कुत्तों की हज़ार मील लंबी रेस

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अलास्का के सबसे बड़े शहर एंकरेज में शनिवार को गजब का नजारा देखा गया. दर्जनों कुत्ते एक हजार मील लंबी रेस के लिए तैयार थे.

ये कुत्ते साधाराण नहीं हैं. ध्रुवीय प्रदेशों में पाए जाने वाले ये कुत्ते बर्फीले रास्तों पर स्लेज गाड़ियों को खींचने के काम आते हैं.

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दौड़ की शुरुआत का जश्न मनाते लोग. क़रीब 1610 किलोमीटर की यह दौड़ अलास्का के सुनसान इलाक़े में होती है. हालांकि एंकरेज का नज़ारा रस्मी शुरुआत का था.

रेस की असली शुरुआत फ़ेयरबैंक्स में सोमवार को होनी है और इसका आखिरी पड़ाव तटवर्ती शहर नोम होगा.

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दौड़ में शामिल कुत्तों का तालियां बजाकर हौसला अफ़ज़ाई करते दर्शक.

पिछले तीन सालों में ये दूसरा मौका है जब इटिटैरोड डॉग रेस की आधिकारिक लॉन्चिंग एंकरेज के बजाय फ़ेयरबैंक्स से की जा रही है.

जगह बदले जाने की वजह एंकरेज में पर्याप्त सर्दी यानी ज़रूरत के मुताबिक बर्फ की कमी बताई गई है.

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पहाड़ी इलाकों से होकर गुज़रनेवाली रेस में इससे ख़तरा हो सकता है.

इस साल कुत्तों की दौड़ के आयोजन का 45वां साल है. इतिहास में ये तीसरा मौका है जब रेस की स्टार्ट लाइन बदली गई है.

पहली बार ऐसे 2003 में हुआ था और दूसरी बार 2015 में. तस्वीर में स्लेज पर बैठी दो महिलाएं.

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इस साल रेस के इवेंट में 72 टीमें भाग ले रही हैं. अलास्का इलाके में रहने वाले लोगों के लिए यह गर्व का मौका होता है.

इस रेस से जुड़ी कुछ और भी बातें हैं जो इसे दिलचस्प बनाती हैं. कुत्तों और उनकी गाड़ियों की लोकेशन को जीपीएस टेक्नोलॉजी से ट्रैक किया जाता है.

दुनिया भर में इस खेल के दर्शक इसकी प्रोग्रेस रिपोर्ट और अपनी टीम पर इंटरनेट के जरिए नज़र रख सकते हैं.

तस्वीर में दौड़ में शामिल कुत्तों के आने का इंतज़ार करते बच्चे.

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राह में चुनौतियां भी कम नहीं हैं. बर्फीली हवाएं और शून्य से 40 डिग्री फ़ारेनहाइट नीचे तक का तापमान उनका इंतजार कर रहा होता है.

सफर पूरा करने में टीमों को नौ दिन से 17 दिन का वक्त लगता है.

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