'अमरीका ने प्यार छीना, प्यार बांटने लौटूंगी'

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Image caption सुनयना दुमाला और श्रीनिवास कुचीवोतला

अमरीकी राज्य कैनसस के ओलेथ में हुए एक हमले में मारे गए भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचीवोतला की पत्नी सुनयना दुमाला का कहना है कि उनके पति 'अमरीका से प्यार' करते थे. वो यहां तमाम सपने लेकर आए थे और यहीं रहना चाहते थे.

श्रीनिवास के शव के साथ भारत लौटने के पहले सुनयना ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि वो ये बताने के लिए अमरीका वापस आना चाहती हैं कि जहां उनके प्यार को छीना गया और वो वहीं प्यार बांट रही हैं.

श्रीनिवास कुचीवोतला की बुधवार को ओलेथ के एक बार में हुई गोलीबारी में मौत हो गई. इस हमले में उनके दोस्त आलोक मदासानी और एक अमरीकी व्यक्ति भी घायल हो गए. आलोक को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है.

अमरीका में भारतीय इंजीनियर की हत्या

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Image caption दाएं से बाएंः मृतक श्रीनिवासन कुचीवोतला और घायल आलोक मदासानी और इएन ग्रिलॉट.

इस हमले को लेकर 51 साल के एडम पुरिंटन के ख़िलाफ मामला दर्ज़ किया गया है.

बढ़ती नफ़रत

श्रीनिवास और आलोक अमरीकी कंपनी गारमिन में काम करते थे. वो दोनों अक्सर ऑस्टिन बार एंड ग्रिल में जाते थे.

सुनयना कहती हैं कि डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद वो और उनके पति नस्लभेद को लेकर बढ़ती नफ़रत को लेकर चिंतित थे, लेकिन उनके पति अमरीका छोड़ना नहीं चाहते थे. एफ़बीआई इस बात की जांच कर रही है कि क्या श्रीनिवास और आलोक पर हुआ हमला नस्लीय था.

सुनयना दुमाला ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में हमले वाले दिन का पूरा ब्योरा, पति की मौत, परिवार की स्थिति और अमरीका में आए बदलाव को लेकर अपनी चिंताओं की जानकारी दी. उनकी कहानी उन्हीं की ज़ुबानी पढ़िए -

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बुधवार को क्या हुआ?

बुधवार को मैं उस वक़्त नहा ही रही थी जब वो तैयार होकर आए और मुझे बाय बोलकर चले गए. शाम को मैं उनका इंतज़ार कर रही थी और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही थी. आलोक की पत्नी रिप्ती गर्भवती हैं. मैं उन्हें खाना भेज रही थी.

एक दोस्त के पूछने पर मैंने बताया कि श्रीनिवास का फ़ोन नहीं मिल रहा है. उन्होंने इसे स्विच ऑफ़ कर दिया होगा. उस दोस्त ने बताया कि वो उनके साथ नहीं हैं. रात सवा आठ बजे तक वो नहीं आए. मैंने रिप्ती को मैसेज किया और पूछा कि क्या आलोक घर पर हैं.

उन्होंने बताया कि एक दोस्त का एक्सीडेंट हो गया है और उन्हें आने में आधी रात से ज्यादा वक्त हो सकता है. एक बेवकूफ़ लड़की की तरह मैंने ये बात मान ली. उसके बाद उन्होंने मुझे मैसेज किया और उस बार का नाम पूछा जहां वो अक्सर जाते हैं.

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Image caption हमलावर एडम पुरिंटन को गोलीबारी के पांच घंटे बाद गिरफ़्तार कर लिया गया.

मैंने कहा कि ऑस्टिन और पूछा कि वो ऐसा क्यों पूछ रही हैं? मुझे खाना खाते वक़्त फ़ेसबुक देखने की आदत है जिसे वो कभी पसंद नहीं करते थे. फ़ेसबुक पर मैंने एक गोलीबारी का वीडियो देखा. मैंने खुद से सवाल किया कि क्या फिर कुछ हो गया है? कौन घायल हुआ है? तब मैंने ऑस्टिन को देखा.

सुरक्षा जांच

मुझे लगा कि मेरे पति हमेशा मेरे बारे में सोचते हैं और जब चारों तरफ़ इतना तनाव है. घर से बाहर नहीं आने को लेकर चेतावनी दी जा रही है वो मेरे पास तक पहुंचने की कोशिश क्यों नहीं कर रहे हैं. वो मुझे क्यों नहीं बता रहे हैं कि वो सुरक्षित हैं.

मैं श्रीना और आलोक के दोस्त मंजो की पत्नी सुचराता को बता रही थी कि मुझे श्रीना को लेकर बड़ी चिंता हो रही है. उनका फोन बंद है. आलोक भी पहुंच से बाहर हैं. सशश्री का फोन भी पहुंच में नहीं है. क्या तुम्हें जानकारी है कि गोली चली है?

उन्होंने बताया कि कुछ गड़बड़ लगती है. वो इसे नस्लभेद का मामला बता रहे हैं. तब उनके दोस्त शीशी घर आए. मैंने उनसे पूछा कि श्रीना मर चुके हैं, ये सच है ना? उन्होंने सिर हिलाया. उसके बाद मैंने पूछा कि जिनकी स्थिति गंभीर है क्या वो वही हैं?

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उन्होंने फिर सिर हिलाया. मैंने कहा कि हमें अस्पताल जाना चाहिए. गैराज के दरवाज़े पर मैं गिर पड़ी. उन्होंने कहा कि वो हम में से किसी को जाने की इजाज़त नहीं देंगे. पुलिस अधिकारी आएंगे और वो हमें बताएंगे. दो पुलिस अधिकारी आए. उन्होंने मेरा नाम पूछा.

श्रीना का नाम, उनकी जन्मतिथि पूछी. फिर उन्होंने मेरे सामने आसानी से वो शब्द कहे. उन्होंने कहा कि उन्हें दुख है लेकिन... मैं अस्पताल गई. मुझे सुरक्षा जांच से गुज़रना पड़ा. ये अस्पताल का नियम है. मेरे पति का वहां शव था और मुझे सुरक्षा जांच से गुज़रना था.

नस्लभेद से जुड़ा मामला

एक एफ़बीआई के प्रतिनिधि और एक स्थानीय अधिकारी कल शाम को घर आए. उन्होंने कहा कि आपके पति और उनके दोस्त बीयर पी रहे थे और अपनी सिगरेट का मज़ा ले रहे थे. ये शख्स पीछे की टेबल पर बैठा था. वो आया और ज़ोर-ज़ोर से बोलने लगा.

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वो कह रहा था कि तुम इस देश के नहीं हो. हमने इस इलाके में नस्लभेद का अनुभव नहीं किया था. कई बार लोग आपको घूरकर देखते हैं और आप समझ जाते हैं. इस समुदाय में लोग काफ़ी दोस्ताना रवैया रखते हैं.

यहां आने पर पड़ोसियों ने हमें शुभकामनाएं दीं. जब हम आइओवा में थे तब एक या दो बार हमने एक या दो बार ऐसा महसूस किया था. लोग ग़लत तरीके से सवाल करते थे कि हम कहां से हैं?

अमरीका से था प्यार

हम यहां कई सपने लेकर आए थे. वो अपने देश के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे. मुझे पता नहीं मेरी बात पर आपको यक़ीन होगा या नहीं. भारत ने हाल में एक साथ कई सैटेलाइट लॉन्च कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था.

तब मैंने श्रीना से कहा कि इसराइल में नौकरी के लिए आवेदन करो (मुझे लगता है कि वो भारत के बारे में कह रही थीं) तब उन्होंने कहा कि मुझे जो भी हासिल करना है. यहीं हासिल करना होगा.  

मारे गए भारतीय इंजीनियर की पत्नी ने अमरीका से पूछा

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Image caption हमला ऑस्टिन बार एंड ग्रिल नाम के रेस्तरां में हुआ

वो अमरीका से प्यार करते थे. वो यहां पढ़े. उन्होंने कई दोस्त बनाए. बीते हफ़्ते हम अपने दोस्तों और उनके हाल में पैदा हुए बच्चे को देखने के लिए आइओवा गए थे. जब हम लौट रहे थे और मैं गाड़ी चला रही थी तब वो काम कर रहे थे. वो काम से इतना प्यार करते थे.

चुनाव के बाद बदला अमरीका

मैंने हालिया चुनाव पर क़रीबी नज़र रखी थी. जिस दिन नतीजे आए मैं रात भर सो नहीं सकी क्योंकि वॉशिंगटन से एक पारिवारिक मित्र आए हुए थे. उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने मिस्र के एक मुस्लिम परिवार को अपना तलघर (बेसमेंट) किराए पर दिया और लोग ख़ुलेआम कोसने लगे. 

पहले ये पीछे होता था, लेकिन अब ख़ुलेआम हो रहा है. मैं इतनी फ़िक्रमंद थी कि सो नहीं सकी. मैं सोचती रही कि क्या हम इस देश में सुरक्षित हैं? मुझे लगता है कि नफ़रत की बुनियाद पर होने वाले अपराध और खुलकर होंगे.

क्या हमारे लिए मॉल और ऑफ़िस जाना सुरक्षित होगा? श्रीनिवास ने कहा कि नानी चिंता मत करो. हमारे लिए सब दुरुस्त रहना चाहिए. अगले दिन मैंने अपने ऑफ़िस की साथी अनु से यही सवाल किया.

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हमने फ़ेसबुक पर वीडियो देखा जिसमें एक बुज़ुर्ग महिला एक स्पेन की महिला से कह रही थी कि तुम इस देश की नहीं हो. इस तरह की तमाम चीज़ें एक सवाल खड़ा करती रहीं कि क्या हमें वापस जाना होगा.

लेकिन तब मुझे लगता था कि अगर हम अपने काम से काम रखेंगे तो कोई हमारे पास नहीं आएगा. हालिया चुनाव के बाद कम से कम मैंने ज़्यादा ग़ौर करना शुरू किया.शायद मैं समाचारों में ये अक्सर देख रही थी.

प्यार बांटने लौटूंगी अमरीका

जैसा मैंने कहा, मैं उनके लिए (अपने पति के लिए) वापस आना चाहती हूं. यहां मौजूद तमाम लोगों को देखिए. उन सभी के मन में ये सवाल है. जब मैंने इस बारे में सुना तो मैंने कहा कि हम चले जाएंगे और कभी इस देश में वापस नहीं आएंगे.

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Image caption आलोक मदासानी

अब मुझे लगता है कि मुझे यहां के लोगों को ये दिखाने के लिए वापस आना होगा कि तुमने मेरे प्यार को छीना, लेकिन मैं प्यार बांटने के लिए यहां हूं. जो लोग नफ़रत फ़ैलाते हैं उनकी संख्या कुल जनसंख्या की एक या दो फ़ीसदी हो सकती है. उनकी वजह से बाकी 98 फीसदी लोगों को दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

सदमे में परिवार  

मेरे माता-पिता और उनके माता-पिता सब हिल से गए हैं. उन्हें यक़ीन नहीं हो रहा है कि वो अब दुनिया में नहीं हैं. जब कोई छोटी या बड़ी सलाह लेनी हो तो वो अपने पिता के सबसे भरोसेमंद बेटे थे.

हाल में उन्होंने अपने पिता के लिए एक कार ख़रीदी थी. वो इसे लेकर बहुत खुश थे. तीन भाइयों में वो सबसे छोटे थे. मैं हमेशा सुना करती हूं कि ये तीनों बहुत शरारती थे. सुना है कि हमले में घायल हुए आलोक अब ठीक हैं.

मुझे लगता है कि वो खुद को इसके लिए जिम्मेदार मान रहे हैं. शायद वो श्रीनिवास को वहां नहीं ले गए होते. लेकिन श्रीना अपनी मर्ज़ी से ही गए थे.

हर तरफ श्रीना का प्यार

प्यार को कैसे याद करती हूं ये बताना मुश्किल है. मैं जो कुछ करती हूं वो हर उस जगह मौजूद हैं.

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