'मैंने ज़िंदगी में ऐसा ख़ौफ़नाक मंज़र नहीं देखा'

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पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मशहूर सूफ़ी संत शाहबाज़ कलंदर की दरगाह पर हुए हमले में कम से कम 70 लोगों की मौत हो गई है.

हमले में 100 से ज़्यादा लोग ज़ख़्मी भी हुए हैं.

पुलिस का कहना है कि इस चरमपंथी हमले को इस्लामिक स्टेट ने अंजाम दिया है.

हमले के चश्मदीदों का कहना है कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में ऐसे दृश्य कभी नहीं देखे.

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एक प्रत्यक्षदर्शी बाक़िर शेख ने बीबीसी को बताया कि विस्फोट के लगभग दस मिनट के बाद जब वह दरगाह परिसर में पहुंचे तो 'वहाँ चारों तरफ़ हिंसा के निशान थे. हर तरफ़ मानव अंग बिखरे हुए थे.'

उन्होंने भारी मन से बताया, ''लाल कलंदर पर पहले कभी ऐसा हमला नहीं हुआ, हमारे शहर में कभी इतनी तबाही नहीं हुई. मैंने ऐसा ख़ौफ़नाक मंज़र ज़िंदगी में कभी नहीं देखा.''

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हमले के एक और चश्मदीद ग़ुलाम क़ादिर ने बीबीसी को बताया कि वे दरगाह के दरवाज़े पर अपने चार दोस्तों के साथ बैठे थे कि ज़ोरदार धमाका हुआ और वे सब बाहर भागे.

उन्होंने बताया कि वह थोड़ी दूर जाकर रुके तो दरगाह के अंदर से घायल हालत में लोग बाहर निकल रहे थे और साथ में चीख-पुकार रहे थे कि अंदर तबाही हुई है.

ग़ुलाम क़ादिर ने कहा है कि उसके बाद अंदर जाकर उन्होंने जो हालत देखी वो बयान नहीं की जा सकती, फ़र्श पर हर तरफ ख़ून था और लोग एक दूसरे पर गिरे हुए थे.

विस्फोट के समय वहां मौजूद एक महिला ने बताया कि वह दरगाह में थी कि अचानक ज़ोरदार धमाका हुआ और आँखों के सामने अंधेरा छा गया.

उन्होंने बताया, "मुझे ऐसा लगा कि जैसे नजदीक आग लगी हुई है, उसके बाद मुझे होश नहीं रहा"

महिला के अनुसार उन्हें सभी फ़कीरनी के नाम से जानते हैं और वह लंबे समय से दरगाह में सफाई का काम करती हैं.

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उन्होंने कहा ''मैंने अपने होश में ऐसा मंज़र कभी नहीं देखा.''

सेहवान के अस्पताल के बाहर मौजूद पुलिसकर्मी दोस्त अली ने बताया कि अस्पताल के बाहर विस्फोट में घायल और मृतकों के रिश्तेदारों के अलावा कई नागरिक मौजूद थे.

उन्होंने कहा कि इनमें कई लोग ऐसे थे जो विस्फोट के समय दरगाह के अंदर मौजूद थे, लेकिन जब उनसे पूछा तो वह सदमे के कारण कुछ बताने में असमर्थ थे.

दोस्त अली ने बताया कि आज शहर में हर आंख नम है.

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