अमरीकी वीज़ा था फिर भी उन्हें रोक दिया गया

  • 6 मार्च 2017
अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग. इमेज कॉपीरइट EPA

वैध पहचान पत्र होने के बाद भी अमरीका में हिरासत में लिए गए एक अफ़ग़ान परिवार को रिहा कराने के लिए वकीलों ने याचिका दायर की है.

इस दपंति को उनके तीन बच्चों को पिछले हफ़्ते लॉस एंजेल्स के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही हिरासत में लिया गया.

अपनी जान जोख़िम में डालकर अमरीकी सेना के लिए काम करने के बदले इस परिवार को स्पेशल इमिग्रेंट वीज़ा दिया गया था.

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ओर से जिन मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के आने पर लगाई गई पाबंदी लगाई गई है, उनमें अफ़ग़ानिस्तान का नाम शामिल नहीं है.

यह आदेश इन देशों के नागरिकों के अमरीका आने पर पाबंदी लगाता है. हालांकि इस आदेश पर संघीय अदालत ने रोक लगा दी है.

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इसके बाद डोनल्ड ट्रंप प्रशासन एक नया कार्यकारी आदेश लाने की तैयारी कर रहा है. इस परिवार की रिहाई के लिए इंटरनेशनल रिफ्यूजी असिस्टेंट प्रोजेक्ट ने याचिका दायर की है.

याचिका में कहा गया है कि इस परिवार को हिरासत में लेने का कोई क़ानूनी आधार नहीं है. यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है.

इंटरनेशनल रिफ्यूजी असिस्टेंट प्रोजेक्ट के निदेशक बेक्का हिलर ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को ओरेगन के अत्यधिक सुरक्षा वाली जेल में रखा गया है.

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उन्होंने बताया कि इस व्यक्ति की पत्नी और बच्चों को लॉस एंजेल्स में इसी तरह की एक जेल में ले जाया गया जहां से बाद में उन्हें एक होटल में ले जाया गया. बच्चों की उम्र सात साल, छह साल और आठ महीने है.

स्पेशल इमिग्रेंट वीज़ा कांग्रेस ने शुरू किया था. यह इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान के उन नागरिकों को दिया जाता है, जो वहां अपनी जान जोख़िम में डालकर अमरीकी सेना की ड्राइवर, अनुवादक और अन्य कामों में मदद करते हैं.

इस परिवार की वकालत कर रहे लोगों में से एक वकील ने कहा कि ऐक ऐसा व्यक्ति जिसके पास ख़ास तरह का वीज़ा है, उसे आते ही हिरासत में लिए जाना अगर पूरी तरह विचित्र नहीं तो एकदम से अलग मामला है.

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क़ानूनी मदद करने वाले एक समूह पब्लिक काउंसिल के एक वकील ने कहा, ''इस वीज़ा के लिए अच्छी तरह से जांच-पड़ताल ज़रूरी है.''

कैलिफ़ोर्निया की शांता अना की ज़िला अदालत में दाखिल याचिका में कहा गया है कि यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटक्शन के एजेंटों ने इस परिवार को अकेले में रखा और उन्हें वकील से मिलने भी नहीं दिया गया.

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