इसराइली सैनिक की सज़ा पर नाराज़गी

  • 21 फरवरी 2017
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Image caption अज़ारिया के दावों से कोर्ट नहीं हुआ सहमत

एक जख़्मी फ़लस्तीनी हमलावर को जान से मारने के मामले में इसराइली सैनिक को 18 महीने की सज़ा सुनाई गई है.

इसराइल में यह केस काफी हाई-प्रोफाइल बन गया था. इस सज़ा को लेकर देश भर में चर्चा हो रही है और लोगों की राय बँटी हुई है.

पिछले साल मार्च में पश्चिमी तट के हेब्रोन में 21 साल के अब्दुल फ़तह अल-शरीफ़ की हत्या के मामले में एलोर अज़ारिया को दोषी ठहराया गया. अज़ारिया ने अपने एक सहयोगी से कहा था कि शरीफ़ ने एक सैनिक को छुरा भोंका था इसलिए उसे मौत ही मिलनी चाहिए थी.

सैन्य प्रमुख ने इसकी निंदा की थी, लेकिन कई लोगों ने इस क़दम की प्रशंसा भी की थी.

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Image caption अज़ारिया के पक्ष में जुटे प्रदर्शनकारी

इस केस को लेकर इसराइल में तीखी बहस हुई. इस बात को लेकर भी बहस हो रही थी कि एक सैनिक को हमलावरों के ख़िलाफ़ कितना आक्रामक होना चाहिए. यह वाकया फ़लस्तीनियों की तरफ़ से लगातार हो रहे हमले के बाद हुआ था जिसमें पांच महीने में 29 इसराइली मारे गए थे.

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ऐसे अपराध में 20 साल की सज़ा होती है लेकिन अभियोक्ता ने अज़ारिया के लिए तीन से पांच साल तक की सज़ा की मांग की थी. शरीफ़ के पिता ने सज़ा को लेकर निराशा ज़ाहिर की है.

उन्होंने कहा, ''डेढ़ साल की सज़ा मज़ाक है. ऐसा लग रहा है कि हम पर कोई हंस रहा है.'' इसराइली न्यूज़ वेबसाइट यनेट ने शरीफ़ के पिता की प्रतिक्रिया का उल्लेख किया है.

उन्होंने कहा, ''मेरा बेटा कोई जानवर नहीं था. अगर आप एक पत्थर फेंकते हैं तो आपको दो साल की सज़ा मिलती है. वहीं एक सैनिक हत्या करता है तो केवल डेढ़ साल की सज़ा होती है.''

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Image caption हमले का वह दृश्य

अज़ारिया को डिमोट करने का भी आदेश दिया गया. बीबीसी के जॉनी डायमंड ने बताया कि जब सज़ा सुनाई जा रही थी तब अज़ारिया मुस्कुरा रहे थे और उनकी मां ने उन्हें गले लगा लिया.

जज माया हेलर ने कहा, ''तथ्यों के आधार पर अज़ारिया का जुर्म कम किया गया है. अज़ारिया के साथ ऐसा पहली बार हुआ है. इन्होंने सक्रिय सैन्य सेवा में अपनी भूमिका अदा की है. यहां पर कोई साफ़ निर्देश नहीं है कि उन्हें क्या करना चाहिए था.'' जज ने इस बात को भी संज्ञान में लिया कि अज़ारिया को इसके लिए कोई पछतावा नहीं है.

कई दक्षिणपंथी प्रदर्शनकारियों ने तेल अवीव में रक्षा मंत्रालय के सामने विरोध-प्रदर्शन किया. यहीं पर सैन्य अदालत में अज़ारिया को सज़ा सुनाई गई. देश के शिक्षा मंत्री नफताली बेनेट ने प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से अज़ारिया को तत्काल माफ़ करने की अपील की है. इससे पहले नेतन्याहू ने कहा था कि माफी से जुड़े किसी भी फ़ैसले का वह समर्थन करेंगे.

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