इसीलिए मैंने पॉर्न को गले लगाया: ब्रिटिश पॉर्न स्टार

  • 17 मार्च 2017
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Image caption कर्ली रे ने बताया कि उन्होंने पॉर्न को क्यों चुना

ब्रिटेन की एक चर्चित पॉर्न स्टार कर्ली रे, इस इंडस्ट्री को लेकर लोगों के रवैये से सहमत नहीं हैं. वो कहती हैं कि पॉर्न इंडस्ट्री को लेकर लोगों के ज़ेहन में बड़े नकारात्मक ख़्याल हैं जो ग़लत हैं. कर्ली रे पर बीबीसी-3 ने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई. इसमें उन्होंने बताया कि कैसे वो इस इंडस्ट्री में रहने का लुत्फ़ उठा रही है.

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मेरे दोस्त मुझे जेड नाम से बुलाते हैं. हालांकि ट्विटर अकाउंट पर मेरे फॉलोवर्स कर्ली रे नाम से जानते हैं. मैं 23 साल की हूं और मैनचेस्टर में रहती हूं. मैंने यूनिवर्सिटी में फैशन की पढ़ाई की है और मेरे पास डिग्री है. पर मैंने अपना करियर फैशन इंडस्ट्री में नहीं बनाया.

मैंने जहां करियर बनाया उसे जानकर लोगों को हैरानी हुई. मैंने इसे लेकर बीबीसी थ्री की डॉक्यूमेंट्री में बात की है. इस डॉक्यूमेंट्री का नाम है- 'जेड: क्यों मैंने पॉर्न को चुना'. मुझे उम्मीद है कि लोगों ने यह डॉक्यूमेंट्री देखी होगी और मेरी चाहत को समझा होगा.

इस डॉक्यूमेंट्री में मेरा होना महत्वपूर्ण है क्योंकि मैं चाहती थी कि लोग पॉर्न इंडस्ट्री को जिस रूप में देखते हैं उसकी हक़ीकत सामने आए.

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सामान्य तौर पर मीडिया में पॉर्न को नकारात्मक रूप में ही देखा जाता है. इसमें शामिल लोगों को बुरी वजहों के लिए जाना जाता है. हमलोग इस इंडस्ट्री को एकतरफा नज़रिए से देखते हैं.

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मेरे लिए ऐसा नहीं है. मैं अपनी इस जॉब से प्यार करती हूं क्योंकि इससे मुझे काफी मौके मिले. मैं यह नहीं कह रही कि यह बहुत अच्छा है. यह काम क्या है? कई बार यह बहुत थकाऊ है. कई बार मैं ऐन मौकों पर ख़ुद को बेइंतहा आलसी पाती हूं.

इसकी शुरुआत तड़के होती है और घंटो काम करना पड़ता है. छह बजे जागना, लंदन में आठ बजे ट्रेन पकड़ना और 11 बजे रात से पहले घर लौटना नहीं होता है. लेकिन ऐसा देश में रह रहे ज़्यादातर लोगों के लिए होगा.

ख़ासकर एक मॉडल के रूप में दुनिया की यात्रा करने में जीवन बिताने का सपना मेरा कभी नहीं था. मैं चाहती हूं कि लोग समझें कि इसने मुझे बेहतरी के लिए बदला. पॉर्न इंडस्ट्री में मैं तेजी से बढ़ी. इसने मेरे भीतर आत्मविश्वास को भरा.

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मैं एक सक्षम महिला बनकर उभरी. इसने मुझे जीवन को समझने का मौका दिया. मैं कोई और करियर का चुनाव करती तो जो हासिल करना चाहती थी, वो कभी नहीं कर पाती.

इस प्रोग्राम में मैंने पॉर्न इंडस्ट्री की कई जटिलताओं पर बात की. किसी पॉर्न स्टार के साथ एक बॉयफ्रेंड का सहज रहना मुश्किल है. मुझे एक अमीर पुरुष ने जख़्मी कर दिया था क्योंकि मैं पूरी तरह से जोश में नहीं थी.

हालांकि यह एक अपवाद की तरह है. मैंने यहां अनुभवों से सीखा है. पुरुष प्रभुत्व वाली दुनिया में किसी भी महिला को अपनी सोच को स्थापित करने के लिए लड़ना पड़ता है.

पॉर्न से न केवल मेरे व्यक्तित्व का निर्माण हुआ बल्कि जो चीज़ें सेक्स एजुकेशन में नहीं थीं, उन्हें भी मैंने सीखा. मैं उन लड़कियों को जानती हूं जिन्हें टीवी और मैगज़ीन में देखती हूं.

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उन्हें पूर्णता के चक्कर में बदल दिया गया लेकिन मेरी देह बिल्कुल सामान्य है. पोर्नोग्राफ़िक फ़िल्मों को देखते हुए और इस इंडस्ट्री की लड़कियों के आसपास रहते हुए मुझे पता है कि मैं यहां अकेली नहीं हूं. मेरी तरह ही हर दिन यहां की महिलाएं उन जटिलताओं का सामना करती हैं.

यहां ख़ुद को निर्दोष बताना काफी मुश्किल काम है. मुझे अपनी देह कबूल है और मैं अपनी छवि को लेकर आत्मविश्वास से भरी हूं. 21 साल की उम्र में आर्थिक रूप से ख़ुद को मजबूत पाकर मैं ख़ुद को भाग्यशाली समझती हूं.

इस डॉक्यूमेंट्री में मैंने ख़ुद को महिलावादी बताया है. मुझे अपने जीवन पर पूरा नियंत्रण है और इसी हिसाब से मैंने फ़ैसले लिए. मैं ख़ुद की बॉस हूं.

मुझे जो शूट करना होता है वही मैं करती हूं. मेरे ऊपर किसी थर्ड पार्टी का कोई दबाव नहीं रहता है. ये सभी सकारात्मक चीज़ें कुछ नकारात्मक बातों के असर को कम कर देती हैं.

जब लोग इस डॉक्यूमेंट्री को देखें तो मैं चाहूंगी कि लोग इस बात को समझें कि पॉर्न ऐक्टर्स की छवियों के बारे में वो जो धारणाएं बनाते हैं वो हमेशा वह सच नहीं होता है.

जब लोग मुझसे मेरे करियर के बारे में पूछते हैं तो वे पूछ रहे होते हैं कि क्या मैं अपने पेशे को एन्जॉय कर रही हूं.

ज़्यादातर लोग मेरे करियर को लेकर हैरान रहते हैं. ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि मुझे इस धंधे में जाने पर मजबूर किया गया. लोग इस बात को नहीं समझ पाते कि मैं इस इंडस्ट्री में आने के लिए उत्साहित थी. मैं जो जीवन में चाहती थी उसे ही मैंने चुना.

मुझे अपनी तरक्की पर लोगों की नकारात्मक प्रतिक्रिया आती है. हर कोई अपने विचार के लिए स्वतंत्र है. मैं जानती हूं कि पॉर्न सभी के लिए नहीं है. मैं जो जीवन जी रही हूं वह बिल्कुल आज़ाद है और हर कोई इसे नहीं अपना सकता है.

हमलोग उस दौर में जी रहे हैं जिसमें महिलाएं पीरिअड्स के बारे में खुलकर बात नहीं कर सकती हैं. ऐसे में अभी लंबा वक़्त है जब समाज में लोग मेरी तरह सोचें. मुझे अपने फ़ैसले पर कोई खेद नहीं है.

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