'काम भले अच्छा करो, पटाखा छूट ही जाता है'

  • 17 मार्च 2017
इमेज कॉपीरइट TWITTER

फ़िल्म 'पद्मावती' एक बार फिर से चर्चा में है. महाराष्ट्र के कोल्हापुर के मसई इलाके में लगे 'पद्मावती' के सेट पर कुछ लोगों ने मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को आग लगा दी थी.

इस घटना पर शबाना आज़मी का कहना है, "ये बहुत ग़लत है. ये हमारी मुल्क़ की सेहत के लिए बहुत ख़राब है. इस मुद्दे को बहुत संजीदगी से लेना चाहिए. सरकार को क़ानून के तहत सख़्ती से क़दम उठाना चाहिए."

"आज के माहौल में हम देख रहे हैं कि दस लोग कहीं से भी उठकर किसी भी चीज़ पर ऐतराज़ करते हैं. यहाँ तो किसी भी चीज़ को रोकने के लिए हिंसा अपनाई जा रही है."

शबाना ने कहा, "अभिव्यक्ति की आज़ादी कलाकार की सबसे बड़ी ताक़त है और इस ताक़त को दबाया जा रहा है ये लोकतंत्र के लिए अच्छा नही है. किसी भी लोकतंत्र में आपको ये हक़ है कि आप अपनी बात कहें जो आपको पसंद न हो, बात कहने का एक तरीका होना चाहिए लेकिन वो तरीका हिंसा नही हो सकती. .संजय लीला भंसाली के सेट पर हुई इस घटना की मैं हर तरह से निंदा करती हूँ."

इमेज कॉपीरइट SCREEN AWARD PR

इससे पहले जनवरी में जयपुर में लगाए गए 'पद्मावती' के सेट पर राजपूत करणी सेना के लोगों ने जमकर तोड़-फोड़ की थी और फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ हाथापाई भी की थी.

इसके बाद भंसाली ने जयपुर में फिल्म की शूटिंग रद्द कर दी थी. इसी घटना के बाद 'पद्मावती' की शूटिंग के लिए महाराष्ट्र के कोल्हापुर के मसई पठार इलाक़े को चुना गया था.

अब जब वहां भी लोगों ने सेट पर आग लगा दी तो फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग भी संजय लीला भंसाली के पक्ष में खुलकर बोल रहे हैं.

इस पर भारतीय फ़िल्म निर्माता सुभाष घई का कहना है, "कोई कितना भी अच्छा काम करे लेकिन कहीं न कहीं पटाखा छूट ही जाता है. हमारे देशवासियों को आदत हो गई है पटाखे छोड़ने की."

"कभी किसी को मना करना, किसी को तंग करना, आग लगाना. भंसाली एक कलाकार हैं उनको फ़िल्म बनाने दीजिए. ये बहुत दुःख की बात है कि लोग इस तरह की हरकतें कर रहे हैं.

बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे