पहली बार जेल से बाहर आए मिस्र के मुबारक

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मिस्र के 2011 में अपदस्थ किए गए पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता से हटाए जाने के छह साल बाद आज़ाद कर दिया गया है.

मुबारक के अधिवक्ताओं के मुताबिक़ वो क़ाहिरा के एक सैन्य अस्पताल से अपने घर चले गए हैं.

2011 के प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों के मामले में मिस्र की शीर्ष अपीलीय अदालत ने उन्हें इसी महीने बरी कर दिया था.

88 वर्षीय मुबारक 1981 में अनवर सादात की हत्या के बाद मिस्र के राष्ट्रपति बने थे.

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2013 के बाद से उन्हें दक्षिणी क़ाहिरा के मादी सैन्य अस्पताल में रखा गया था. इससे पहले वो तोराह जेल में क़ैद थे.

पुलिस गोलीबारी में प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में 2012 में दोषी क़रार दिए जाने के बाद अदालत ने उन्हें उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.

इस मामले की दोबारा से सुनवाई हुई थी और 2015 में एक जज ने आदेश दिया था कि मुबारक को रिहा किया जा सकता है.

डर से नहीं हो रही थी रिहाई

हालांकि उनकी रिहाई के बाद संभावित जनाक्रोश के डर से राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल सीसी की सरकार उन्हें रिहा नहीं कर रही थी.

सीसी मुबारक के प्रशासन में उनके मिलिट्री इंटेलिजेंस चीफ़ थे.

सीसी ने ही सैन्य तख़्तापलट करके मुबारक के बाद 2013 में राष्ट्रपति बने मोहम्मद मुर्सी को अपदस्थ कर दिया था.

2011 के प्रदर्शन और हिंसा

2011 में मिस्र में बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे.

18 दिन चले प्रदर्शनों के दौरान क़ाहिरा, एलेक्सांड्रिया, स्वेज़ और देश के अन्य इलाक़ों में पुलिस की गोलीबारी में 800 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

इन प्रदर्शनों के बाद मुबारक ने पद छोड़ दिया था.

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