, और अगर कोई मेरी बात सुनता तो शायद यह पहले ही रुक सकता था."

बीते कुछ सालों में सेक्स की पढ़ाई को लेकर अभियान चला रहे लोगों ने इसे गर्मजोशी से उठाया है. सांसद भी इसके बारे में चर्चा कर रहे हैं और युवाओं के लिए इसे ज़्यादा और अच्छा बनाने पर बात हो रही है.

फिलहाल इंग्लैंड के सभी सरकारी स्कूलों को राष्ट्रीय पाठ्ययक्रम के तहत सेक्स की पढ़ाई करानी होती है.

समस्या है उन स्कूलो के लिए जिन्हें केंद्र सरकार चलाती है. इन स्कूलों का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम से बंधा होना जरूरी नहीं और इसलिए सेक्स की पढ़ाई कराने की इन पर बाध्यता नहीं है.

वास्तव में बहुत से स्कूल और मुफ़्त शिक्षा देने वाले स्कूलों में सेक्स के बारे में पढ़ाई नहीं होती.

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"सेक्सुअल हेल्थ टाइम बम"

एलजीए की सामुदायिक सुख बोर्ड के प्रमुख इज्ज़ी सेकोम्बे का कहना है कि यह स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा एक प्रमुख मुद्दा है.

सेकोम्मबे ने कहा, "स्कूलों में सेक्स और रिश्तों के बारे में अनिवार्य पढ़ाई की कमी से जीवन में आगे के लिए समस्याएं जमा हो रही हैं, ये एक टाइम बम की तरह है जिसकी टिक टिक सुनाई दे रही है, जिन लोगों ने हाल ही में स्कूल छोड़ा है उनमें हम ये देख रहे हैं."

प्राचीन कलाकृतियां पढ़ा रही हैं सेक्स का पाठ

इसी तरह सेक्स एजुकेशन फोरम की लिसा हॉलगार्टेन का कहना है कि बच्चे औऱ युवा लगातार हमें बता रहे हैं कि मौजूदा व्यवस्था में जो हमें शिक्षा मिलती है वो उन्हें उनके शरीर, यौन स्वास्थ्य और आदर्श रिश्तों के बारे में पर्याप्त जानकारी देने में नाकाम है."

शिक्षा विभाग के प्रवक्ता का इस बारे में कहना है, "सेक्स और रिश्तों के बारे में उच्च स्तरीय पढ़ाई बच्चों को बड़े होने के बाद की जिंदगी में सफल होने के लिए तैयारी का जरूरी हिस्सा है."

ब्रिटेन की संसद के निचले सदन में बच्चों की भलाई के लिए फिलहाल इस बारे में एक क़ानून बनाने पर बहस हो रही है.

सरकार के मंत्री कहते हैं कि वो ऐसे तरीकों की खोज में हैं जिनके जरिए सभी छात्रों को आसानी से सेक्स और रिश्तों के बारे में जानकारी मिल सके.

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