ईशनिंदा मामलों की जाँच के लिए टीम भेजे फ़ेसबुक: पाकिस्तान

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Image caption पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर ईशनिंदा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन होता रहा है

सोशल नेटवर्क पर र्ईशनिंदा करने वालों की जांच के लिए पाकिस्तान ने फ़ेसबुक से मदद मांगी है.

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के मुताबिक़ फ़ेसबुक भी इस मामले में मदद करने के लिए अपनी एक टीम पाकिस्तान भेजने तैयार हो गया है. ये टीम इस तरह के कंटेट को रोकने के बारे में बताएगी.

हालांकि फ़ेसबुक की तरफ से कोई प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान भेजे जाने की पुष्टी नहीं की गई है.

पाकिस्तान का कड़ा रुख़

पाकितान का नया क़दम इस्लामाबाद हाई कार्ट के आदेश के बाद उठाया गया है. इसमें कोर्ट ने सरकार से कहा था कि अगर वो सोशल मीडिया पर इस्लाम का अपमान करने वाली सामग्री रोकने में नाकाम है तो सोशल मीडिया को ब्लॉक कर दे.

पाकिस्तान में ईशनिंदा संवेदनशील और उत्तेजक मुद्दा है.

आलोचकों का कहना है कि ईशनिंदा क़ानून के तहत कुछ मामलों में मौत की सज़ा तक का प्रावधान है, लेकिन अकसर इसका दुरुपयोग अल्पसंख्यकों को दबाने में किया जाता है.

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इसी हफ़्ते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने सोशल मीडिया पर ईशनिंदा की सामग्री पर व्यापक पैमाने पर कड़ी कार्रवाई की बात की थी.

अपनी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर नवाज़ शरीफ़ ने ईशनिंदा को 'अक्षम्य अपराध' बताया था.

इसके बाद गुरूवार को गृहमंत्री चौधरी निसार अली ख़ान ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान की दृढ़ता का हवाला देते हुए कहा था कि वो पाकिस्तान के इस संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए हर तरह के ज़रूरी क़दम उठाएंगे.

निसार ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से अमरीका में एफबीआई और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संपंर्क में रहने को कहा है.

आलोचकों का आरोप

डॉन अख़बार के मुताबिक़ निसार ने कहा 'फेसबुक के अलावा कई और सोशल सर्विस प्रोवाइडर को ईशनिंदा करने वाले लोगों की जानकारी हमें देना चाहिए.'

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हालांकि ऑनलाइन पर अब तक ईशनिंदा से जुड़े कुछ ही आधिकारिक विवरण मिले हैं लेकिन पिछले दिनों ईशनिंदा के आरोपों में पैगम्बर मोहम्मद की आलोचना से लेकर क़ुरान को लोकर अनुचित बातें तक शामिल थीं.

हालांकि कुछ आलोचकों का कहना है कि ये नया क़दम विरोध करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने का तरीक़ा है.

हाल ही में जब पांच ब्लॉगर और कार्यकर्ता ग़ायब हुए तो सोशल मीडिया में उनपर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. ये एक ऐसा गंभीर आरोप है जो किसी को जनता के ग़ुस्से का शिकार बना सकता है.

पाकिस्तान अकसर अश्लील साइटों और इस्लाम विरोधी सामग्री वाली साइटों को ब्लॉक करता रहा है. साल 2010 में पाकिस्तान की कोर्ट ने पैग़म्बर मोहम्मद का कार्टून पोस्ट होने पर फेसबुक को ब्लॉक कर दिया था.

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